सिवनी। मध्य प्रदेश के सिवनी जिला अस्पताल की विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (एसएनसीयू) में नवजातों की मौत का मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने प्रशासनिक कार्रवाई की है। बीते छह महीने के दौरान एसएनसीयू में भर्ती 1,088 नवजात शिशुओं में से 80 की मृत्यु दर्ज की गई। मामले की जानकारी सामने आने के बाद जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. पंकज दुबे ने जांच दल गठित किया। जांच के बाद एसएनसीयू के प्रभारी की जिम्मेदारी बदलते हुए डॉ. पारस पटेरिया के स्थान पर शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. विनोद दहायत को प्रभार सौंप दिया गया।
छह महीने में 1,088 नवजात भर्ती, 80 की मौत
स्वास्थ्य विभाग की ओर से की गई जांच में सामने आया कि सिवनी जिला अस्पताल की एसएनसीयू में 1 अप्रैल से 30 सितंबर तक कुल 1,088 नवजात शिशुओं को भर्ती किया गया था। इनमें से 80 शिशुओं की मृत्यु हुई। इस अवधि के आंकड़ों के अनुसार, भर्ती किए गए नवजातों में मृत्यु का अनुपात लगभग 7.35 प्रतिशत रहा।
हालांकि, केवल मृत्यु के आंकड़ों के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि सभी मामलों में उपचार संबंधी लापरवाही हुई थी। नवजात शिशुओं की मृत्यु के कारणों का आकलन करने के लिए उनकी चिकित्सकीय स्थिति, जन्म के समय की परिस्थितियों, बीमारी की गंभीरता, समय से पहले जन्म, कम वजन और उपलब्ध उपचार संबंधी रिकॉर्ड की समीक्षा आवश्यक होती है।
अब इस मामले में महत्वपूर्ण यह होगा कि जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर नवजातों की मृत्यु के कारणों का स्पष्ट आकलन किया जाए। यदि किसी स्तर पर उपचार, निगरानी, संसाधनों या प्रशासनिक व्यवस्था में कमी पाई जाती है, तो उसके अनुरूप सुधारात्मक कदम उठाए जाने चाहिए।
साथ ही, अस्पताल में नवजातों के उपचार की गुणवत्ता, आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता और विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती की नियमित समीक्षा भी उपयोगी हो सकती है। इससे न केवल वर्तमान व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं के कारणों की समय रहते पहचान भी की जा सकेगी।





