कोंडागांव में एकलव्य आवासीय विद्यालय के विद्यार्थियों का कलेक्ट्रेट घेराव, प्राचार्या समेत तीन जिम्मेदारों को हटाने की मांग, भोजन में कीड़े मिलने का आरोप

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कोंडागांव। छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले में स्थित एकलव्य आवासीय विद्यालय, शामपुर में विद्यार्थियों ने छात्रावास की व्यवस्थाओं और भोजन की गुणवत्ता को लेकर विद्यालय प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को बड़ी संख्या में विद्यार्थी अपने अभिभावकों के साथ जिला मुख्यालय स्थित कलेक्ट्रेट पहुंचे और वहां घेराव कर विरोध प्रदर्शन किया। विद्यार्थियों ने विद्यालय की प्राचार्या चंद्रकिरण तिवारी, छात्रावास अधीक्षक राजवीर यादव और अधीक्षिका निशु पंगाल को उनके पदों से हटाने की मांग की। प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों और अभिभावकों ने अधिकारियों को लिखित शिकायत सौंपकर विद्यालय में भोजन की खराब गुणवत्ता और प्रबंधन के कथित व्यवहार को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की।

इस पूरे मामले में सबसे गंभीर आरोप भोजन की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाने पर कथित तौर पर की गई टिप्पणी से जुड़ा है। विद्यार्थियों का आरोप है कि जब उन्होंने छात्रावास में परोसे जा रहे बासी भोजन को लेकर प्राचार्या से सवाल किया, तो उन्होंने कथित रूप से कहा, ‘आदिवासी हैं, बासी खाना खा लेंगे।’ विद्यार्थियों ने इस टिप्पणी को अपमानजनक बताते हुए विद्यालय प्रबंधन के प्रति नाराजगी व्यक्त की। हालांकि, इस संबंध में संबंधित अधिकारियों और विद्यालय प्रबंधन का पक्ष सामने आना अभी बाकी है। कलेक्ट्रेट पहुंचे अधिकारियों ने शिकायत सुनने के बाद मामले में उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

अभिभावकों के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचे विद्यार्थी

जानकारी के अनुसार, सोमवार को शामपुर स्थित एकलव्य आवासीय विद्यालय के विद्यार्थी अपने अभिभावकों के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचे। विद्यार्थियों का कहना था कि विद्यालय के छात्रावास में लंबे समय से भोजन की गुणवत्ता को लेकर समस्याएं सामने आ रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रावास में मिलने वाला खाना कई बार खराब गुणवत्ता का होता है और भोजन में कीड़े तक निकलते हैं।

विद्यार्थियों ने बताया कि आवासीय विद्यालय में रहने के कारण उन्हें भोजन सहित दैनिक जरूरतों के लिए पूरी तरह छात्रावास की व्यवस्था पर निर्भर रहना पड़ता है। ऐसे में यदि भोजन की गुणवत्ता ठीक नहीं है, तो इसका सीधा असर विद्यार्थियों के स्वास्थ्य और पढ़ाई पर पड़ सकता है।

इसी समस्या को लेकर विद्यार्थियों और अभिभावकों ने एक साथ जिला प्रशासन के सामने अपनी बात रखने का निर्णय लिया। कलेक्ट्रेट पहुंचकर उन्होंने विरोध प्रदर्शन किया और विद्यालय की व्यवस्थाओं में सुधार की मांग उठाई।

भोजन में कीड़े मिलने का आरोप, गुणवत्ता पर उठाए सवाल

विद्यार्थियों की शिकायत का प्रमुख विषय छात्रावास में परोसे जाने वाले भोजन की गुणवत्ता है। प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों ने आरोप लगाया कि उन्हें कई बार ऐसा भोजन दिया जाता है, जिसकी गुणवत्ता संतोषजनक नहीं होती। उनका दावा है कि खाने में कीड़े मिलने जैसी घटनाएं भी सामने आई हैं।

आवासीय विद्यालयों में भोजन की व्यवस्था विद्यार्थियों की दैनिक दिनचर्या का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। यहां रहने वाले छात्र-छात्राएं सुबह से रात तक विद्यालय और छात्रावास की निर्धारित व्यवस्था के अनुसार अपना समय बिताते हैं। ऐसे में पौष्टिक, स्वच्छ और सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराना विद्यालय प्रबंधन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

