नई दिल्ली।स्ट्रोक एक ऐसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, जो किसी व्यक्ति की जिंदगी को अचानक बदल सकती है। इसे आम भाषा में ब्रेन अटैक भी कहा जाता है। यह स्थिति तब पैदा होती है, जब मस्तिष्क के किसी हिस्से तक खून और ऑक्सीजन की आपूर्ति बाधित हो जाती है या मस्तिष्क की कोई रक्त वाहिका फट जाती है। इसके कारण दिमाग की कोशिकाएं प्रभावित होने लगती हैं और शरीर के अलग-अलग अंगों के काम करने की क्षमता पर असर पड़ सकता है। कई मामलों में मरीज को लंबे समय तक इलाज, फिजियोथेरेपी और परिवार के सहयोग की जरूरत पड़ती है।

स्ट्रोक का प्रभाव केवल मरीज तक सीमित नहीं रहता, बल्कि परिवार के सदस्यों और देखभाल करने वालों की जिंदगी भी प्रभावित होती है। भारत में यह विकलांगता का पांचवां प्रमुख कारण माना गया है। ऐसे में इसके जोखिम कारकों, शुरुआती लक्षणों और बचाव के तरीकों को समझना बेहद जरूरी है।
क्या होता है स्ट्रोक और कितने प्रकार का होता है?
स्ट्रोक मुख्य रूप से तब होता है, जब मस्तिष्क तक पहुंचने वाली रक्त आपूर्ति में अचानक रुकावट आ जाती है या मस्तिष्क की किसी रक्त वाहिका से खून बहने लगता है। चिकित्सा विज्ञान में इसे मुख्य रूप से दो प्रकारों में बांटा गया है।
1. इस्केमिक स्ट्रोक (Ischemic Stroke): यह तब होता है, जब मस्तिष्क तक खून पहुंचाने वाली किसी नस या धमनी में रक्त का थक्का जम जाता है। इसके कारण दिमाग के संबंधित हिस्से तक पर्याप्त खून और ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती। यह स्ट्रोक का सबसे आम प्रकार है।
2. हेमरेजिक स्ट्रोक (Hemorrhagic Stroke): इस स्थिति में मस्तिष्क की कोई रक्त वाहिका फट जाती है और आसपास के ऊतकों में खून जमा होने लगता है। इससे मस्तिष्क पर दबाव बढ़ सकता है और गंभीर नुकसान हो सकता है।
दोनों ही प्रकार के स्ट्रोक मेडिकल इमरजेंसी हैं। इनमें तुरंत अस्पताल पहुंचना जरूरी होता है। किस मरीज को किस प्रकार का स्ट्रोक हुआ है, इसकी पुष्टि चिकित्सकीय जांच और ब्रेन इमेजिंग के माध्यम से की जाती है।
स्ट्रोक के 8 प्रमुख जोखिम कारक
स्ट्रोक के कुछ जोखिम कारक ऐसे हैं, जिन्हें बदला नहीं जा सकता, जैसे उम्र और पारिवारिक इतिहास। वहीं कई कारण ऐसे हैं, जिन पर समय रहते नियंत्रण किया जा सकता है।
1. हाई ब्लड प्रेशर: उच्च रक्तचाप स्ट्रोक के सबसे महत्वपूर्ण जोखिम कारकों में शामिल है। लंबे समय तक ब्लड प्रेशर अधिक रहने से रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है। इससे नसों में रुकावट या उनके फटने का खतरा बढ़ सकता है।
2. डायबिटीज: मधुमेह के कारण रक्त वाहिकाओं और हृदय पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। यदि ब्लड शुगर लंबे समय तक नियंत्रित न रहे, तो स्ट्रोक का जोखिम बढ़ सकता है।
3. हाई कोलेस्ट्रॉल: रक्त में खराब कोलेस्ट्रॉल यानी LDL का स्तर अधिक होने से धमनियों में वसा जमा हो सकती है। इससे रक्त का प्रवाह बाधित होने और थक्का बनने की आशंका बढ़ती है।
4. धूम्रपान और तंबाकू का सेवन: सिगरेट, बीड़ी और अन्य तंबाकू उत्पाद रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं। निकोटीन ब्लड प्रेशर बढ़ा सकता है और धूम्रपान से शरीर को मिलने वाली ऑक्सीजन की मात्रा प्रभावित होती है।
