हंगामे में खत्म हुआ संसद का मानसून सत्र: 7,023 मिनट बर्बाद, 175 करोड़ रुपए के खर्च का अनुमान; 12 बिल पास

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drnewsindia.com /नई दिल्ली। संसद का मानसून सत्र गुरुवार, 13 अगस्त 2026 को भारी हंगामे और राजनीतिक गतिरोध के बीच अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया। पूरे सत्र के दौरान कई मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने रहे। अंतिम दिन भी हंगामे के कारण लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही ज्यादा देर नहीं चल सकी। दोनों सदनों में व्यवधान के बावजूद सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयक पारित कराने में सफल रही।

सत्र की सबसे बड़ी तस्वीर यह रही कि संसद के दोनों सदनों का कुल 7,023 मिनट यानी करीब 117 घंटे का कामकाजी समय हंगामे की भेंट चढ़ गया। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक लोकसभा की कार्यवाही पर प्रति मिनट करीब 2.5 लाख रुपए का खर्च आता है। इस आधार पर बाधित समय की अनुमानित लागत करीब 175 करोड़ रुपए बताई गई है।

अंतिम दिन भी हंगामा, जल्द स्थगित हुई कार्यवाही

सत्र के अंतिम दिन विपक्षी सदस्यों के विरोध और नारेबाजी के बीच सदन की कार्यवाही प्रभावित रही। लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय मंत्रिमंडल के कई सदस्य मौजूद रहे।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही समाप्त करने से पहले वंदे मातरम् के गायन के बाद सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया।

राज्यसभा में भी व्यवधान, 39% रही उत्पादकता

राज्यसभा में भी पूरे सत्र के दौरान कई बार कार्यवाही बाधित हुई। राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने सत्र की उत्पादकता करीब 39 प्रतिशत रहने पर चिंता जताई। उन्होंने सदस्यों से सदन की गरिमा बनाए रखने और संसदीय जिम्मेदारियों को गंभीरता से निभाने की अपील की।

हंगामे के बीच 12 विधेयक पारित

संसद में लगातार व्यवधान के बावजूद विधायी काम पूरी तरह नहीं रुका। इस मानसून सत्र में 12 विधेयक दोनों सदनों से पारित हुए। इनमें सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम, जन्म-मृत्यु पंजीकरण, सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की संख्या, MSME, टैक्सेशन और खनिज क्षेत्र से जुड़े विधेयक शामिल हैं।

राज्यसभा ने अंतिम दिनों में Mines and Minerals (Development and Regulation) Amendment Bill, 2026 को भी मंजूरी दी। हालांकि, कई विधेयकों पर पर्याप्त चर्चा नहीं हो पाने को लेकर विपक्ष ने सरकार पर सवाल उठाए।

संसद की कार्यक्षमता पर उठे सवाल

इस सत्र में सरकार की ओर से विधायी कामकाज पूरा करने पर जोर दिया गया, लेकिन लगातार हंगामे के कारण चर्चा और बहस के लिए उपलब्ध समय काफी प्रभावित हुआ। रिपोर्टों के मुताबिक लोकसभा की उत्पादकता करीब 19 प्रतिशत, जबकि राज्यसभा की उत्पादकता करीब 39 प्रतिशत रही।

इस वजह से मानसून सत्र को लेकर एक तरफ विधेयकों के पारित होने को सरकार की उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है, तो दूसरी तरफ कम चर्चा और लगातार व्यवधान को लेकर संसद की कार्यप्रणाली पर सवाल भी उठे हैं।

7 हजार मिनट से ज्यादा समय हंगामे में गया

उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक दोनों सदनों का 7,023 मिनट का कामकाजी समय व्यवधान के कारण प्रभावित हुआ। लोकसभा में प्रति मिनट लगभग 2.5 लाख रुपए के खर्च के अनुमान के आधार पर इस बाधित समय की लागत करीब 175 करोड़ रुपए आंकी गई है।

सरकार और विपक्ष के दावे अलग-अलग

संसद में हुए हंगामे को लेकर सरकार और विपक्ष की ओर से अलग-अलग तर्क सामने आए। सरकार ने विधायी कामकाज पूरा होने को महत्वपूर्ण बताया, जबकि विपक्ष ने कई मुद्दों पर पर्याप्त चर्चा नहीं होने और सरकार द्वारा उनकी मांगों पर चर्चा नहीं कराने का आरोप लगाया।

इस तरह 2026 का मानसून सत्र विधायी कामकाज और राजनीतिक टकराव—दोनों के लिए चर्चा में रहा। कई विधेयक पारित हुए, लेकिन सदन का बड़ा हिस्सा हंगामे और व्यवधान में बीत गया।

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