मध्य प्रदेश की राजनीति में डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली सरकार दिसंबर 2026 में अपने तीन साल का कार्यकाल पूरा करने जा रही है। मुख्यमंत्री के रूप में 13 दिसंबर 2023 को शपथ लेने के बाद डॉ. यादव ने प्रदेश की सत्ता संभाली थी। अब तीन साल पूरे होने से पहले सरकार के कामकाज, प्राथमिकताओं, योजनाओं और आने वाले वर्षों की तैयारियों पर चर्चा तेज हो गई है। The Statesman+1
‘मेहनत इतनी खामोशी से करो कि सफलता शोर मचा दे’ यह कहावत मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की कार्यशैली के संदर्भ में भी चर्चा में रहती है। हालांकि, किसी भी सरकार की वास्तविक सफलता का आकलन केवल घोषणाओं या उपलब्धियों के प्रचार से नहीं, बल्कि योजनाओं के जमीन पर पहुंचने और आम लोगों के जीवन में आए बदलाव से होता है। मोहन यादव सरकार के तीन वर्षों की यात्रा को देखें तो महिला सशक्तिकरण, औद्योगिक निवेश, किसान कल्याण और युवा विकास चार प्रमुख प्राथमिकताओं के रूप में सामने आते हैं।
पहला वर्ष महिलाओं के सशक्तिकरण को समर्पित
मोहन यादव सरकार ने अपने पहले वर्ष यानी 2024 को महिला सशक्तिकरण और महिला कल्याण की प्राथमिकताओं से जोड़कर देखा। मध्य प्रदेश में पहले से संचालित लाड़ली बहना योजना इस दिशा में सरकार की प्रमुख योजनाओं में शामिल रही। इस योजना के माध्यम से पात्र महिलाओं को हर महीने आर्थिक सहायता दी जाती है।
सरकार ने योजना की मासिक सहायता राशि बढ़ाकर 1,500 रुपये की। इससे महिलाओं को घरेलू खर्च, छोटी जरूरतों और व्यक्तिगत आर्थिक फैसलों में सहायता मिलने का उद्देश्य रखा गया। इसके अलावा लाड़ली लक्ष्मी योजना, महिला स्व-सहायता समूहों और आजीविका से जुड़ी गतिविधियों को भी महिला कल्याण के व्यापक एजेंडे में शामिल किया गया।
महिलाओं को केवल आर्थिक सहायता देने तक सीमित न रखते हुए उन्हें रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने पर भी जोर दिया गया। ग्रामीण क्षेत्रों में स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिलाएं खाद्य प्रसंस्करण, छोटे उद्योग, कृषि गतिविधियों और स्थानीय उत्पादों के कारोबार में भागीदारी कर रही हैं।
दूसरा वर्ष उद्योग और निवेश के नाम रहा
सरकार ने वर्ष 2025 को औद्योगिक विकास और निवेश को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण माना। मध्य प्रदेश में उद्योगों की स्थापना, नए निवेश आकर्षित करने और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर तैयार करने पर विशेष ध्यान दिया गया।
इस दौरान सरकार ने प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में निवेश संबंधी कार्यक्रम आयोजित किए। क्षेत्रीय निवेश सम्मेलन और उद्योग जगत के साथ संवाद के माध्यम से निवेशकों को मध्य प्रदेश में कारोबार स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
सरकार का उद्देश्य केवल बड़े निवेश प्रस्ताव हासिल करना नहीं, बल्कि उन्हें वास्तविक औद्योगिक परियोजनाओं में बदलना भी रहा। इसके लिए औद्योगिक क्षेत्रों, बुनियादी सुविधाओं, सड़क संपर्क, बिजली और निवेशकों के लिए अनुकूल व्यवस्था पर जोर दिया गया।
कपड़ा उद्योग, खाद्य प्रसंस्करण, विनिर्माण और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं को आगे बढ़ाने के प्रयास किए गए। उद्योगों के विस्तार से स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ाने और छोटे कारोबारों को भी लाभ पहुंचाने की उम्मीद है।
तीसरा वर्ष किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण
मोहन यादव सरकार ने वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में समर्पित किया है। मध्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था में कृषि की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए यह प्राथमिकता विशेष महत्व रखती है। प्रदेश में बड़ी संख्या में परिवार खेती और उससे जुड़ी गतिविधियों पर निर्भर हैं।
