Sehore News: सीहोर की नन्हीं बेटी अभिश्री नामदेव ने रचा इतिहास, 1 साल 11 महीने की उम्र में बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज कराया नाम

0
7

सीहोर : मध्य प्रदेश के सीहोर जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने जिले को गर्व और खुशी का अवसर दिया है। सीहोर की नन्हीं बेटी अभिश्री नामदेव ने अपनी असाधारण स्मरण शक्ति और सीखने-समझने की क्षमता के दम पर कम उम्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। अभिश्री का नाम प्रतिष्ठित संस्था बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स (Book of World Records) में दर्ज किया गया है। खास बात यह है कि उन्होंने यह उपलब्धि महज 1 वर्ष 11 माह और 25 दिन की उम्र में हासिल की। इतनी छोटी उम्र में विभिन्न रंगों, आकारों, जानवरों, उनकी आवाजों, अंग्रेजी वर्णमाला और अंकों की पहचान करने की उनकी क्षमता ने सभी का ध्यान आकर्षित किया है।

अभिश्री की इस उपलब्धि से उनके परिवार के साथ-साथ सीहोर जिले में भी खुशी का माहौल है। इतनी कम उम्र में उनकी प्रतिभा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने को जिले के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। उनकी कहानी यह भी बताती है कि बच्चों में सीखने और नई चीजों को समझने की क्षमता शुरुआती वर्षों में ही दिखाई देने लगती है। सही वातावरण, प्रोत्साहन और सीखने के अवसर मिलने से बच्चों की प्रतिभा को आगे बढ़ने का मौका मिलता है।

1 साल 11 महीने की उम्र में हासिल किया विश्व रिकॉर्ड

अभिश्री नामदेव की उपलब्धि इसलिए विशेष मानी जा रही है, क्योंकि उन्होंने बेहद कम उम्र में अपनी बौद्धिक क्षमता का प्रदर्शन किया। जारी किए गए आधिकारिक प्रमाण पत्र के अनुसार, रिकॉर्ड के लिए उनकी उपलब्धि दर्ज किए जाने के समय उनकी उम्र 1 वर्ष 11 माह और 25 दिन थी।

आमतौर पर इस उम्र में बच्चे बोलना सीखने, आसपास की चीजों को पहचानने और धीरे-धीरे अपने परिवेश को समझने की प्रक्रिया में होते हैं। ऐसे समय में अभिश्री द्वारा कई अलग-अलग विषयों की पहचान करना और उन्हें याद रखना उनकी सीखने की क्षमता को दर्शाता है।

बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की ओर से उन्हें इसी असाधारण प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया है। प्रमाण पत्र के माध्यम से उनकी उपलब्धि को मान्यता दी गई है। इस सम्मान के बाद अभिश्री का नाम उन प्रतिभाशाली बच्चों की श्रेणी में शामिल हो गया है, जिन्होंने कम उम्र में अपनी विशेष क्षमताओं के कारण पहचान बनाई है।

रंगों और अलग-अलग आकारों की रखती हैं पहचान

अभिश्री की प्रतिभा का एक महत्वपूर्ण पक्ष उनकी पहचान करने की क्षमता है। जानकारी के अनुसार, नन्हीं अभिश्री विभिन्न रंगों को स्पष्ट रूप से पहचान सकती हैं। इसके अलावा उन्हें अलग-अलग आकारों की भी अच्छी समझ है।

रंगों और आकारों की पहचान बच्चों के शुरुआती मानसिक विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। इसके माध्यम से बच्चे अपने आसपास की वस्तुओं को अलग-अलग श्रेणियों में समझना सीखते हैं। उदाहरण के तौर पर लाल, पीले, हरे और नीले जैसे रंगों की पहचान करना तथा गोल, चौकोर और अन्य आकृतियों में अंतर समझना उनकी अवलोकन क्षमता को विकसित करने में मदद करता है।

अभिश्री द्वारा कम उम्र में इन विषयों की पहचान करना उनकी सीखने और जानकारी को याद रखने की क्षमता को प्रदर्शित करता है। यही वजह है कि उनकी प्रतिभा ने रिकॉर्ड संस्था का ध्यान आकर्षित किया।

जानवरों और उनकी आवाजों को भी आसानी से पहचानती हैं

अभिश्री की विशेष प्रतिभा केवल रंगों और आकृतियों तक सीमित नहीं है। वह कई जानवरों को पहचानने के साथ-साथ उनकी आवाजों को भी पहचान लेती हैं।

जानवरों की पहचान करना और उनकी आवाजों को अलग-अलग समझना बच्चों के लिए सीखने का एक रोचक तरीका होता है। उदाहरण के तौर पर गाय, कुत्ता, बिल्ली, शेर और हाथी जैसे जानवरों की तस्वीरों या आवाजों के माध्यम से बच्चे उनके नाम और विशेषताओं को याद करते हैं।

अभिश्री में भी इस प्रकार की पहचान क्षमता देखने को मिली है। वह जानवरों और उनकी आवाजों के बीच संबंध समझने में सक्षम हैं। इससे उनकी सुनने, देखने और जानकारी को याद रखने की क्षमता का पता चलता है।

छोटी उम्र में किसी वस्तु या आवाज को पहचानना और उसे सही जानकारी के साथ जोड़ना बच्चों की संज्ञानात्मक क्षमता यानी सोचने, समझने और सीखने की प्रक्रिया का हिस्सा होता है।

बच्चों की प्रतिभा को प्रोत्साहन देना जरूरी

अभिश्री की कहानी से यह सीख मिलती है कि बच्चों की प्रतिभा को उम्र के आधार पर सीमित नहीं समझना चाहिए। हर बच्चा अपने तरीके और अपनी गति से सीखता है। किसी बच्चे में रंगों की पहचान अच्छी हो सकती है, तो किसी में संगीत, भाषा, खेल या चित्रों को समझने की विशेष क्षमता हो सकती है।

ऐसे में बच्चों की रुचि को समझना और बिना अनावश्यक दबाव के उन्हें आगे बढ़ने के अवसर देना जरूरी है। खेल आधारित शिक्षा, चित्रों वाली किताबें, पहेलियां और परिवार के साथ संवाद बच्चों की सीखने की प्रक्रिया को रोचक बना सकते हैं।

अभिश्री नामदेव की उपलब्धि निश्चित रूप से सीहोर के लिए खुशी और गर्व का विषय है। महज 1 वर्ष 11 माह और 25 दिन की उम्र में बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज कराना उनकी अब तक की यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। उम्मीद की जा सकती है कि परिवार के सहयोग और प्रोत्साहन के साथ नन्हीं अभिश्री भविष्य में भी अपनी प्रतिभा से नई उपलब्धियां हासिल करेंगी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here