सीहोर। मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में खाद्य सुरक्षा को लेकर पुलिस और खाद्य विभाग की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए श्यामपुर क्षेत्र में मावे की बड़ी खेप जब्त की है। बुधवार को की गई इस कार्रवाई में एक आयशर वाहन से मावे की 107 बोरियां बरामद की गईं। प्रारंभिक आकलन के अनुसार, जब्त मावे की कुल मात्रा करीब 4,000 से 5,000 किलोग्राम यानी लगभग 4 से 5 टन बताई जा रही है। कार्रवाई के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग ने मावे के नमूने लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजने की प्रक्रिया शुरू की है।
यह कार्रवाई उस सूचना के आधार पर की गई, जिसमें एक वाहन के माध्यम से मावे की खेप ले जाने की जानकारी पुलिस और खाद्य विभाग को मिली थी। सूचना मिलने के बाद श्यामपुर थाना प्रभारी और सीहोर के फूड इंस्पेक्टर की संयुक्त टीम ने संबंधित वाहन को रोककर उसकी तलाशी ली। जांच के दौरान वाहन में मावे से भरी 107 बोरियां मिलीं। इसके बाद टीम ने वाहन और उसमें रखे मावे को अपने कब्जे में ले लिया।


सूचना के बाद संयुक्त टीम ने रोका आयशर वाहन
मिली जानकारी के अनुसार, पुलिस और खाद्य सुरक्षा विभाग को एक वाहन में मावे की खेप ले जाए जाने की सूचना प्राप्त हुई थी। सूचना को गंभीरता से लेते हुए श्यामपुर थाना प्रभारी और सीहोर के फूड इंस्पेक्टर ने संयुक्त रूप से कार्रवाई की योजना बनाई। इसके बाद टीम ने श्यामपुर क्षेत्र में संबंधित आयशर वाहन को रोककर तलाशी ली।
वाहन की जांच के दौरान उसमें बड़ी संख्या में मावे की बोरियां रखी हुई मिलीं। गिनती करने पर कुल 107 बोरे पाए गए। इतनी बड़ी मात्रा में खाद्य सामग्री मिलने के बाद अधिकारियों ने नियमानुसार जांच की प्रक्रिया शुरू की और मावे को अपने कब्जे में लिया।
इस कार्रवाई में पुलिस की भूमिका वाहन को रोकने और तलाशी की प्रक्रिया में रही, जबकि खाद्य सुरक्षा विभाग ने खाद्य सामग्री की गुणवत्ता की जांच से जुड़ी कार्रवाई शुरू की। दोनों विभागों की संयुक्त कार्रवाई का उद्देश्य खेप की वास्तविक स्थिति का पता लगाना और खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियमों के पालन की जांच करना है।
करीब 4 से 5 हजार किलो मावा होने का अनुमान
प्रारंभिक आकलन के मुताबिक, मावे की प्रत्येक बोरी का वजन लगभग 40 से 50 किलोग्राम बताया गया है। वाहन में कुल 107 बोरियां मिलने के आधार पर मावे की कुल मात्रा करीब 4,000 से 5,000 किलोग्राम आंकी गई है। यानी वाहन में लगभग 4 से 5 टन मावा रखा हुआ था।
यह वजन फिलहाल बोरियों के अनुमानित वजन के आधार पर बताया गया है। वास्तविक कुल वजन की पुष्टि तौल और संबंधित विभागीय रिकॉर्ड से हो सकेगी। इतनी बड़ी खेप मिलने के कारण खाद्य विभाग के लिए इसकी गुणवत्ता, भंडारण और स्वच्छता से जुड़े पहलुओं की जांच करना महत्वपूर्ण है।
मावे जैसे दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता का सीधा संबंध उपभोक्ताओं की सेहत से होता है। इसलिए बड़ी मात्रा में खाद्य सामग्री के परिवहन के दौरान उसके सुरक्षित रखरखाव और निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित करना जरूरी है।
खाद्य विभाग ने जांच के लिए लिए सैंपल
वाहन से मावा जब्त किए जाने के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग ने उसकी गुणवत्ता की जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए मावे के नमूने लिए जा रहे हैं, जिन्हें परीक्षण के लिए प्रयोगशाला भेजा जाएगा। लैब में जांच के बाद ही मावे की वास्तविक गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप होने की स्थिति सामने आएगी।
