बीरभूम में करोड़ों का खजाना बरामद: पत्थर कारोबारी के घर से ₹28.5 करोड़ कैश और 15 किलो सोना जब्त, 5 नोट गिनने की मशीनें हुईं खराब

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कोलकाता | पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए पत्थर कारोबारी मिनार मंडल के घर से ₹28.5 करोड़ से अधिक नकदी और 15 किलो सोना बरामद किया है। सोने की कीमत करीब ₹21.5 करोड़ आंकी गई है। भारी मात्रा में मिले कैश की गिनती के दौरान पांच करेंसी काउंटिंग मशीनें खराब हो गईं। पुलिस ने मिनार मंडल को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि उसका जीजा और कारोबारी तुलु मंडल उर्फ मोहम्मद नजीबुद्दीन फरार है।

25 बैग में भरा था कैश, 24 गोल्ड बिस्किट भी मिले

गुप्त सूचना के आधार पर बुधवार रात हुई छापेमारी में पुलिस को घर से 25 बैग में भरी नकदी मिली। इसके अलावा 1-1 किलो के 14 गोल्ड बार और 100-100 ग्राम के 10 गोल्ड बिस्किट बरामद किए गए। जब्त नकदी को लोहे के बक्सों में भरकर थाने ले जाया गया और बाद में बैंक में जमा कराने की प्रक्रिया शुरू की गई।

पूछताछ में मिनार का बड़ा खुलासा

पुलिस पूछताछ में मिनार मंडल ने दावा किया कि बरामद कैश और सोना उसका नहीं, बल्कि उसके जीजा तुलु मंडल का है। इसके बाद जांच एजेंसियां इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि इतनी बड़ी मात्रा में नकदी और सोना कहां से आया और इसके पीछे किन लोगों की भूमिका है।

पहले बस ड्राइवर, फिर बना करोड़ों का कारोबारी

मिनार मंडल पहले राज्य परिवहन विभाग में बस ड्राइवर था। बाद में उसने पत्थर के कारोबार में कदम रखा और तेजी से आर्थिक रूप से मजबूत हुआ। दूसरी ओर, फरार तुलु मंडल 2024 में अपनी बेटी की शादी में करीब ₹100 करोड़ खर्च करने के कारण सुर्खियों में आया था। उस समारोह में फिल्म और मनोरंजन जगत की कई हस्तियां भी शामिल हुई थीं।

पत्थर खदानों के राजस्व में गड़बड़ी का शक

पुलिस को संदेह है कि बरामद नकदी पत्थर खदानों से वसूले गए सरकारी राजस्व से जुड़ी हो सकती है। तुलु मंडल को वर्ष 2016-17 में बीरभूम की स्टोन क्वारियों में DCR (डिस्ट्रिक्ट कलेक्शन रेट) वसूली का ठेका मिला था। जांच इस दिशा में भी बढ़ रही है कि कहीं सरकारी राजस्व का दुरुपयोग तो नहीं हुआ।

पहले भी जांच एजेंसियों के रडार पर रहा तुलु मंडल

तुलु मंडल का नाम पहले भी कई जांचों में सामने आ चुका है। 2022 में मवेशी तस्करी मामले में CBI ने उसके ठिकानों पर छापेमारी की थी, जबकि ED ने भी उसे पूछताछ के लिए तलब किया था। हालांकि, इन मामलों में अब तक अदालत का अंतिम फैसला नहीं आया है।

राजनीतिक बयानबाजी तेज

इस कार्रवाई के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति भी गरमा गई है। सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है, जबकि विभिन्न गुट एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। पुलिस का कहना है कि जांच जारी है और फरार आरोपी की तलाश के लिए लगातार दबिश दी जा रही है।

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