सीहोर में जगदीश स्वामी की 66वीं रथयात्रा संपन्न: विश्राम के बाद मंदिर लौटे भगवान जगन्नाथ, बलदाऊ और सुभद्रा; छावनी में उमड़ा आस्था का सैलाब

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Sehore Desk (17 July 2026): सीहोर शहर के छावनी स्थित ऐतिहासिक एवं प्राचीन जगदीश मंदिर में चल रहा चार दिवसीय रथयात्रा महोत्सव शुक्रवार को श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। ओडिशा के पुरी की तर्ज पर निकाली गई भव्य रथयात्रा के बाद, रात्रि विश्राम कर लौटे महाप्रभु जगन्नाथ, बड़े भाई बलदाऊ और बहन सुभद्रा का मंदिर परिसर में भव्य स्वागत किया गया।

भगवान की चलित प्रतिमाओं के वापस मुख्य मंदिर में विराजमान होते ही पूरा छावनी क्षेत्र ‘जय जगदीश’ के जयकारों से गूंज उठा। इस अलौकिक पल के साक्षी बनने और विशेष श्रृंगार के दर्शन करने के लिए देर रात तक श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा रहा।

📌 सीहोर रथयात्रा महोत्सव की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • 🏛️ गौरवशाली इतिहास: सन 1961 में मंदिर के जीर्णोद्धार के साथ शुरू हुई यह सीहोर की ऐतिहासिक 66वीं रथयात्रा थी।
  • 🌸 विश्राम नगरी: इस वर्ष भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा और बलदाऊ को रात्रि विश्राम के लिए छावनी स्थित स्वर्णकार समाज मंदिर ले जाया गया था।
  • 🙏 वैदिक स्वागत: 108 संत पंडित दुर्गाप्रसाद कटारे और मंदिर के पुजारियों द्वारा पूर्ण विधि-विधान से पूजा कर भगवान को पुनः गर्भगृह में विराजमान किया गया।
  • 🥁 भक्तिमय माहौल: चार दिनों तक चले इस धार्मिक उत्सव में देर रात तक महाआरती, भजन-कीर्तन और प्रसादी वितरण का दौर चला।

🤝 परमार और स्वर्णकार समाज ने मिलकर निभाई परंपरा, उमड़े श्रद्धालु

शुक्रवार दोपहर को जब परमार समाज और शहर के गणमान्य नागरिक भगवान को लेने स्वर्णकार मंदिर पहुंचे, तो माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो गया।

विशेष श्रृंगार और अगवानी: स्वर्णकार समाज के मंदिर में भगवान का विशेष श्रृंगार और महापूजन किया गया। इसके बाद श्रद्धालु पूरी आस्था के साथ प्रतिमाओं को लेकर जगदीश मंदिर के लिए रवाना हुए। इस दौरान रास्ते भर सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों द्वारा चल समारोह का भव्य स्वागत और पुष्पवर्षा की गई।

👑 1961 से अनवरत जारी है परंपरा: कटारे जी की प्रेरणा से हुआ था जीर्णोद्धार

सीहोर के इस प्राचीन जगदीश मंदिर का इतिहास बेहद खास है।

  • प्रेरणा स्रोत: परमार समाज के राजगुरु, 232 मंदिरों के जीर्णोद्धारकर्ता व अखिल भारतीय धर्म संघ के अध्यक्ष ब्रह्मलीन श्री 1008 पंडित काशीप्रसाद कटारे की पावन प्रेरणा से सन 1961 में परमार समाज द्वारा इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराया गया था।
  • दर्शन लाभ: मंदिर समिति के पदाधिकारियों (तुलसीराम पटेल, सुरेश गब्बर, शिव परमार आदि) ने बताया कि भगवान को विशेष पोशाक पहनाकर अब मंदिर परिसर में आम दर्शनों के लिए विराजमान कर दिया गया है, जहां श्रद्धालु आगामी दिनों में भी दर्शन लाभ ले सकेंगे।

👥 आयोजन में शामिल प्रमुख व्यक्तित्व एवं आभार

  • धार्मिक एवं सामाजिक नेतृत्व: पूजा-अर्चना में पंडित रघुनंदन व्यास, रोहित व्यास, पंडित कुणाल व्यास, मनोज दीक्षित मामा (जिला संस्कार मंच), सतीश सोनी और जितेंद्र सोनी सक्रिय रहे।
  • परमार समाज की उपस्थिति: पूर्व अध्यक्ष तुलसीराम पटेल, चल समारोह अध्यक्ष भंवर लाल परमार सहित सुरेश परमार गब्बर, शिव परमार मुरली, विष्णु परमार रोलूखेड़ी, जेपी परमार, देवनारायण परमार, हरीश परमार और समाज के सैकड़ों युवा व बुजुर्ग उपस्थित रहे।
  • आभार प्रदर्शन: सफल आयोजन के बाद परमार समाज के प्रांतीय अध्यक्ष सूरज सिंह, चंदर सिंह मंडलोई और मांगीलाल परमार ने सहयोग के लिए सीहोर के सभी सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों, धर्मप्रेमी जनता और जिला प्रशासन का सहृदय आभार व्यक्त किया है।

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