छत्तीसगढ़ में 650 करोड़ से फोरलेन बनेगा रतनपुर-लोरमी मार्ग, 350 से अधिक गांवों के 2 लाख लोगों को मिलेगी बेहतर कनेक्टिविटी

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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर संभाग में सड़क परिवहन और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ी परियोजना की तैयारी की जा रही है। रतनपुर से लोरमी के बीच बने टू-लेन मार्ग को अब फोरलेन हाईवे में बदलने की योजना है। इसके लिए लोक निर्माण विभाग (PWD) बिलासपुर जिले की सीमा में आने वाले लगभग 52 किलोमीटर लंबे हिस्से के विकास का प्रस्ताव तैयार कर रहा है। इस परियोजना पर करीब 650 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। यदि योजना को मंजूरी मिलती है और निर्माण कार्य निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ता है, तो क्षेत्र के 350 से अधिक गांवों की लगभग दो लाख आबादी को बेहतर सड़क सुविधा मिलने की उम्मीद है।

इस परियोजना को बिलासपुर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सड़क चौड़ीकरण से न केवल आवागमन आसान हो सकता है, बल्कि व्यापार, कृषि, स्थानीय परिवहन और क्षेत्रीय विकास को भी गति मिलने की संभावना है। फिलहाल लोक निर्माण विभाग की ओर से मार्ग का प्राथमिक सर्वे कराया जा रहा है। इसी सर्वे के आधार पर आगे की योजना और निर्माण से संबंधित प्रस्ताव को अंतिम रूप दिया जाएगा।

करीब 100 करोड़ की लागत से बना था टू-लेन मार्ग

रतनपुर-लोरमी मार्ग का निर्माण लगभग आठ वर्ष पहले कराया गया था। उस समय करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से इस सड़क को टू-लेन स्वरूप दिया गया था। इसका उद्देश्य क्षेत्र के विभिन्न गांवों और कस्बों के बीच आवागमन को सुविधाजनक बनाना था।

निर्माण के बाद इस मार्ग का उपयोग स्थानीय लोगों के साथ-साथ दूसरे जिलों की ओर जाने वाले यात्रियों और व्यावसायिक वाहनों द्वारा भी किया जाता रहा है। समय के साथ इस सड़क पर यातायात की जरूरतों में बदलाव आया है। ग्रामीण क्षेत्रों में वाहनों की संख्या बढ़ने, व्यापारिक गतिविधियों के विस्तार और आवागमन की बढ़ती मांग को देखते हुए सड़क की क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए अब टू-लेन सड़क को फोरलेन में बदलने की तैयारी की जा रही है। प्रस्तावित विस्तार से सड़क पर वाहनों की आवाजाही के लिए अधिक जगह उपलब्ध हो सकेगी। इससे व्यस्त समय में यातायात का दबाव कम करने और यात्रा को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद मिल सकती है।

650 करोड़ रुपये का तैयार हो रहा प्रस्ताव

लोक निर्माण विभाग बिलासपुर जिले की सीमा में आने वाले लगभग 52 किलोमीटर लंबे सड़क हिस्से के विकास के लिए करीब 650 करोड़ रुपये का विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर रहा है। यह राशि परियोजना के व्यापक स्तर और सड़क निर्माण की संभावित जरूरतों को दर्शाती है।

फोरलेन निर्माण के लिए सड़क की मौजूदा स्थिति, उपलब्ध भूमि, यातायात का दबाव और आसपास के क्षेत्रों की जरूरतों का अध्ययन किया जाना जरूरी है। प्राथमिक सर्वे के माध्यम से इन्हीं पहलुओं की जानकारी जुटाई जा रही है।

सर्वे पूरा होने के बाद परियोजना की तकनीकी और वित्तीय आवश्यकताओं को अंतिम रूप दिया जा सकेगा। इसके बाद संबंधित विभागों की स्वीकृति, बजट आवंटन और निर्माण की आगे की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।

हालांकि, अभी इस परियोजना के लिए अंतिम स्वीकृति, निर्माण शुरू होने की तारीख और काम पूरा करने की समयसीमा की जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसलिए फिलहाल इसे प्रस्तावित सड़क विकास परियोजना के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

350 से अधिक गांवों को मिलेगा फायदा

रतनपुर-लोरमी मार्ग के फोरलेन बनने का सबसे बड़ा लाभ आसपास के ग्रामीण इलाकों को मिलने की उम्मीद है। प्रस्ताव के अनुसार, इस सड़क से जुड़े 350 से अधिक गांवों की लगभग दो लाख आबादी को बेहतर आवागमन की सुविधा मिल सकती है।

ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क केवल एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचने का माध्यम नहीं होती, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और व्यापार जैसी आवश्यक सेवाओं से जुड़ने का महत्वपूर्ण आधार भी होती है।

फोरलेन सड़क बनने से गांवों के लोगों को बाजार, तहसील, जिला मुख्यालय और अन्य जरूरी स्थानों तक पहुंचने में सुविधा हो सकती है। किसानों को अपनी उपज मंडियों और व्यापारिक केंद्रों तक पहुंचाने में भी बेहतर परिवहन व्यवस्था का लाभ मिल सकता है।

यातायात और सड़क सुरक्षा में हो सकता है सुधार

टू-लेन सड़क पर जब वाहनों की संख्या बढ़ जाती है, तो कई स्थानों पर यातायात का दबाव महसूस होने लगता है। विशेष रूप से भारी वाहन, बसें, कारें और दोपहिया वाहन एक ही सड़क पर चलते हैं, जिससे कुछ हिस्सों में जाम और दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ सकती है।

फोरलेन सड़क में वाहनों के आवागमन के लिए अधिक स्थान उपलब्ध होता है। इससे अलग-अलग दिशाओं में चलने वाले यातायात को व्यवस्थित करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, सड़क चौड़ी होने के साथ उचित संकेतक, सुरक्षित मोड़, चौराहों का प्रबंधन, प्रकाश व्यवस्था और अन्य सड़क सुरक्षा उपाय भी जरूरी होंगे।

प्रस्तावित परियोजना के विस्तृत स्वरूप में इन व्यवस्थाओं को किस तरह शामिल किया जाएगा, यह आगे तैयार होने वाली तकनीकी योजना और विभागीय स्वीकृति के बाद स्पष्ट होगा।

रतनपुर-लोरमी टू-लेन मार्ग को फोरलेन में बदलने की प्रस्तावित योजना बिलासपुर संभाग के सड़क नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकती है। करीब 650 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत और 52 किलोमीटर के प्रस्तावित विस्तार से इस परियोजना का दायरा काफी बड़ा है।

350 से अधिक गांवों और लगभग दो लाख लोगों को बेहतर सड़क सुविधा मिलने की संभावना इसे ग्रामीण विकास के लिहाज से भी महत्वपूर्ण बनाती है।

अब लोगों की नजर प्राथमिक सर्वे पूरा होने, प्रस्ताव को अंतिम रूप मिलने और सरकारी स्वीकृति की प्रक्रिया पर रहेगी। यदि परियोजना को मंजूरी मिलती है और निर्माण कार्य आगे बढ़ता है, तो आने वाले समय में रतनपुर-लोरमी क्षेत्र की यातायात व्यवस्था और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

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