drnewsindia.com / नई दिल्ली | विशेष रिपोर्ट
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से बनने वाले डीपफेक, फर्जी ऑडियो-वीडियो और भ्रामक तस्वीरों पर नकेल कसने के लिए भारत सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी (IT) नियमों को बेहद सख्त कर दिया है।
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने लोकसभा में जानकारी दी कि डीपफेक से जुड़े खतरों से निपटने के लिए कानूनी और तकनीकी ढांचे को मजबूत किया गया है। अब एआई से तैयार कंटेंट पर स्पष्ट लेबल लगाना अनिवार्य होगा और आदेश मिलने पर गैरकानूनी कंटेंट को हटाने की समयसीमा को 36 घंटे से घटाकर महज 3 घंटे कर दिया गया है।
⚡ IT नियमों में हुए 5 सबसे बड़े बदलाव
- AI कंटेंट पर अनिवार्य लेबलिंग: एआई (AI) द्वारा जनरेट की गई किसी भी सामग्री पर स्पष्ट लेबल और पहचान योग्य मेटाडेटा देना अनिवार्य होगा।
- सख्त समयसीमा: सरकारी या अदालती आदेश के बाद गैरकानूनी सामग्री को 36 घंटे के बजाय 3 घंटे के भीतर हटाना होगा।
- अत्यंत संवेदनशील मामलों में तुरंत एक्शन: अति-संवेदनशील शिकायतों पर कार्रवाई की समयसीमा 24 घंटे से घटाकर 2 घंटे कर दी गई है।
- बिना सहमति की तस्वीरों पर रोक: गैर-सहमति से शेयर की गई अंतरंग तस्वीरों, प्रतिरूपण (Impersonation) और बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM) पर तुरंत कार्रवाई करनी होगी।
- स्वचालित निगरानी (Automated Tools): 50 लाख से अधिक यूजर्स वाले बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को हानिकारक AI कंटेंट की पहचान के लिए ऑटोमेटेड टूल्स लागू करने होंगे।

📊 नई व्यवस्था बनाम पुरानी व्यवस्था (Quick Comparison)
| नियम / प्रावधान | पुरानी व्यवस्था | नई व्यवस्था (संशोधित) |
| AI कंटेंट की पहचान | कोई स्पष्ट नियम नहीं | स्पष्ट लेबल एवं मेटाडेटा अनिवार्य |
| गैरकानूनी सामग्री हटाना | 36 घंटे | घटाकर 3 घंटे |
| संवेदनशील शिकायतों का निपटारा | 72 घंटे | घटाकर 36 घंटे |
| अत्यंत संवेदनशील मामले | 24 घंटे | घटाकर केवल 2 घंटे |
| बड़े सोशल मीडिया मंच (50L+ यूज़र्स) | सामान्य नियम | शिकायत अधिकारी, स्थानीय प्रतिनिधि व अनुपालन रिपोर्ट अनिवार्य |
🛡️ नियम न मानने पर सोशल मीडिया कंपनियों पर क्या होगा एक्शन?
यदि कोई डिजिटल या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इन नए नियमों का पालन करने में विफल रहता है, तो उसे IT अधिनियम की धारा 79 के तहत मिलने वाला ‘सेफ हार्बर’ (कानूनी सुरक्षा कवच) समाप्त कर दिया जाएगा। इसका सीधा मतलब यह है कि प्लेटफॉर्म पर पोस्ट की गई गैरकानूनी सामग्री के लिए खुद सोशल मीडिया कंपनी के खिलाफ आपराधिक व दंडात्मक कार्रवाई की जा सकेगी।
⚖️ किन कानूनों के तहत होगी कार्रवाई?
- सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act), 2000: पहचान की चोरी, प्रतिरूपण, निजता का उल्लंघन और अश्लील सामग्री के प्रसार पर रोक।
- भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023: प्रतिरूपण द्वारा धोखाधड़ी, झूठे इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड बनाने, दुष्प्रचार फैलाने और संगठित साइबर अपराध पर सख्त सजा।

🔬 IIT संस्थान बना रहे हैं डीपफेक पकड़ने वाली तकनीक
정부 (सरकार) ने भारत AI मिशन के तहत IIT जोधपुर, IIT मद्रास और IIT खड़गपुर जैसे प्रमुख संस्थानों को डीपफेक और एआई-जनित सामग्री की तुरंत पहचान करने वाली आधुनिक तकनीक विकसित करने का जिम्मा सौंपा है।
📞 साइबर अपराध या डीपफेक की शिकायत कहाँ करें?
यदि आप या आपका कोई परिचित किसी डीपफेक या साइबर अपराध का शिकार होता है, तो तुरंत इन माध्यमों पर शिकायत दर्ज कराएं:
- राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल: cybercrime.gov.in
- राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर: 1930




