सीहोर। मध्य प्रदेश के सीहोर शहर में शुक्रवार देर रात मंडी चौराहा उस समय अफरा-तफरी और दहशत में बदल गया, जब एनके एंटरप्राइजेज की दो मंजिला जूते-चप्पलों की थोक दुकान में अचानक भीषण आग लग गई। रात करीब 11 बजे शुरू हुई आग ने कुछ ही समय में दुकान के दोनों तल में रखे भारी स्टॉक को अपनी चपेट में ले लिया। दुकान से धुआं निकलता देखकर आसपास के लोगों ने घटना की जानकारी फायर ब्रिगेड और संबंधित लोगों को दी। आग इतनी तेजी से फैली कि कुछ ही देर में दुकान के अंदर से लपटें उठने लगीं। करीब तीन घंटे की लगातार मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका।
बंद शटर के पीछे धधकती रही आग
जानकारी के अनुसार एनके एंटरप्राइजेज में जूते-चप्पलों का थोक कारोबार होता है। शुक्रवार रात करीब 11 बजे दुकान में आग भड़क उठी। करीब 11:30 बजे मंडी चौराहा, मस्जिद मोहल्ले और आसपास के लोगों ने दुकान से धुआं निकलता देखा। इसके बाद तत्काल आग की सूचना दी गई। करीब 12 बजे फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंची, लेकिन दुकान का शटर बंद होने के कारण फायरकर्मियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती आग के स्रोत तक पहुंचने की थी।
दुकान संचालक नितिन साहू और शैलेंद्र शिवहरे उस समय सीहोर में मौजूद नहीं थे। दोनों शुक्रवार को बागेश्वर धाम दर्शन के लिए गए हुए थे। ऐसे में दुकान बंद थी और आग अंदर ही अंदर फैलती रही। बंद शटर के पीछे जूते-चप्पलों का बड़ा स्टॉक होने के कारण आग को तेजी से फैलने के लिए पर्याप्त सामग्री मिलती रही।
स्थिति को देखते हुए फायरकर्मियों ने शटर तोड़कर दुकान के भीतर प्रवेश किया और आग बुझाने का अभियान शुरू किया। शटर खुलने के बाद भी अंदर का तापमान काफी अधिक था और धुएं के कारण राहत कार्य आसान नहीं था।
आसपास की दुकानों और मकानों पर भी मंडराया खतरा
आग के दौरान सबसे बड़ी चिंता यह थी कि कहीं लपटें आसपास मौजूद दुकानों और रिहायशी इमारतों तक न पहुंच जाएं। रात करीब 1:30 बजे दुकान के पीछे की तरफ और दूसरी मंजिल के ऊपरी हिस्से में भी आग भड़कने की जानकारी सामने आई। इसके बाद आसपास मौजूद दुकानदारों और स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ गई।
एनके एंटरप्राइजेज से लगी अग्रवाल हार्डवेयर की दुकान की दीवार साझा होने के कारण वहां भी आग फैलने का खतरा पैदा हो गया था। आग की सूचना मिलते ही दुकान संचालक दीपक अग्रवाल और उनके परिवार के लोग मौके पर पहुंचे। संभावित खतरे को देखते हुए उन्होंने रात में ही दुकान में रखा सामान बाहर निकलवाना शुरू कर दिया। पाइप और अन्य हार्डवेयर सामग्री को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया, ताकि आग फैलने की स्थिति में नुकसान को कम किया जा सके।
दुकान संचालकों के लिए यह घटना इसलिए भी बड़ी आर्थिक चुनौती मानी जा रही है क्योंकि दुकान में बड़ी मात्रा में नया स्टॉक मौजूद था। आग की सूचना मिलने के बाद दोनों संचालक बागेश्वर धाम से सीहोर के लिए वापस रवाना हुए। इस घटना से व्यापारिक क्षेत्र में भी चिंता का माहौल बना रहा।
फिलहाल सबसे बड़ी राहत यह रही कि करीब तीन घंटे की मशक्कत के बाद आग को नियंत्रित कर लिया गया और इसे आसपास की दुकानों तथा रिहायशी क्षेत्रों तक फैलने से रोक लिया गया। इस घटना ने एक बार फिर घनी आबादी वाले व्यावसायिक क्षेत्रों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था, आपातकालीन पहुंच और दुकानों में रखे ज्वलनशील सामान की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े किए हैं।




