1.25 करोड़ की इंटीग्रेटेड हेल्थ लैब अब तक बंद, उद्घाटन के बाद भी मरीजों को नहीं मिल रही 134 जांचों की सुविधा

0
4

drnewsindia.com /वाराणसी।  वाराणसी के पांडेयपुर स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय राजकीय चिकित्सालय में मरीजों को अत्याधुनिक जांच सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तैयार की गई इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब यानी आइपीएचएल (IPHL) अब तक शुरू नहीं हो पाई है। करीब 1.25 करोड़ रुपये की लागत से तैयार की गई इस लैब का उद्देश्य मरीजों को एक ही स्थान पर कई तरह की जटिल और महत्वपूर्ण चिकित्सकीय जांच की सुविधा उपलब्ध कराना था। हालांकि, उद्घाटन के वर्षों बाद भी लैब में नियमित जांच सेवाएं शुरू नहीं होने से इस सुविधा का लाभ मरीजों को नहीं मिल पा रहा है।

एक छत के नीचे 134 से अधिक जांच की थी योजना

इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब को इस तरह विकसित किया गया था कि एक ही जगह पर विभिन्न श्रेणियों की जांच उपलब्ध हो सके। प्रस्तावित सुविधाओं में टॉर्च, एपीएलए, कैंसर मार्कर, हार्मोनल टेस्ट, थायराइड जांच, कार्डियक प्रोफाइल, विटामिन की कमी से संबंधित जांच और मॉलिक्यूलर बायोलॉजी से जुड़ी जटिल जांच शामिल हैं।

इसके अलावा संक्रामक और गैर-संक्रामक रोगों से संबंधित कई प्रकार की जांच भी यहां उपलब्ध कराने की योजना थी। कुल मिलाकर 134 से अधिक जांच एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इससे सरकारी अस्पताल में आने वाले मरीजों को अलग-अलग जांच के लिए दूसरी जगह जाने की परेशानी से राहत मिलने की उम्मीद थी।

विशेष रूप से कैंसर मार्कर, हार्मोनल जांच, कार्डियक प्रोफाइल और मॉलिक्यूलर बायोलॉजी जैसी जांच आम मरीजों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती हैं। ऐसी जांचों की आवश्यकता कई गंभीर या जटिल स्वास्थ्य स्थितियों की पहचान और चिकित्सकीय मूल्यांकन के दौरान पड़ती है। सरकारी अस्पताल में इन सुविधाओं के उपलब्ध होने से मरीजों पर निजी जांच केंद्रों में होने वाले खर्च को कम करने में मदद मिल सकती थी।

मशीनें और स्टाफ नहीं होने से अटकी सुविधा

लैब के शुरू नहीं होने के पीछे मुख्य वजह मशीनों की उपलब्धता और आवश्यक स्टाफ की तैनाती नहीं होना बताई जा रही है। भवन तैयार होने और उद्घाटन की प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद यदि जांच उपकरण और प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध नहीं हैं, तो पूरी लैब को नियमित रूप से संचालित करना संभव नहीं हो पाता।

स्वास्थ्य क्षेत्र में किसी अत्याधुनिक प्रयोगशाला के संचालन के लिए केवल भवन तैयार करना पर्याप्त नहीं होता। जांच के लिए आवश्यक मशीनें, तकनीकी उपकरण, गुणवत्ता नियंत्रण की व्यवस्था, प्रशिक्षित लैब टेक्नीशियन, वैज्ञानिक और अन्य जरूरी कर्मचारियों की उपलब्धता भी आवश्यक होती है। इनके अभाव में तैयार बुनियादी ढांचा मरीजों के लिए उपयोगी सेवा में तब्दील नहीं हो पाता।

लैब के शुरू होने से सरकारी अस्पताल में आने वाले मरीजों को जांच के लिए बाहर जाने की जरूरत कम हो सकती है। खास तौर पर आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए यह सुविधा महत्वपूर्ण हो सकती है। अब जरूरत इस बात की है कि लैब के संचालन से जुड़े सभी आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था पूरी की जाए और तकनीकी तथा मानव संसाधन उपलब्ध कराकर इसे नियमित सेवा में लाया जाए।

करीब 1.25 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस परियोजना का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब भवन के साथ मशीनें, विशेषज्ञ स्टाफ और अन्य जरूरी व्यवस्थाएं भी पूरी तरह सक्रिय हों। फिलहाल मरीजों की नजर इस बात पर है कि उद्घाटन के बाद लंबे समय से बंद पड़ी इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब आखिर कब नियमित रूप से काम शुरू करती है और प्रस्तावित 134 से अधिक जांचों का लाभ आम लोगों को कब मिलना शुरू होता है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here