5. मोटापा और शारीरिक गतिविधि की कमी: लंबे समय तक बैठे रहना, नियमित व्यायाम न करना और बढ़ता वजन हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज तथा कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याओं को बढ़ावा दे सकते हैं।
6. असंतुलित खानपान: अधिक नमक, तली-भुनी चीजें, प्रोसेस्ड फूड और कम फल-सब्जियों वाला आहार स्ट्रोक के जोखिम से जुड़ा है। विशेष रूप से अधिक नमक का सेवन ब्लड प्रेशर बढ़ा सकता है।
7. हृदय संबंधी बीमारियां: एट्रियल फिब्रिलेशन जैसी हृदय की अनियमित धड़कन की समस्या में दिल के भीतर खून का थक्का बन सकता है। यह थक्का मस्तिष्क तक पहुंचकर स्ट्रोक का कारण बन सकता है।
8. शराब का अत्यधिक सेवन: जरूरत से ज्यादा शराब पीने से ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है और हृदय तथा रक्त वाहिकाओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
स्ट्रोक के शुरुआती लक्षणों को कैसे पहचानें?
स्ट्रोक के मामले में समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। इसके लक्षण अचानक दिखाई दे सकते हैं। इसलिए मरीज या उसके परिवार को इन्हें पहचानने में देरी नहीं करनी चाहिए।
- चेहरे का एक हिस्सा अचानक लटक जाना या मुस्कुराने में परेशानी होना।
- शरीर के एक तरफ हाथ या पैर में कमजोरी अथवा सुन्नपन महसूस होना।
- अचानक बोलने में परेशानी होना या आवाज लड़खड़ाना।
- दूसरे व्यक्ति की बात समझने में कठिनाई होना।
- अचानक देखने में परेशानी या धुंधला दिखाई देना।
- बिना स्पष्ट कारण के तेज सिरदर्द होना।
- अचानक चक्कर आना, संतुलन बिगड़ना या चलने में परेशानी होना।
स्ट्रोक से बचाव के लिए क्या करें?
स्ट्रोक के सभी मामलों को रोकना संभव नहीं है, लेकिन जीवनशैली में सुधार और बीमारियों पर नियंत्रण रखकर इसका जोखिम कम किया जा सकता है।
सबसे पहले नियमित रूप से ब्लड प्रेशर की जांच कराएं। यदि हाई ब्लड प्रेशर या डायबिटीज है, तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाएं लें और जांच कराते रहें। कोलेस्ट्रॉल के स्तर पर भी ध्यान देना जरूरी है।
खानपान में ताजे फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज और संतुलित पोषक तत्वों को शामिल करें। नमक और अत्यधिक वसायुक्त भोजन का सेवन सीमित रखें। रोजाना अपनी क्षमता के अनुसार शारीरिक गतिविधि करें। पैदल चलना, योग और नियमित व्यायाम स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकते हैं।
धूम्रपान और तंबाकू से पूरी तरह दूरी बनाएं। शराब का सेवन भी स्ट्रोक सहित कई स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम बढ़ा सकता है। पर्याप्त नींद लें और वजन को स्वस्थ सीमा में बनाए रखने का प्रयास करें।
स्ट्रोक एक गंभीर लेकिन कई मामलों में जोखिम कम करके टाली जा सकने वाली स्वास्थ्य समस्या है। बढ़ती उम्र इसका खतरा बढ़ाती है, लेकिन युवा भी इससे पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं। हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, धूम्रपान, मोटापा और असंतुलित खानपान जैसे कारकों पर नियंत्रण रखना जरूरी है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि स्ट्रोक के शुरुआती लक्षणों को पहचानकर तुरंत चिकित्सा सहायता ली जाए। जागरूकता, नियमित स्वास्थ्य जांच और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर स्ट्रोक से होने वाली विकलांगता के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।