सरकार का उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाने, खेती को लाभकारी बनाने, आधुनिक तकनीकों को प्रोत्साहित करने और कृषि आधारित उद्योगों का विस्तार करने पर केंद्रित है। इसके लिए कृषि के साथ उद्यानिकी, पशुपालन, डेयरी, मत्स्य पालन और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों को भी विकास की योजना में शामिल किया गया है।
मुख्यमंत्री की योजना के अनुसार, कृषि क्षेत्र को केवल फसल उत्पादन तक सीमित नहीं रखा जाना है। किसानों को उत्पादन के साथ प्रसंस्करण, भंडारण, बाजार और बेहतर मूल्य प्राप्त करने के अवसर उपलब्ध कराने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
चौथा वर्ष युवाओं के नाम, रोजगार और शिक्षा पर जोर
सरकार ने आने वाले वर्ष 2027 को युवा वर्ष घोषित किया है। इसके साथ ही युवाओं की शिक्षा, रोजगार, कौशल विकास, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और स्टार्टअप को प्रोत्साहित करने की योजनाओं पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
अक्टूबर 2026 में भोपाल में आयोजित मुख्यमंत्री युवा सम्मेलन के दौरान डॉ. मोहन यादव ने युवा वर्ष को लेकर कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की थीं। इनमें प्रदेश में 12 नए मेडिकल कॉलेज और 12 नए विश्वविद्यालय स्थापित करने की योजना शामिल है।
इसके अलावा मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं की संख्या बढ़ाकर साल में दो करने की व्यवस्था लाने की बात कही गई। सरकार का उद्देश्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को अधिक अवसर उपलब्ध कराना है।
कौशल विकास कार्यक्रम के तहत एक लाख युवाओं को जोड़ने की घोषणा भी की गई। सरकारी कॉलेजों में प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मुफ्त कोचिंग, कैंपस प्लेसमेंट को मजबूत करने और रोजगार से संबंधित प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की योजनाएं भी सामने रखी गई हैं।
उपलब्धियों के साथ चुनौतियों पर भी रहेगी नजर
मोहन यादव सरकार के तीन वर्षों की यात्रा में चार अलग-अलग विकास प्राथमिकताएं दिखाई देती हैं। पहले वर्ष महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने पर जोर रहा, दूसरे वर्ष उद्योग और निवेश को आगे बढ़ाने की कोशिश हुई, तीसरे वर्ष कृषि और किसान कल्याण को प्राथमिकता दी गई और चौथे वर्ष युवाओं के विकास का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
इसके बावजूद सरकार के सामने कई चुनौतियां हैं। किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना, सिंचाई सुविधाओं का वास्तविक विस्तार करना, उद्योगों में निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारना और युवाओं को गुणवत्तापूर्ण रोजगार उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण विषय रहेंगे।
इसी तरह महिला कल्याण योजनाओं का लाभ पात्र महिलाओं तक लगातार पहुंचाना और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्थायी रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना भी जरूरी होगा।
कुल मिलाकर, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली मध्य प्रदेश सरकार के तीन साल केवल कार्यकाल पूरा होने का अवसर नहीं हैं, बल्कि प्रदेश की विकास प्राथमिकताओं की समीक्षा का भी समय है। महिला कल्याण से शुरू हुई यह यात्रा उद्योग, कृषि और अब युवा विकास तक पहुंच चुकी है। आने वाले समय में इन योजनाओं का वास्तविक परिणाम इस बात से तय होगा कि कितनी घोषणाएं जमीन पर उतरती हैं और उनका लाभ प्रदेश के आम नागरिकों, किसानों, महिलाओं और युवाओं तक किस स्तर पर पहुंचता है।





