कोलकाता: पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार तेज होता जा रहा है। इसी बीच पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए उनकी गिरफ्तारी और आपराधिक कार्रवाई की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने पश्चिम बंगाल में पुराने, यानी SIR से पहले की मतदाता सूची के आधार पर दोबारा विधानसभा चुनाव कराने की मांग भी उठाई है।
ममता बनर्जी ने क्या मांग की?
ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुईं और मतदाता सूची में बदलाव से मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हुए। उन्होंने दावा किया कि चुनाव प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों के मद्देनजर पुराने वोटर रोल के आधार पर फिर से चुनाव कराया जाना चाहिए।
उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी और आपराधिक मुकदमा चलाने की मांग भी की। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि यह ममता बनर्जी की राजनीतिक मांग और आरोप हैं, न कि किसी अदालत या जांच एजेंसी द्वारा स्थापित तथ्य। उपलब्ध रिपोर्टों में ऐसी किसी न्यायिक कार्रवाई का उल्लेख नहीं है।
विवाद की जड़ में SIR क्या है?
Special Intensive Revision यानी SIR मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण की प्रक्रिया है। पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की आधिकारिक वेबसाइट पर SIR 2026 के लिए ड्राफ्ट और अंतिम मतदाता सूची, हटाए गए नामों की सूची, दावे और आपत्तियों की जानकारी तथा अपीलीय प्रक्रिया से संबंधित सामग्री उपलब्ध कराई गई है। वेबसाइट पर 2002 की SIR मतदाता सूची से जुड़ी जानकारी और मतदाता का नाम खोजने की सुविधा भी दी गई है।
SIR के दौरान मतदाता सूची में नामों का सत्यापन, नए नामों को शामिल करना और पात्रता पूरी नहीं करने वाले या संबंधित प्रक्रिया में निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरने वाले नामों को हटाने जैसी प्रक्रियाएं होती हैं। इसी प्रक्रिया को लेकर पश्चिम बंगाल में राजनीतिक दलों के बीच लंबे समय से मतभेद देखने को मिले हैं।
ममता बनर्जी की पुराने वोटर लिस्ट के आधार पर दोबारा चुनाव कराने की मांग और CEC के खिलाफ कार्रवाई की मांग के बाद इस विवाद के आगे और राजनीतिक रूप लेने की संभावना है। हालांकि, दोबारा विधानसभा चुनाव कराने या किसी संवैधानिक पदाधिकारी के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई जैसे कदम निर्धारित संवैधानिक और कानूनी प्रक्रियाओं से जुड़े होते हैं।




