नींद की कमी से कमजोर हो सकती है याददाश्त, रिसर्च में सामने आया 20 मिनट की एरोबिक एक्सरसाइज का फायदा

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30 घंटे तक जागने के बाद किया गया अध्ययन

नई दिल्ली। क्या आपने कभी महसूस किया है कि रात में ठीक से नींद नहीं लेने के बाद अगले दिन किसी का नाम याद करना, पढ़ी हुई बातों को समझना या नई जानकारी को दिमाग में रखना मुश्किल हो जाता है? ऐसा अनुभव केवल थकान से जुड़ा नहीं है। पर्याप्त नींद न मिलने से मस्तिष्क की नई यादें बनाने की क्षमता भी प्रभावित हो सकती है। अब एक नए वैज्ञानिक अध्ययन में सामने आया है कि लंबे समय तक जागते रहने के बाद 20 मिनट की एरोबिक एक्सरसाइज या 90 मिनट की झपकी याददाश्त पर पड़ने वाले कुछ नकारात्मक प्रभावों को कम करने में मदद कर सकती है।

इस शोध में 18 से 35 वर्ष की आयु के स्वस्थ वयस्कों को शामिल किया गया। अध्ययन के दौरान प्रतिभागियों को प्रयोगशाला में निगरानी के तहत लगातार 30 घंटे तक जागते रहने के बाद अलग-अलग समूहों में रखा गया। एक समूह को 20 मिनट तक एरोबिक एक्सरसाइज कराई गई, दूसरे समूह को 90 मिनट सोने का अवसर दिया गया और तीसरे समूह को बिना व्यायाम किए आराम करने दिया गया।

इस प्रयोग का उद्देश्य यह जानना था कि लंबे समय तक नींद न मिलने की स्थिति में व्यायाम और झपकी लेने से नई यादें बनाने की क्षमता में कितना अंतर आ सकता है। शोधकर्ताओं ने प्रतिभागियों की मस्तिष्क गतिविधियों का अध्ययन करने के लिए इलेक्ट्रोएन्सेफेलोग्राफी (EEG) का भी इस्तेमाल किया।

20 मिनट की एरोबिक एक्सरसाइज कैसे मदद कर सकती है?

एरोबिक एक्सरसाइज ऐसी शारीरिक गतिविधि है जिसमें शरीर की बड़ी मांसपेशियां लगातार काम करती हैं और सांस तथा हृदय गति बढ़ती है। तेज चाल से चलना, साइकिल चलाना और कुछ अन्य कार्डियो गतिविधियां इसके उदाहरण हैं।

इस अध्ययन में प्रतिभागियों को स्थिर साइकिल पर 20 मिनट तक व्यायाम कराया गया। यह सामान्य टहलने या बहुत हल्की गतिविधि के समान नहीं था, बल्कि नियंत्रित परिस्थितियों में कराया गया एरोबिक वर्कआउट था। इसलिए इसके नतीजों को हर प्रकार की हल्की एक्सरसाइज पर सीधे लागू नहीं किया जाना चाहिए।

शोधकर्ताओं ने पाया कि व्यायाम के बाद मस्तिष्क की याददाश्त से संबंधित गतिविधियों ने बेहतर प्रदर्शन की व्याख्या करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसका संकेत है कि शारीरिक गतिविधि नींद की कमी के बावजूद नई जानकारी को याद रखने के लिए जरूरी मस्तिष्क प्रक्रियाओं को सहारा दे सकती है। हालांकि, अध्ययन से यह साबित नहीं होता कि व्यायाम नींद की कमी के सभी प्रभावों को खत्म कर देता है।

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