सोना-चांदी के दाम में बड़ी गिरावट: दो दिन में चांदी करीब ₹9,000 टूटी, सोना भी हुआ सस्ता

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drnewsindia.com /नई दिल्ली। सोने और चांदी की कीमतों में अचानक आई गिरावट ने कमोडिटी बाजार में हलचल बढ़ा दी है। पिछले दो कारोबारी दिनों में दोनों कीमती धातुओं पर बिकवाली का दबाव देखने को मिला है। 29 सितंबर 2026 को उपलब्ध MCX आंकड़ों के मुताबिक सोने का दिसंबर कॉन्ट्रैक्ट करीब 2.92 फीसदी नीचे 1,48,800 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार कर रहा था, जबकि सिल्वर एम कॉन्ट्रैक्ट करीब 3.03 फीसदी गिरकर 2,29,498 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास था।

दो दिनों में क्यों टूटा सोना और चांदी?

कीमती धातुओं में इस तेज गिरावट के पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कई कारक एक साथ काम कर रहे हैं। इनमें सबसे प्रमुख अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड, ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें, मजबूत अमेरिकी डॉलर और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी हैं।

आमतौर पर सोने को ऐसा निवेश माना जाता है जिस पर नियमित ब्याज नहीं मिलता। जब अमेरिकी बॉन्ड की यील्ड बढ़ती है, तो निवेशकों के लिए ब्याज देने वाली परिसंपत्तियां तुलनात्मक रूप से अधिक आकर्षक हो सकती हैं। इससे सोने जैसे नॉन-यील्डिंग एसेट पर दबाव बढ़ सकता है। मौजूदा बाजार में यही स्थिति दिखाई दे रही है। 28 सितंबर को अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 5.23 फीसदी तक पहुंच गई थी, जो 2007 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर था।

29 सितंबर को भी अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में मजबूती बनी रही। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार 10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड 5.27 फीसदी से ऊपर चली गई और करीब दो दशकों के उच्च स्तर पर पहुंच गई। ऊंची यील्ड का असर दुनियाभर के शेयर और कमोडिटी बाजारों पर देखने को मिला।

फेड की ब्याज दरों पर भी बाजार की नजर

सोने और चांदी की कीमतों पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति का भी बड़ा असर पड़ता है। बाजार में अब आगे ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावनाओं को लेकर चर्चा तेज है। 28 सितंबर की बाजार रिपोर्ट के अनुसार ट्रेडर्स अक्टूबर में एक और अमेरिकी दर बढ़ोतरी की करीब 66 फीसदी संभावना आंक रहे थे। इसी वजह से बॉन्ड यील्ड और डॉलर दोनों को समर्थन मिला और कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ा।

ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना आम तौर पर सोने के लिए चुनौती पैदा करती है। इसकी वजह यह है कि ऊंची ब्याज दरों के माहौल में निवेशक ऐसे विकल्पों पर भी ध्यान देते हैं, जिनसे उन्हें नियमित रिटर्न या ब्याज मिल सकता है। दूसरी तरफ, सोना ब्याज नहीं देता। इसलिए ब्याज दरों और बॉन्ड यील्ड में बदलाव होने पर सोने की मांग प्रभावित हो सकती है।

MCX पर क्या है स्थिति?

29 सितंबर की उपलब्ध MCX जानकारी के अनुसार दिसंबर गोल्ड कॉन्ट्रैक्ट लगभग 1,48,800 रुपये प्रति 10 ग्राम पर था। इसमें पिछले बंद भाव के मुकाबले 4,477 रुपये यानी करीब 2.92 फीसदी की गिरावट दर्ज थी। कारोबार के दौरान सोने ने लगभग 1,47,961 रुपये का निचला स्तर भी देखा।

दूसरी ओर, सिल्वर एम कॉन्ट्रैक्ट करीब 2,29,498 रुपये प्रति किलोग्राम पर था। इसमें लगभग 7,165 रुपये यानी 3.03 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई। कारोबार के दौरान इसका निचला स्तर करीब 2,28,001 रुपये रहा।

यहां यह समझना जरूरी है कि MCX के अलग-अलग एक्सपायरी कॉन्ट्रैक्ट के भाव अलग हो सकते हैं। इसके अलावा MCX फ्यूचर्स की कीमत और स्थानीय सर्राफा बाजार में मिलने वाली कीमत एक जैसी नहीं होती। स्थानीय बाजार में टैक्स, मेकिंग चार्ज, प्रीमियम और अन्य लागतों के कारण वास्तविक खरीद मूल्य अलग हो सकता है।

आने वाले दिनों में सोने-चांदी की दिशा कई वैश्विक संकेतकों पर निर्भर कर सकती है। अमेरिकी फेड की ब्याज दर संबंधी टिप्पणियां, महंगाई के आंकड़े, रोजगार से जुड़े आंकड़े, डॉलर इंडेक्स, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड और कच्चे तेल की कीमतें बाजार की दिशा प्रभावित कर सकती हैं।

विशेषज्ञों ने भी मौजूदा माहौल में कीमती धातुओं में अस्थिरता बने रहने की बात कही है। 28 सितंबर की बाजार रिपोर्ट में कमोडिटी विश्लेषकों ने कच्चे तेल, डॉलर, भू-राजनीतिक घटनाक्रम और अमेरिका-ईरान वार्ता को सोने-चांदी की आगे की चाल के लिए महत्वपूर्ण कारक बताया था।

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