drnewsindia.com /नई दिल्ली। संभल हिंसा से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से मुल्ला अफरोज की निवारक हिरासत यानी प्रिवेंटिव डिटेंशन को लेकर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने मामले में उत्तर प्रदेश सरकार पर 10 लाख रुपये की कॉस्ट लगाई है। यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा कानून यानी National Security Act (NSA), 1980 के तहत मुल्ला अफरोज को हिरासत में लिए जाने से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने की थी। 8 सितंबर 2026 को अदालत ने सुनवाई पूरी करने के बाद फैसला सुरक्षित रखा था। सुनवाई के दौरान पीठ ने खास तौर पर इस सवाल पर ध्यान दिया था कि पुलिस हिरासत में कथित तौर पर दिए गए कबूलनामे को NSA के तहत निवारक हिरासत का आधार बनाया जा सकता है या नहीं।
मुल्ला अफरोज को 17 जनवरी 2025 को गिरफ्तार किए जाने की बात रिकॉर्ड में सामने आती है, जबकि पुलिस रिकॉर्ड में गिरफ्तारी की तारीख 18 जनवरी 2025 दर्शाए जाने को लेकर भी विवाद रहा। इसके बाद संभल के जिलाधिकारी ने 13 अक्टूबर 2025 को NSA की धारा 3(2) के तहत उनके खिलाफ निवारक हिरासत का आदेश जारी किया। उत्तर प्रदेश सरकार का पक्ष था कि 2024 की हिंसा में उनकी कथित भूमिका ने सार्वजनिक व्यवस्था को प्रभावित किया था और भविष्य में ऐसी गतिविधियों की आशंका को देखते हुए निवारक हिरासत आवश्यक थी। सरकार ने अपने पक्ष में जांच से जुड़े दस्तावेजों और अधिकारियों की रिपोर्टों का हवाला दिया था।
इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 8 जून 2026 को मुल्ला अफरोज की हैबियस कॉर्पस याचिका खारिज कर दी थी। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि जिलाधिकारी की ओर से NSA के तहत हिरासत का निर्णय रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री और संबंधित अधिकारी की संतुष्टि के आधार पर लिया गया था। अदालत ने यह भी माना था कि हिरासत के समर्थन में दस्तावेज उपलब्ध कराए गए थे और संबंधित प्रशासनिक प्रक्रिया का पालन किया गया था। हाईकोर्ट के अनुसार, निवारक हिरासत के मामले में अदालत आम तौर पर प्रशासनिक प्राधिकारी के निर्णय की पर्याप्तता पर अपील की तरह विचार नहीं करती, बल्कि यह देखती है कि निर्णय लेने की प्रक्रिया कानून के अनुरूप थी या नहीं।
इस पूरे घटनाक्रम से एक बार फिर यह स्पष्ट होता है कि किसी व्यक्ति के खिलाफ गंभीर आरोप होने के बावजूद निवारक हिरासत लागू करने के लिए कानून में निर्धारित प्रक्रिया और संवैधानिक सुरक्षा का पालन आवश्यक है। संभल हिंसा से जुड़े मूल आपराधिक मामलों में जांच और न्यायिक कार्यवाही अपनी अलग प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ सकती है। सुप्रीम कोर्ट का मौजूदा हस्तक्षेप मुख्य रूप से मुल्ला अफरोज की NSA के तहत निवारक हिरासत की वैधता और उससे जुड़े कानूनी सवालों के संदर्भ में है।




