महिलाओं को पुरुषों से ज्यादा गर्मी क्यों पसंद आती है? वैज्ञानिक शोध में सामने आई शरीर की बनावट से जुड़ी दिलचस्प वजह

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नई दिल्ली। अक्सर घरों और ऑफिसों में तापमान को लेकर महिलाओं और पुरुषों की पसंद अलग-अलग दिखाई देती है। जहां महिलाएं थोड़ा गर्म वातावरण पसंद करती हैं, वहीं पुरुषों को अपेक्षाकृत ठंडा कमरा अच्छा लगता है। कई बार इस अंतर के कारण एयर कंडीशनर का तापमान तय करना भी मुश्किल हो जाता है। खासकर गर्मियों में यह बहस आम हो जाती है कि एसी 22 डिग्री पर चलाया जाए या 25 डिग्री पर। अब वैज्ञानिकों ने इस दिलचस्प अंतर के पीछे छिपे एक महत्वपूर्ण कारण का पता लगाया है। नई रिसर्च के अनुसार, इसकी वजह केवल शरीर की बनावट नहीं, बल्कि शरीर में मौजूद तापमान महसूस करने वाली विशेष कोशिकाएं और उनके काम करने का तरीका भी है।

लंदन स्थित किंग्स कॉलेज के वैज्ञानिकों ने चूहों पर एक अध्ययन किया है, जिसमें पाया गया कि नर और मादा चूहों की तापमान पसंद में स्पष्ट अंतर होता है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, मादा चूहों को अपेक्षाकृत गर्म वातावरण पसंद आता है, जबकि नर चूहे कम तापमान वाले स्थानों को अधिक आरामदायक मानते हैं। इस अध्ययन से यह समझने में मदद मिली है कि जीवों के शरीर में गर्मी और ठंडक महसूस करने की प्रक्रिया किस तरह अलग-अलग हो सकती है।

मादा चूहों को 36 डिग्री, नर को 32 डिग्री तापमान पसंद

किंग्स कॉलेज लंदन के इंस्टीट्यूट ऑफ साइकियाट्री, साइकोलॉजी एंड न्यूरोसाइंस से जुड़े शोधकर्ताओं ने तापमान के प्रति नर और मादा चूहों की प्रतिक्रिया का अध्ययन किया। प्रयोग में पाया गया कि मादा चूहे लगभग 36 डिग्री सेल्सियस तापमान वाले फर्श को ज्यादा पसंद करते हैं, जबकि नर चूहों की पसंद लगभग 32 डिग्री सेल्सियस रही।

इस अंतर का मतलब है कि दोनों के लिए आरामदायक तापमान एक जैसा नहीं होता। जिस गर्म सतह पर मादा चूहे सहज महसूस करते हैं, उसी तापमान पर नर चूहों को असहजता हो सकती है।

शोधकर्ताओं ने प्रयोग के दौरान चूहों को अलग-अलग तापमान वाली धातु की प्लेटों पर जाने का विकल्प दिया। एक प्लेट का तापमान 33 डिग्री सेल्सियस रखा गया, जबकि दूसरी प्लेट का तापमान बदलकर उनकी पसंद और प्रतिक्रिया को देखा गया। इस तरह वैज्ञानिकों ने यह समझने की कोशिश की कि चूहे किस तापमान को पसंद करते हैं और किस स्तर पर गर्मी उनके लिए असुविधाजनक होने लगती है।

इंसानों में भी दिखाई देता है ऐसा अंतर

वैज्ञानिकों के अनुसार, तापमान को लेकर यह अंतर केवल चूहों तक सीमित नहीं है। इंसानों में भी औसतन महिलाओं और पुरुषों की पसंद में ऐसा ही रुझान देखने को मिलता है।

