मध्य प्रदेश में राज्यसभा की रिक्त सीट पर हो रहे उपचुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। नामांकन पत्रों की जांच के दौरान कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार राजकुमार लोहानी का पर्चा निरस्त होने से चुनावी मुकाबले को लेकर नया घटनाक्रम सामने आया है। निर्वाचन अधिकारी ने अनिवार्य दस्तावेजों की कमी के आधार पर उनका नामांकन खारिज कर दिया। वहीं, एक अन्य उम्मीदवार कांते सायन्ना का नामांकन भी प्रस्तावक नहीं होने के कारण निरस्त कर दिया गया। इस घटनाक्रम के बीच कांग्रेस विधायक हेमंत कटारे ने भाजपा उम्मीदवार और केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के नामांकन के साथ जमा हलफनामे पर तीन आपत्तियां दर्ज कराई हैं। इन आपत्तियों में पत्नी और संपत्ति के विवरण, विदेशी मुद्रा में संपत्ति के उल्लेख तथा नोटरी प्रक्रिया की वैधानिकता से जुड़े सवाल शामिल हैं।
नामांकन जांच में राजकुमार लोहानी को झटका
राज्यसभा उपचुनाव की प्रक्रिया में नामांकन पत्रों की जांच एक महत्वपूर्ण चरण होता है। इसी दौरान निर्वाचन अधिकारी उम्मीदवारों की ओर से जमा किए गए दस्तावेजों और नामांकन की अनिवार्य शर्तों की पड़ताल करते हैं। मध्य प्रदेश में जारी उपचुनाव की प्रक्रिया के दौरान कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार राजकुमार लोहानी का नामांकन इसी जांच के बाद निरस्त कर दिया गया।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उनके नामांकन पत्र के साथ जरूरी दस्तावेज नहीं पाए गए। इसी आधार पर निर्वाचन अधिकारी ने पर्चा खारिज करने का निर्णय लिया। यह कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि नामांकन निरस्त होने के बाद उनकी उम्मीदवारी चुनावी प्रक्रिया में आगे नहीं बढ़ सकेगी, जब तक कि नियमों के तहत कोई वैधानिक उपाय उपलब्ध न हो और उसका इस्तेमाल न किया जाए।
कांते सायन्ना का पर्चा भी हुआ खारिज
नामांकन जांच के दौरान एक अन्य उम्मीदवार कांते सायन्ना को भी झटका लगा। उनका नामांकन प्रस्तावक नहीं होने के कारण निरस्त कर दिया गया। चुनावी प्रक्रिया में प्रस्तावक की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। उम्मीदवार के नामांकन को निर्धारित नियमों के अनुरूप प्रस्तावित करने के लिए आवश्यक प्रस्तावकों की शर्त पूरी करनी होती है।
यदि नामांकन पत्र में प्रस्तावक से संबंधित जरूरी औपचारिकताएं पूरी नहीं होतीं, तो निर्वाचन अधिकारी उसकी वैधता की जांच कर सकते हैं। कांते सायन्ना के मामले में प्रस्तावक नहीं होने को नामांकन खारिज किए जाने का आधार बताया गया है।
इस तरह जांच के दौरान दो उम्मीदवारों के नामांकन निरस्त होने से उपचुनाव की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव आया है। हालांकि, चुनाव मैदान में शेष उम्मीदवारों की अंतिम स्थिति और आगे की प्रक्रिया के बारे में आधिकारिक जानकारी के आधार पर ही निष्कर्ष निकाला जाना चाहिए।
हरदीप सिंह पुरी के हलफनामे पर हेमंत कटारे की तीन आपत्तियां
एक तरफ कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार का नामांकन निरस्त हुआ, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस विधायक हेमंत कटारे ने भाजपा उम्मीदवार और केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के नामांकन के साथ जमा हलफनामे पर सवाल उठाए हैं। कटारे इस चुनावी प्रक्रिया में राजकुमार लोहानी के प्रस्तावक भी थे। उन्होंने निर्वाचन अधिकारी के समक्ष तीन अलग-अलग बिंदुओं पर आपत्तियां दर्ज कराई हैं।
पहली आपत्ति पत्नी और संपत्ति के विवरण से जुड़ी है। कटारे ने हलफनामे में पत्नी से संबंधित जानकारी और संपत्ति के ब्योरे को लेकर सवाल उठाए हैं। चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के लिए हलफनामे में निर्धारित व्यक्तिगत और वित्तीय जानकारी देना महत्वपूर्ण होता है। ऐसे विवरणों के आधार पर मतदाताओं और संबंधित अधिकारियों को उम्मीदवार की घोषित संपत्ति तथा अन्य जरूरी जानकारियों का पता चलता है।
आपत्तियों पर निर्वाचन अधिकारी का फैसला महत्वपूर्ण
हरदीप सिंह पुरी के हलफनामे को लेकर दर्ज कराई गई तीनों आपत्तियां फिलहाल कांग्रेस विधायक हेमंत कटारे की ओर से उठाए गए सवाल हैं। इन्हें किसी अनियमितता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता। इन पर निर्वाचन अधिकारी का परीक्षण और संबंधित उम्मीदवार का पक्ष महत्वपूर्ण होगा।
निर्वाचन अधिकारी के सामने यह देखना होगा कि उठाए गए सवाल चुनावी नियमों के तहत किस सीमा तक विचार योग्य हैं और क्या हलफनामे में किसी प्रकार की कमी या कानूनी त्रुटि मौजूद है। यदि किसी आपत्ति पर स्पष्टीकरण या अतिरिक्त जानकारी की आवश्यकता होती है, तो संबंधित प्रक्रिया के अनुसार उसका परीक्षण किया जा सकता है।