यदि विद्यार्थियों की ओर से लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह केवल भोजन की गुणवत्ता से जुड़ा मामला नहीं रहेगा, बल्कि छात्रावास की निगरानी व्यवस्था और विद्यार्थियों के कल्याण से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल भी खड़े करेगा।

इसलिए शिकायत के बाद भोजन की गुणवत्ता, रसोई की स्वच्छता, खाद्य सामग्री के भंडारण और भोजन तैयार करने की प्रक्रिया की जांच आवश्यक मानी जा रही है। हालांकि, फिलहाल इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

बासी भोजन को लेकर सवाल करने पर टिप्पणी का आरोप

इस मामले ने उस समय अधिक गंभीर रूप ले लिया, जब विद्यार्थियों ने प्राचार्या चंद्रकिरण तिवारी पर कथित टिप्पणी करने का आरोप लगाया। शिकायत के अनुसार, छात्रावास में दिए जा रहे बासी भोजन को लेकर जब विद्यार्थियों ने सवाल उठाया, तो प्राचार्या ने कथित रूप से कहा, ‘आदिवासी हैं, बासी खाना खा लेंगे।’

विद्यार्थियों ने इस कथित टिप्पणी को अपनी गरिमा और सम्मान से जुड़ा मुद्दा बताते हुए विरोध जताया। उनका कहना है कि भोजन की गुणवत्ता को लेकर शिकायत करना उनका अधिकार है और इस पर उनकी समस्या सुनने के बजाय कथित तौर पर इस तरह की टिप्पणी किया जाना उचित नहीं है।

आदिवासी विद्यार्थियों के लिए संचालित आवासीय संस्थानों का उद्देश्य उन्हें बेहतर शिक्षा, सुरक्षित वातावरण और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना है। ऐसे में विद्यार्थियों की शिकायतों को गंभीरता से सुनना और उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार करना संस्थागत जिम्मेदारी का हिस्सा है।

प्राचार्या और छात्रावास के दो जिम्मेदारों को हटाने की मांग

कलेक्ट्रेट पहुंचे विद्यार्थियों और अभिभावकों ने विद्यालय की प्राचार्या चंद्रकिरण तिवारी के अलावा छात्रावास अधीक्षक राजवीर यादव और अधीक्षिका निशु पंगाल को भी हटाने की मांग की है।

विद्यार्थियों का आरोप है कि विद्यालय और छात्रावास की व्यवस्थाओं को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों का रवैया संतोषजनक नहीं है। उन्होंने अपनी शिकायत में भोजन की गुणवत्ता और प्रबंधन के व्यवहार से संबंधित समस्याओं को उठाया है।

विद्यार्थियों की मांग है कि विद्यालय की वर्तमान व्यवस्था में बदलाव किया जाए और जिम्मेदार पदों पर ऐसे लोगों को नियुक्त किया जाए, जो छात्रावास में रहने वाले बच्चों की समस्याओं को गंभीरता से सुनें तथा उनकी आवश्यकताओं का ध्यान रखें।

हालांकि, फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि जिला प्रशासन इन तीनों जिम्मेदारों को हटाने के संबंध में क्या निर्णय लेगा। इस पर आगे की कार्रवाई जांच और शिकायत में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर निर्भर करेगी।

आवासीय विद्यालयों में विद्यार्थियों की सुविधाओं पर उठे सवाल

कोंडागांव के शामपुर स्थित एकलव्य आवासीय विद्यालय का यह मामला आवासीय शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों को मिलने वाली बुनियादी सुविधाओं की अहमियत को सामने लाता है। ऐसे संस्थानों में पढ़ने वाले बच्चे अपने परिवार से दूर रहकर शिक्षा प्राप्त करते हैं। उनके भोजन, स्वास्थ्य, स्वच्छता, सुरक्षा और दैनिक जरूरतों की जिम्मेदारी विद्यालय प्रशासन पर होती है।

विद्यार्थियों की शिकायतों को केवल अनुशासन या प्रशासनिक असंतोष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। भोजन की गुणवत्ता और छात्रावास की सुविधाओं से जुड़े सवाल सीधे तौर पर बच्चों के स्वास्थ्य और उनके शैक्षणिक वातावरण को प्रभावित कर सकते हैं।

यदि भोजन में कीड़े मिलने और बासी खाना परोसे जाने के आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो संबंधित व्यवस्था में सुधार के साथ जिम्मेदारी तय करना भी आवश्यक होगा। वहीं, कथित आपत्तिजनक टिप्पणी की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

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