नमूनों की जांच में यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि मावा निर्धारित गुणवत्ता और स्वच्छता संबंधी मानकों पर खरा उतरता है या नहीं। यदि जांच में किसी तरह की अनियमितता या नियमों का उल्लंघन सामने आता है, तो खाद्य सुरक्षा विभाग संबंधित प्रावधानों के तहत आगे की कार्रवाई कर सकता है।
हालांकि, अभी तक उपलब्ध जानकारी में मावे के मिलावटी या असुरक्षित होने की पुष्टि नहीं हुई है। केवल खेप जब्त किए जाने के आधार पर उसे मिलावटी घोषित करना उचित नहीं होगा। अंतिम स्थिति प्रयोगशाला की रिपोर्ट और विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
परिवहन और गुणवत्ता से जुड़े पहलुओं की जांच
खाद्य विभाग की कार्रवाई केवल मावे के नमूने लेने तक सीमित नहीं है। इतनी बड़ी मात्रा में मावा एक वाहन से ले जाया जा रहा था, इसलिए खेप से जुड़े अन्य पहलुओं की जानकारी जुटाना भी जांच का हिस्सा हो सकता है। इनमें मावे की गुणवत्ता, उसके रखरखाव और परिवहन से संबंधित विवरण महत्वपूर्ण होंगे।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी में अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि मावा कहां से लाया जा रहा था, इसे किस स्थान पर पहुंचाया जाना था और वाहन में रखी खेप से संबंधित दस्तावेजों में क्या जानकारी मिली है। इसी तरह मावे के मालिक, सप्लायर या खरीदार के संबंध में भी कोई विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। इन बिंदुओं पर विभागीय जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
खाद्य सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण कार्रवाई
मावा मिठाइयों और कई अन्य खाद्य पदार्थों में इस्तेमाल किया जाने वाला प्रमुख दुग्ध उत्पाद है। त्योहारों, धार्मिक आयोजनों और विशेष अवसरों पर इसकी मांग बढ़ जाती है। ऐसे समय में बाजार में उपलब्ध मावे की गुणवत्ता और स्वच्छता पर निगरानी रखना खाद्य सुरक्षा विभाग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है।
खाद्य सामग्री के उत्पादन, भंडारण और परिवहन के दौरान निर्धारित मानकों का पालन नहीं होने पर उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है। इसी वजह से खाद्य विभाग समय-समय पर खाद्य पदार्थों के नमूने लेकर उनकी जांच कराता है। किसी खेप की गुणवत्ता संदिग्ध पाए जाने पर नियमानुसार उसे रोकने और जांच करने की कार्रवाई की जा सकती है।
श्यामपुर में हुई यह कार्रवाई भी खाद्य सुरक्षा से जुड़े इसी निरीक्षण और जांच के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। हालांकि, इस मामले में मावे की गुणवत्ता को लेकर अंतिम फैसला प्रयोगशाला रिपोर्ट आने के बाद ही किया जा सकेगा।
जांच रिपोर्ट के बाद स्पष्ट होगी आगे की कार्रवाई
फिलहाल पुलिस और खाद्य सुरक्षा विभाग की संयुक्त टीम ने आयशर वाहन से मिली मावे की 107 बोरियों को कब्जे में लिया है। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार, इनमें करीब 4 से 5 टन मावा मौजूद है। खाद्य विभाग नमूने लेकर प्रयोगशाला भेज रहा है और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू लैब रिपोर्ट होगी। यदि मावा निर्धारित मानकों के अनुरूप पाया जाता है, तो जांच में सामने आए अन्य तथ्यों के आधार पर आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। वहीं, यदि गुणवत्ता में गड़बड़ी या खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन प्रमाणित होता है, तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
श्यामपुर में हुई इस कार्रवाई के बाद अब लोगों की नजर खाद्य विभाग की जांच रिपोर्ट पर रहेगी। रिपोर्ट आने के बाद ही पता चल सकेगा कि जब्त मावे की गुणवत्ता कैसी थी और इस मामले में आगे क्या कदम उठाए जाएंगे।




