उज्जैन में सिंहस्थ 2028 के लिए सड़क चौड़ीकरण तेज, कई धर्मस्थल हटे-शिफ्ट हुए; शाही मस्जिद के हिस्से पर कार्रवाई जारी

0
11

drnewsindia.com /उज्जैन, मध्य प्रदेश। सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के बीच उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। शहर के पुराने और व्यस्त इलाकों में कई मार्गों को चौड़ा करने की योजना पर काम चल रहा है, ताकि सिंहस्थ के दौरान आने वाले श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की आवाजाही को सुगम बनाया जा सके। इसी प्रक्रिया में सड़क की निर्धारित सीमा में आ रहे मकानों और धार्मिक स्थलों के प्रभावित हिस्सों को हटाने या पीछे करने की कार्रवाई की जा रही है।

कई मंदिरों को पीछे शिफ्ट किया गया

सड़क चौड़ीकरण की कार्रवाई में स्थानीय स्तर पर धार्मिक स्थलों को लेकर प्रशासन के सामने अलग-अलग परिस्थितियां सामने आईं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, संकटमोचन हनुमान मंदिर, शिव मंदिर और गणेश मंदिर जैसे कुछ धार्मिक स्थलों को नुकसान पहुंचाए बिना पीछे की ओर शिफ्ट किया गया है। स्थानीय रिपोर्टों में कुछ मंदिरों को करीब 9 फीट पीछे किए जाने की जानकारी सामने आई है।

इस प्रक्रिया का उद्देश्य सड़क के प्रस्तावित विस्तार के लिए आवश्यक जगह उपलब्ध कराना है। प्रशासन और स्थानीय लोगों के बीच बातचीत के बाद कई स्थानों पर धार्मिक संरचनाओं के प्रभावित हिस्सों को हटाने या स्थानांतरित करने पर सहमति बनी। यही वजह है कि पूरे मार्ग पर कार्रवाई एक ही तरीके से नहीं हुई है। कहीं संरचना का हिस्सा हटाया गया, कहीं धर्मस्थल को पीछे किया गया और कहीं समुदाय की सहमति से स्थान परिवर्तन किया गया।

14 धर्मस्थलों में से 12 पर कार्रवाई

स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार, संबंधित मार्ग पर कुल 14 धर्मस्थल सड़क चौड़ीकरण की प्रक्रिया से प्रभावित हो रहे थे। इनमें से अब तक 12 धर्मस्थलों को हटाया जा चुका है या उनके प्रभावित हिस्सों पर कार्रवाई पूरी हो चुकी है। प्रशासन का उद्देश्य सड़क के निर्धारित हिस्से को खाली कराकर प्रस्तावित चौड़ाई हासिल करना है।

हालांकि अलग-अलग रिपोर्टों में इस मार्ग की लंबाई और प्रभावित धार्मिक स्थलों की संख्या को लेकर अलग आंकड़े सामने आए हैं। एक रिपोर्ट में कंठाल चौराहे से गोपाल मंदिर तक करीब 900 मीटर लंबे हिस्से में सात धार्मिक स्थलों के प्रभावित होने की बात कही गई है। इसलिए विभिन्न चरणों या अलग-अलग सड़क खंडों के आंकड़ों को एक ही संख्या मानने के बजाय प्रशासन द्वारा जारी परियोजना विवरण को अंतिम संदर्भ माना जाना उचित होगा।

हाईकोर्ट तक पहुंचा था मामला

शाही मस्जिद के प्रभावित हिस्से को हटाने का मामला अदालत तक भी पहुंचा। मस्जिद पक्ष की ओर से सड़क चौड़ीकरण की कार्रवाई के खिलाफ याचिका दायर की गई थी। रिपोर्टों के अनुसार, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की एकलपीठ ने 9 सितंबर को याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद मामला डिवीजन बेंच के सामने भी गया।

28 सितंबर की रिपोर्टों के मुताबिक डिवीजन बेंच ने भी अपील को खारिज कर दिया। हालांकि मस्जिद पक्ष की ओर से यह कहा गया कि मामला आपसी समझौते के आधार पर वापस लिया गया है। रिपोर्टों में मस्जिद पक्ष द्वारा प्रभावित हिस्से को पीछे करने और कुछ दुकानों को हटाने की सहमति की भी जानकारी दी गई है।

इस मामले में अदालत के सामने प्रशासन की ओर से यह भी बताया गया था कि सड़क चौड़ीकरण की जद में आने वाले कई धार्मिक ढांचों के प्रभावित हिस्से पहले ही हटाए जा चुके हैं और मार्ग का विस्तार सिंहस्थ के दौरान श्रद्धालुओं की आवाजाही को ध्यान में रखकर किया जा रहा है।

फिलहाल कंठाल चौराहे से गोपाल मंदिर की ओर जाने वाले मार्ग पर सड़क चौड़ीकरण का काम जारी है। कई धार्मिक स्थलों के प्रभावित हिस्से हटाए या स्थानांतरित किए जा चुके हैं, जबकि शाही मस्जिद और खड़े हनुमान मंदिर से जुड़े मामलों में प्रशासनिक प्रक्रिया और स्थानीय स्तर की बातचीत महत्वपूर्ण बनी हुई है।

प्रशासन के सामने एक ओर सिंहस्थ 2028 से पहले सड़क और यातायात ढांचे को तैयार करने की चुनौती है, तो दूसरी ओर प्रभावित धार्मिक स्थलों और स्थानीय समुदायों के साथ समन्वय बनाए रखना भी जरूरी है। शाही मस्जिद के मामले में अदालत की कार्यवाही, प्रशासन की कार्रवाई और समुदाय के भीतर सामने आए अलग-अलग रुख के कारण मामला खास तौर पर चर्चा में रहा है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here