Sehore News: सीवन नदी से निकल रही गीता, पुराण, रामायण और देवी-देवताओं की तस्वीरें, चद्दर पुल पर सफाई अभियान में सामने आई चिंताजनक स्थिति

0
4

Sehore News: मध्य प्रदेश के सीहोर जिले की जीवनदायिनी और मोक्षदायिनी मानी जाने वाली सीवन नदी की सफाई और संरक्षण के लिए चलाया जा रहा अभियान लगातार आगे बढ़ रहा है। सीवन स्वच्छता एवं जलकुंभी निकालो अभियान के दौरान नदी की सफाई करते समय ऐसी सामग्री सामने आई है, जिसने धार्मिक आस्था के साथ-साथ नदी में बढ़ते प्रदूषण को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पिछले तीन दिनों से चद्दर पुल क्षेत्र में चल रहे सफाई अभियान के दौरान नदी के गंदे स्थानों से श्रीमद्भगवद्गीता, पुराण, रामायण, हनुमान चालीसा और देवी-देवताओं के चित्र मिले हैं। ये धार्मिक पुस्तकें और तस्वीरें नदी में जमा कचरे तथा जलकुंभी के बीच पड़ी हुई थीं।

सीवन नदी की सफाई में जुटी सीवन पुत्र टीम ने इन सामग्रियों को बाहर निकाला। अभियान के दौरान बड़ी मात्रा में कचरा और जलकुंभी भी हटाई गई। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर नदी को स्वच्छ रखने के साथ-साथ धार्मिक पुस्तकों और पूजनीय चित्रों के सम्मानजनक निस्तारण की आवश्यकता को सामने ला दिया है।

महिला घाट से शुरू हुआ अभियान अब चद्दर पुल तक पहुंचा

सीवन नदी संरक्षण के लिए चलाया जा रहा अभियान महिला घाट से शुरू किया गया था। इस स्थान पर पहले नदी की स्थिति काफी खराब बताई जा रही थी। नदी में गंदगी, कचरा और जलकुंभी के कारण पानी की स्थिति चिंताजनक हो गई थी। स्थानीय लोगों के अनुसार, कुछ महीने पहले नदी का पानी इतना गंदा दिखाई देता था कि उसकी तुलना जले हुए ऑयल से की जाने लगी थी।

ऐसे समय में सीवन पुत्र टीम ने नदी की सफाई और संरक्षण का जिम्मा उठाया। टीम के सदस्यों ने लगातार श्रमदान करके महिला घाट की सफाई की और नदी को स्वच्छ बनाने का प्रयास शुरू किया। धीरे-धीरे इस अभियान से अन्य लोग भी जुड़ने लगे।

अब यह अभियान महिला घाट से आगे बढ़कर चद्दर पुल तक पहुंच गया है। पिछले तीन दिनों से यहां लगातार सफाई गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। नदी के किनारों और पानी में जमा कचरे को बाहर निकालने के साथ जलकुंभी हटाने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

सफाई के दौरान मिलीं धार्मिक पुस्तकें और देवी-देवताओं के चित्र

चद्दर पुल पर चल रहे सफाई अभियान के दौरान नदी के गंदे स्थानों से धार्मिक सामग्री मिलने का मामला विशेष रूप से चर्चा में है। सफाई कर रहे लोगों को श्रीमद्भगवद्गीता, पुराण, रामायण और हनुमान चालीसा जैसी धार्मिक पुस्तकें मिलीं। इसके अलावा देवी-देवताओं के चित्र भी कचरे और जलकुंभी के बीच पाए गए।

धार्मिक पुस्तकों और देवी-देवताओं के चित्रों का इस तरह गंदगी में मिलना समाज के लिए विचार करने का विषय है। घरों और धार्मिक आयोजनों में इस्तेमाल होने वाली पुरानी धार्मिक सामग्री को नदी, नालों या अन्य जलस्रोतों में डालने के बजाय सम्मानजनक तरीके से सुरक्षित रखने अथवा निर्धारित व्यवस्था के अनुसार निस्तारित करने की जरूरत है।

नदी केवल पानी का स्रोत नहीं होती, बल्कि उसके साथ लोगों की सांस्कृतिक, धार्मिक और सामाजिक भावनाएं भी जुड़ी होती हैं। सीवन नदी के साथ भी सीहोर के लोगों की गहरी आस्था है। ऐसे में नदी में धार्मिक सामग्री और कचरा डालने से उसकी स्वच्छता प्रभावित होने के साथ लोगों की भावनाएं भी आहत हो सकती हैं।

जलकुंभी हटाने के लिए 2026 तक का संकल्प

सीवन नदी की सफाई के साथ जलकुंभी हटाना अभियान का एक प्रमुख उद्देश्य है। टीम का संकल्प है कि वर्ष 2026 में सीवन नदी को जलकुंभी से मुक्त करने की दिशा में लगातार काम किया जाए।

जलकुंभी एक तेजी से फैलने वाला जलीय पौधा है। जब यह किसी जलस्रोत की सतह पर बड़ी मात्रा में फैल जाती है, तो पानी की सतह ढक सकती है। इससे सूर्य का प्रकाश पानी के भीतर पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुंच पाता और जलीय पारिस्थितिकी प्रभावित हो सकती है।

जलकुंभी की अत्यधिक वृद्धि से पानी में ऑक्सीजन के स्तर और जलीय जीवों के जीवन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसके अलावा नदी के बहाव में बाधा और पानी की गुणवत्ता से जुड़ी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं।

इसी वजह से सीवन पुत्र टीम लगातार जलकुंभी निकालने का काम कर रही है। अभियान से जुड़े लोगों का मानना है कि यदि समय रहते इसे नियंत्रित नहीं किया गया तो नदी की स्थिति और खराब हो सकती है। टीम का प्रयास है कि नदी के अलग-अलग हिस्सों में फैली जलकुंभी को हटाकर पानी के प्राकृतिक प्रवाह और नदी के पर्यावरण को बेहतर बनाया जाए।

सावन में महिला घाट पर 10 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने भरा था कांवड़ का जल

सीवन नदी का धार्मिक महत्व भी काफी अधिक है। सावन महीने में यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। अभियान से जुड़ी जानकारी के अनुसार, जिस महिला घाट की सफाई सीवन पुत्र टीम ने की थी, वहां सावन के दौरान 10 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने कांवड़ के लिए जल भरा था।

यह आंकड़ा महिला घाट की धार्मिक और सामाजिक महत्ता को दर्शाता है। सावन के महीने में कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालु पवित्र नदियों और जलस्रोतों से जल लेकर धार्मिक स्थलों तक पहुंचते हैं। ऐसे में नदी और घाटों की स्वच्छता बनाए रखना बेहद जरूरी हो जाता है।

यदि घाटों पर गंदगी जमा रहे या नदी का पानी प्रदूषित हो तो श्रद्धालुओं को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए महिला घाट की सफाई के बाद चद्दर पुल तक अभियान का विस्तार स्थानीय लोगों के लिए महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

नदी की स्वच्छता का सीधा संबंध धार्मिक आयोजनों, स्थानीय पर्यावरण और आम नागरिकों की जरूरतों से जुड़ा है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here