संसद में सरकार का बड़ा खुलासा: देश में 55.49 करोड़ लोग कर रहे हैं UPI का इस्तेमाल; एक साल में हुआ ₹314 लाख करोड़ का रिकॉर्ड लेनदेन

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Business & Policy Desk (20 जुलाई 2026): भारत में डिजिटल पेमेंट और यूपीआई (Unified Payments Interface) की लोकप्रियता ने दुनिया भर में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। केंद्र सरकार ने संसद के मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में जानकारी दी है कि इस साल जून महीने तक देश में लगभग 55.49 करोड़ उपयोगकर्ता यूपीआई प्लेटफॉर्म से जुड़ चुके हैं।

लोकसभा में एक लिखित प्रश्न के उत्तर में केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान यूपीआई लेनदेन में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है। इस एक साल में यूपीआई के जरिए कुल 24,162 करोड़ ट्रांजैक्शन (वॉल्यूम) हुए, जिनकी कुल वैल्यू 314 लाख करोड़ रुपये रही।

📌 यूपीआई महा-रिपोर्ट: मुख्य बिंदु (Key Highlights)

  • 👥 यूजर बेस: जून 2026 तक देश के 55.49 करोड़ नागरिक डिजिटल लेन-देन के लिए यूपीआई पर ऑनबोर्ड हुए।
  • 📈 सालाना रिकॉर्ड (FY 2025-26): कुल 24,162 करोड़ बार हुआ लेन-देन; कुल मूल्य 314 लाख करोड़ रुपये पहुंचा।
  • 🔒 सुरक्षा पर जोर: फ्रॉड रोकने के लिए रिस्क-बेस्ड ट्रांजैक्शन लिमिट और मजबूत एसएमएस-आधारित ऑथेंटिकेशन लागू।
  • 🌐 ग्लोबल कनेक्ट: पी2पी (Person-to-Person) रेमिटेंस और मर्चेंट पेमेंट्स के लिए दुनिया के कई देशों के सिस्टम से जुड़ा भारतीय यूपीआई।

🛡️ डिजिटल ट्रांजैक्शन को सुरक्षित बनाने के लिए उठाए गए 3 बड़े कदम

केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि यूपीआई-आधारित लेनदेन को पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए भारत सरकार, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) और भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) द्वारा लगातार कई महत्वपूर्ण सुरक्षा पहल की जा रही हैं:

  1. ⚖️ रिस्क-बेस्ड ट्रांजैक्शन लिमिट: संदिग्ध या धोखाधड़ी वाले लेन-देन (Fraudulent Transactions) पर अंकुश लगाने के लिए जोखिम के आधार पर ट्रांजैक्शन लिमिट तय की गई है।
  2. 🚫 मोबाइल नंबर सुरक्षा कवच: अनधिकृत मोबाइल नंबर बदलने (Unauthorized Mobile Number Changes) और एसएमएस-आधारित ऑथेंटिकेशन (SMS Authentication) के दुरुपयोग को रोकने के लिए कड़े सेफ्टी गार्ड्स लगाए गए हैं।
  3. 📲 ऐप्लीकेशन सिक्योरिटी: सभी यूपीआई ऐप्स (जैसे फोनपे, गूगलपे, पेटीएम आदि) के लिए सुरक्षा मानकों और सुरक्षा आवश्यकताओं को पहले से कहीं अधिक बढ़ा दिया गया है।

🌍 वैश्विक मंच पर छाया भारतीय UPI: विदेशों में भी आसान हुआ भुगतान

संसद को जानकारी देते हुए मंत्री ने यह भी बताया कि यूपीआई अब सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रह गया है। इसका अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार किया जा रहा है:

ग्लोबल रेमिटेंस नेटवर्क: विदेशों में रहने वाले भारतीयों और वहां यात्रा करने वाले पर्यटकों की सुविधा के लिए यूपीआई को कई अन्य देशों के स्थानीय भुगतान प्रणालियों (Payment Systems) के साथ लिंक किया गया है। इससे विदेशों में पर्सन-टू-पर्सन (P2P) पैसे ट्रांसफर करने और पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) यानी दुकानदारों को सीधे भुगतान करने की प्रक्रिया बेहद आसान और तेज हो गई है।

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