Stock Market Crash: खुलते ही शेयर बाजार में कोहराम, सेंसेक्स-निफ्टी में बड़ी गिरावट; निफ्टी 23,000 के नीचे

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नई दिल्ली। सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में कारोबार की शुरुआत निवेशकों के लिए बेहद कमजोर रही। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन बाजार खुलते ही सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांकों में गिरावट देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में बिकवाली का दबाव इतना मजबूत रहा कि बाजार के बड़े से लेकर छोटे शेयरों तक बड़ी संख्या में स्टॉक्स लाल निशान में कारोबार करते नजर आए। इस गिरावट का असर बाजार के व्यापक रुख पर भी दिखाई दिया और निवेशकों के बीच सतर्कता बढ़ गई।

सेंसेक्स में बड़ी गिरावट

बीएसई का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स शुक्रवार को 73,895 के स्तर पर बंद हुआ था। सोमवार को बाजार खुलने के साथ ही सेंसेक्स में कमजोरी दिखाई दी। शुरुआती कारोबार में इंडेक्स तेजी से नीचे आया और बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ता गया। सेंसेक्स में शामिल बड़ी कंपनियों के शेयरों में कमजोरी आने से पूरे इंडेक्स पर दबाव बना।

सेंसेक्स को भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख संकेतकों में गिना जाता है। इसमें बीएसई पर सूचीबद्ध बड़ी कंपनियों का प्रतिनिधित्व होता है। इसलिए जब सेंसेक्स में व्यापक गिरावट आती है, तो इसे बाजार के समग्र निवेशक sentiment में कमजोरी के संकेत के तौर पर देखा जाता है। हालांकि, किसी एक कारोबारी सत्र की गिरावट से बाजार की लंबी अवधि की दिशा तय नहीं होती और निवेशकों के लिए अलग-अलग शेयरों तथा सेक्टरों के प्रदर्शन को भी देखना जरूरी होता है।

निफ्टी 23,000 के नीचे फिसला

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का 50 शेयरों वाला प्रमुख इंडेक्स निफ्टी भी सोमवार को दबाव में रहा। शुक्रवार को निफ्टी 23,140 के स्तर पर बंद हुआ था। सोमवार को यह 23,065 के आसपास खुला और इसके बाद गिरावट और तेज हो गई। शुरुआती कारोबार में इंडेक्स 23,000 के स्तर के नीचे पहुंच गया।

निफ्टी का 23,000 के नीचे जाना बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम रहा, क्योंकि यह स्तर निवेशकों की नजर में अहम मनोवैज्ञानिक स्तर माना जाता है। किसी प्रमुख इंडेक्स का इस तरह के स्तर के नीचे जाना बाजार में चल रही बिकवाली और कमजोर sentiment को दर्शाता है। हालांकि, किसी स्तर के टूटने का अर्थ यह नहीं होता कि बाजार आगे भी लगातार उसी दिशा में चलेगा। कारोबार के दौरान इंडेक्स में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।

शेयर बाजार में अचानक आई गिरावट के बीच निवेशकों के लिए जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय अपने निवेश की स्थिति और जोखिम क्षमता को समझना महत्वपूर्ण होता है। खासकर छोटे और मिडकैप शेयरों में तेज उतार-चढ़ाव होने की स्थिति में जोखिम अपेक्षाकृत अधिक हो सकता है। वहीं, लंबी अवधि के निवेशकों के लिए कंपनी के मूलभूत प्रदर्शन, कारोबार की स्थिति और वित्तीय आंकड़ों को ध्यान में रखना जरूरी होता है।

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