BRICS डिनर के शाकाहारी मेन्यू पर सियासी घमासान, राहुल गांधी की टिप्पणी पर किरेन रिजिजू का पलटवार

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drnewsindia.com /नई दिल्ली। नई दिल्ली में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान विदेशी नेताओं और प्रतिनिधियों के लिए आयोजित भव्य गाला डिनर का मेन्यू अब राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मेजबानी में भारत मंडपम में आयोजित इस रात्रिभोज में मेहमानों को पूरी तरह शाकाहारी भारतीय व्यंजन परोसे गए। मेन्यू में देश के अलग-अलग हिस्सों की पाक परंपराओं को शामिल करने के साथ-साथ मिलेट्स यानी मोटे अनाज पर भी विशेष जोर दिया गया था। हालांकि, डिनर के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी की एक सोशल मीडिया टिप्पणी ने भोजन को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया।

शाकाहारी मेन्यू में क्या-क्या था?

BRICS गाला डिनर का मेन्यू केवल सामान्य शाकाहारी भोजन तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें भारत की अलग-अलग क्षेत्रीय पाक परंपराओं को प्रदर्शित करने का प्रयास किया गया। रिपोर्टों के मुताबिक मेहमानों को खांडवी, मशरूम गलौटी, पनीर लबाबदार, गुच्ची मार्मिक, कैरट बीन पोरियल, थक्काली बेले सारू, मिलेट पुलाव और चुकंदर का रायता जैसे व्यंजन परोसे गए। मिठाई में ओल्ड दिल्ली फ्रूट क्रीम के साथ जलेबी और शहतूत फिरनी जैसे विकल्प शामिल थे।

मेन्यू में मिलेट्स की मौजूदगी को भी खास महत्व दिया गया। भारत लंबे समय से मोटे अनाज को पोषण, कृषि विविधता और टिकाऊ खाद्य व्यवस्था से जोड़कर बढ़ावा देता रहा है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय मेहमानों के सामने मिलेट आधारित व्यंजन रखना भारतीय खान-पान की एक अलग पहचान प्रस्तुत करने का माध्यम भी माना गया। इस डिनर में गुजरात, अवध, हिमालयी क्षेत्र और दक्षिण भारत सहित अलग-अलग क्षेत्रों के स्वादों को एक ही मेज पर पेश करने की कोशिश दिखाई दी।

राहुल गांधी की टिप्पणी से क्यों शुरू हुआ विवाद?

राहुल गांधी की टिप्पणी के बाद बहस केवल इस बात तक सीमित नहीं रही कि डिनर में क्या परोसा गया था। कांग्रेस नेताओं की ओर से इसे भारत की विविध खान-पान परंपराओं के प्रतिनिधित्व से जोड़कर सवाल उठाए गए। कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने भी मेन्यू के चुनाव को लेकर सरकार पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि विदेशी मेहमानों के सामने एक खास तरह की खान-पान की पसंद को प्राथमिकता दी गई। हालांकि, ये राजनीतिक आरोप हैं और सरकार की ओर से इस व्याख्या को स्वीकार नहीं किया गया।

राहुल गांधी के बयान में भारतीय नॉन-वेज भोजन की तारीफ के साथ 80 फीसदी भारतीयों के नॉन-वेज होने का दावा भी किया गया। यह आंकड़ा उनके राजनीतिक बयान का हिस्सा था। ऐसे में इसे भारत की खान-पान संबंधी आधिकारिक जनगणना के आंकड़े के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। भारत में अलग-अलग राज्यों, क्षेत्रों और सामाजिक समूहों में भोजन की आदतों में काफी विविधता है और शाकाहारी तथा मांसाहारी भोजन दोनों की लंबी परंपराएं मौजूद हैं।

किरेन रिजिजू ने किया पलटवार

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी की टिप्पणी पर पलटवार करते हुए कांग्रेस पर BRICS नेताओं को परोसे गए भोजन का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया। रिजिजू ने कहा कि विदेशी मेहमानों ने भारतीय शाकाहारी व्यंजनों का आनंद लिया और इस भोजन में स्वाद, पोषण तथा देश की क्षेत्रीय विविधता को प्रस्तुत किया गया था।

रिजिजू के जवाब का मुख्य तर्क यह था कि अंतरराष्ट्रीय मेहमानों के लिए आयोजित डिनर में भारत की शाकाहारी पाक परंपरा को प्रस्तुत करना अपने आप में किसी एक वर्ग की खान-पान की आदत थोपने का प्रमाण नहीं है। उनके अनुसार, भारतीय भोजन की विविधता में शाकाहारी व्यंजनों की भी महत्वपूर्ण भूमिका है और BRICS मेहमानों के सामने इसी विरासत को प्रदर्शित किया गया।

फिलहाल BRICS डिनर का यह विवाद राजनीतिक बयानबाजी का विषय बन चुका है। राहुल गांधी की टिप्पणी और किरेन रिजिजू के जवाब के बाद सोशल मीडिया तथा राजनीतिक हलकों में शाकाहारी और मांसाहारी भोजन, भारतीय खान-पान की विविधता तथा आधिकारिक आयोजनों में मेन्यू के चुनाव को लेकर चर्चा जारी है। इस बीच, डिनर का मूल उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय मेहमानों के सामने भारतीय व्यंजनों और क्षेत्रीय पाक परंपराओं को प्रस्तुत करना था, जिसमें देश के विभिन्न हिस्सों के शाकाहारी व्यंजनों को प्रमुख स्थान दिया गया।

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