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Trending Desk (16 July 2026): राजस्थान में मानसून की बेरुखी और भीषण उमस भरी गर्मी के बीच इंद्रदेव को प्रसन्न करने के लिए एक बेहद अनोखा नजारा देखने को मिला। बांसवाड़ा जिले में लोक परंपरा और लोक आस्था का निर्वहन करते हुए बाकायदा मेंढक और मेंढकी का विवाह पूरे रीति-रिवाज के साथ संपन्न कराया गया।
इस अनोखी शादी की चर्चा अब पूरे प्रदेश में हो रही है। आम शादियों की तरह ही इस विवाह के लिए भी बकायदा निमंत्रण पत्र (कार्ड) छपवाकर पूरे शहर में बांटे गए थे। शादी में दूल्हा-दुल्हन की तरह सजे मेंढक-मेंढकी को देखने के लिए शहरभर से लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा।
📌 इस अनूठे विवाह की मुख्य बातें (Key Highlights)
- 🐸 दूल्हा-दुल्हन सा श्रृंगार: मेंढक को दूल्हे के वस्त्र और मेंढ़की को खूबसूरत लहंगा व जेवर पहनाए गए।
- 📜 पूरी हुईं वैदिक रस्में: हल्दी, मेहंदी, वैदिक मंत्रोच्चार के साथ 7 फेरे और अंत में मेंढ़की की विदाई भी की गई।
- 🥁 सड़क पर निकली बारात: ढोल-नगाड़ों और गाजे-बाजे के साथ शहर के प्रमुख चौराहों से गुजरी अनोखी बारात।
- 🎯 मकसद: राजस्थान में पड़ रहे सूखे और मानसूनी ब्रेक के बीच अच्छी बारिश की कामना।

📯 बांटे गए थे शादी के कार्ड, हल्दी-मेहंदी की रस्मों से महका चौक
बांसवाड़ा के क्रांतिकारी तरुण मंच और डेगली माता चौक क्षेत्र के निवासियों ने मिलकर इस पारंपरिक आयोजन की कमान संभाली।
सतीश आचार्य (पदाधिकारी, क्रांतिकारी तरुण मंच) ने बताया: “इस समय पूरा राजस्थान पानी की बूंद-बूंद को तरस रहा है। किसान सबसे ज्यादा चिंतित हैं क्योंकि महंगा बीज बोने के बाद भी बारिश नहीं हो रही और फसलें सूख रही हैं। ऐसे में इंद्रदेव को मनाने के लिए हमारी सदियों पुरानी मेंढक-मेंढकी के विवाह की परंपरा को पूरी श्रद्धा के साथ आयोजित किया गया।”
विवाह से पहले बाकायदा शुभ मुहूर्त निकाला गया। पूरे शहर में आमंत्रण पत्रिकाएं बांटी गईं। डेगली माता चौक पर दोनों पक्षों की मौजूदगी में हल्दी और मेहंदी की रस्में निभाई गईं और उपस्थित लोगों को गुलाल लगाया गया।

💃 ढोल-नगाड़ों पर थिरके बाराती, फेरों के बाद हुई मेंढ़की की विदाई
शादी का मुख्य आकर्षण भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा की तर्ज पर निकली यह अनोखी बारात रही।
- बारात का रूट: सजे-धजे दूल्हा-दुल्हन (मेंढक-मेंढकी) को लेकर बारात डेगली माता चौक से गाजे-बाजे के साथ रवाना हुई। यह बारात शहर के प्रसिद्ध गणेश मंदिर और आजाद चौक होते हुए वापस आयोजन स्थल पर पहुंची। इस दौरान बाराती ढोल की थाप पर जमकर थिरके।
- सात फेरे और विदाई: पंडितों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच दोनों के सात फेरे करवाए गए। विवाह संपन्न होने के बाद पारंपरिक तरीके से मेंढ़की की विदाई की भावुक रस्म भी अदा की गई और अंत में सभी शहरवासियों को मिठाई बांटकर मुंह मीठा कराया गया।




