कूनो में मादा चीता निर्वा के 19 माह के शावक की गोली मारकर हत्या, 12 वनकर्मी सस्पेंड; 3 संदिग्ध शिकारी गिरफ्तार

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श्योपुर: मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से जुड़े वन क्षेत्र में वन्यजीव सुरक्षा को लेकर गंभीर मामला सामने आया है। मादा चीता निर्वा के 19 महीने के शावक की कथित तौर पर गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस घटना के बाद वन विभाग और प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए करीब 12 अधिकारी-कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है। इनमें दो रेंजर और एक डिप्टी रेंजर भी शामिल हैं। इसके अलावा मामले में सात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने और तीन संदिग्ध शिकारियों को अवैध हथियारों के साथ गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई है।

इस घटना ने कूनो नेशनल पार्क और उसके आसपास के वन क्षेत्रों में चीता निगरानी, ट्रैकिंग तथा गश्त की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शुरुआती जांच में सामने आए तथ्यों के अनुसार, घायल चीता गोली लगने के बाद कई किलोमीटर तक जंगल में भटकता रहा, लेकिन निगरानी और ट्रैकिंग टीम को समय रहते इसकी जानकारी नहीं मिल सकी। मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ वन अधिकारियों ने जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

मादा चीता निर्वा के शावक की गोली लगने से मौत

जानकारी के अनुसार, मृत शावक की उम्र करीब 19 महीने थी और वह मादा चीता निर्वा से संबंधित था। कूनो नेशनल पार्क से जुड़े क्षेत्र में इस शावक की मौत गोली लगने के कारण हुई। शुरुआती जानकारी में शिकार की आशंका जताई गई है। घटना के सामने आने के बाद वन विभाग ने जांच शुरू की और आसपास के जंगलों में साक्ष्य जुटाने की कार्रवाई की।

चीतों की सुरक्षा के लिहाज से यह घटना महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत में चीता पुनर्स्थापना कार्यक्रम के तहत इन वन्यजीवों को संरक्षित वातावरण में विकसित करने और उनकी आबादी बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसे में किसी शावक की गोली लगने से मौत होना वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था के सामने गंभीर चुनौती पेश करता है।

निगरानी में लापरवाही पर 12 अधिकारी-कर्मचारियों पर कार्रवाई

घटना की जानकारी मिलने के बाद वन विभाग ने निगरानी और ट्रैकिंग व्यवस्था की समीक्षा की। शुरुआती जांच में ड्यूटी के दौरान कथित लापरवाही सामने आने पर करीब 12 अधिकारी-कर्मचारियों को निलंबित किया गया है।

शुक्रवार को कूनो के मुख्य वन संरक्षक (CCF) उत्तम कुमार शर्मा घटनास्थल का निरीक्षण करने पहुंचे थे। उन्होंने मामले की परिस्थितियों और संबंधित वन क्षेत्रों में निगरानी व्यवस्था का जायजा लिया। इसके बाद श्योपुर और मुरैना जिलों के जिम्मेदार वनकर्मियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई के निर्देश दिए गए।

निलंबित कर्मचारियों में मुरैना जिले की पहाड़गढ़ सामान्य वन रेंज के रेंजर आकाश तोमर, विजयपुर दक्षिण वन रेंज के रेंजर जहार सिंह गौर, डिप्टी रेंजर कीर्तिराम शर्मा और कन्हार वन चौकी के नाकेदार दिनेश कुमार शर्मा के नाम शामिल हैं।

14 किलोमीटर दूर मिले खून के निशान

इस मामले की जांच में एक महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। नितनमास गांव में जिस स्थान पर घायल चीता मिला था, उससे करीब 14 किलोमीटर दूर काला खेत के जंगलों में भी खून के निशान पाए गए हैं।

इन निशानों को जांच के महत्वपूर्ण साक्ष्य के तौर पर देखा जा रहा है। शुरुआती जांच के अनुसार, गोली लगने के बाद घायल शावक एक स्थान पर नहीं रुका, बल्कि जंगल के अलग-अलग हिस्सों में घूमता रहा।

यदि खून के निशानों और घटनास्थल के बीच संबंध की पुष्टि होती है, तो इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि गोली लगने के बाद शावक ने किस दिशा में और कितनी दूरी तक आवाजाही की थी।

प्रोजेक्ट चीता के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?

भारत में चीता पुनर्स्थापना कार्यक्रम यानी प्रोजेक्ट चीता के तहत अफ्रीकी चीतों को भारत में लाकर उनके लिए उपयुक्त प्राकृतिक आवास विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। मध्य प्रदेश का कूनो नेशनल पार्क इस कार्यक्रम का प्रमुख केंद्र है।

चीतों की संख्या बढ़ाने के लिए केवल उन्हें सुरक्षित क्षेत्र में रखना पर्याप्त नहीं है। उनके स्वास्थ्य, भोजन, प्रजनन, शावकों की सुरक्षा और प्राकृतिक गतिविधियों पर लगातार नजर रखना भी आवश्यक है।

विशेष रूप से शावकों की निगरानी चुनौतीपूर्ण होती है, क्योंकि वे अपनी मां के साथ जंगल में अलग-अलग स्थानों पर जा सकते हैं। ऐसे में ट्रैकिंग उपकरणों और प्रशिक्षित वन कर्मचारियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।

कूनो और आसपास के वन क्षेत्रों में चीते अलग-अलग इलाकों में आवाजाही कर सकते हैं। इसलिए उनकी सुरक्षा के लिए केवल राष्ट्रीय उद्यान की सीमा के भीतर निगरानी पर्याप्त नहीं होती, बल्कि आसपास के वन क्षेत्रों में भी प्रभावी गश्त और समन्वय जरूरी है।

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