शोध से संबंधित किंग्स कॉलेज लंदन की जानकारी के मुताबिक, महिलाओं को सामान्य तौर पर लगभग 25 डिग्री सेल्सियस कमरे का तापमान आरामदायक लग सकता है, जबकि पुरुषों के लिए लगभग 22 डिग्री सेल्सियस तापमान अधिक अनुकूल हो सकता है।

यही वजह है कि कई घरों और कार्यस्थलों पर एसी के तापमान को लेकर अलग-अलग राय सामने आती है। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि ये औसत पसंद को दर्शाने वाले आंकड़े हैं। हर महिला को 25 डिग्री और हर पुरुष को 22 डिग्री तापमान ही पसंद आए, ऐसा जरूरी नहीं है।

इस नए अध्ययन में सीधे इंसानों पर प्रयोग नहीं किया गया है। शोध मुख्य रूप से चूहों पर आधारित है। इसलिए वैज्ञानिकों ने इंसानों में भी इसी आणविक प्रक्रिया के काम करने की संभावना जताई है, लेकिन इसकी पुष्टि के लिए अलग से मानव अध्ययन की जरूरत होगी।

शरीर में मौजूद दो खास सेंसर हैं तापमान के अंतर की वजह

इस शोध की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वैज्ञानिकों ने तापमान महसूस करने वाले दो विशेष आयन चैनलों की भूमिका को समझाया है। इनका नाम TRPM2 और TRPM8 है।

ये दोनों शरीर की तंत्रिका कोशिकाओं में मौजूद छोटे-छोटे रास्तों की तरह काम करते हैं। इनके माध्यम से आवेशित कण कोशिकाओं के अंदर और बाहर जा सकते हैं। तापमान में बदलाव होने पर ये चैनल सक्रिय होते हैं और तंत्रिका तंत्र को संकेत भेजने की प्रक्रिया में भूमिका निभाते हैं।

TRPM2 को गर्माहट महसूस करने से जुड़ा सेंसर माना जाता है, जबकि TRPM8 ठंडक का एहसास कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

शोधकर्ताओं ने पाया कि मादा चूहों में इन दोनों सेंसर के सक्रिय होने की तापमान सीमा नर चूहों की तुलना में अधिक गर्म स्तर की ओर खिसकी हुई थी। इसका अर्थ है कि दोनों के शरीर में तापमान महसूस करने की प्रक्रिया अलग तरीके से काम करती है।

टेस्टोस्टेरोन हार्मोन की भी अहम भूमिका

अध्ययन में वैज्ञानिकों ने हार्मोन के प्रभाव को भी समझने की कोशिश की। इसमें टेस्टोस्टेरोन हार्मोन की महत्वपूर्ण भूमिका सामने आई।

शोधकर्ताओं ने पाया कि नर चूहों में टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम करने पर उनकी तापमान पसंद गर्म वातावरण की ओर बढ़ने लगी। वहीं मादा चूहों में टेस्टोस्टेरोन बढ़ाने पर वे गर्मी के प्रति अधिक संवेदनशील और गर्म सतह से बचने वाले व्यवहार की ओर बढ़े।

हालांकि, वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया कि टेस्टोस्टेरोन इस अंतर की पूरी वजह नहीं है। यह प्रक्रिया में योगदान देता है, लेकिन तापमान पसंद को प्रभावित करने वाले अन्य जैविक कारण भी मौजूद हैं। अध्ययन में मादा चूहों के सेक्स हार्मोन का तापमान पसंद पर वैसा प्रभाव नहीं मिला जैसा टेस्टोस्टेरोन के मामले में देखा गया।

एक और महत्वपूर्ण बात यह रही कि नर और मादा चूहों के शरीर के अंदरूनी तथा त्वचा के तापमान में ऐसा अंतर नहीं पाया गया, जो उनकी अलग-अलग पसंद को समझा सके। इससे संकेत मिला कि अंतर केवल शरीर के गर्म या ठंडा होने का नहीं, बल्कि तापमान को महसूस करने के तरीके का भी है।

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