छत्तीसगढ़ में मुरासु तूफान के असर से बदला मौसम, पखांजूर में 80 मिमी बारिश; सुकमा और कोंटा में भी झमाझम बरसात

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छत्तीसगढ़ में मौसम ने एक बार फिर करवट ली है। प्रदेश के दक्षिणी हिस्से में पिछले 24 घंटों के दौरान कई स्थानों पर अच्छी बारिश दर्ज की गई है। मुरासु तूफान के बचे हुए प्रभाव के कारण तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के आसपास बने कम दबाव के क्षेत्र का असर छत्तीसगढ़ तक पहुंच रहा है। इसके चलते दक्षिण छत्तीसगढ़ के कई इलाकों में बादल सक्रिय हैं और बारिश हो रही है। पखांजूर में सबसे ज्यादा 80 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि सुकमा और कोंटा में भी अच्छी बरसात हुई है। मौसम में आए इस बदलाव के बीच राजधानी रायपुर में भी आसमान में बादल छाए रहने का अनुमान है।

दक्षिण छत्तीसगढ़ में हुई बारिश ने मौसम का मिजाज बदल दिया है। पिछले 24 घंटे के आंकड़ों के मुताबिक, पखांजूर में सबसे अधिक 80 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई। वहीं सुकमा में करीब 7 सेंटीमीटर और कोंटा में 5 सेंटीमीटर पानी गिरा है। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि बारिश का प्रभाव मुख्य रूप से प्रदेश के दक्षिणी क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है। कई इलाकों में बादलों की सक्रियता के कारण मौसम में बदलाव दर्ज किया गया है।

पखांजूर में सबसे ज्यादा 80 मिमी बारिश

दक्षिण छत्तीसगढ़ के पखांजूर में पिछले 24 घंटे के दौरान 80 मिलीमीटर बारिश दर्ज होना इस मौसम गतिविधि का प्रमुख आंकड़ा है। 80 मिमी बारिश का मतलब है कि एक वर्ग मीटर क्षेत्र में लगभग 80 लीटर पानी बरसा है। इतनी बारिश से स्थानीय स्तर पर सड़कों, निचले इलाकों और खुले स्थानों पर पानी जमा होने की स्थिति बन सकती है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में किसी बड़े जलभराव या नुकसान की पुष्टि नहीं की गई है।

पखांजूर में हुई बारिश के साथ आसपास के क्षेत्रों में भी मौसम की गतिविधियां बनी हुई हैं। लगातार बादल रहने और बारिश होने से तापमान में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में इसका असर खेती-किसानी और दैनिक गतिविधियों पर भी पड़ सकता है। विशेष रूप से खेतों में काम करने वाले किसानों को मौसम की स्थिति के अनुसार अपनी गतिविधियों की योजना बनानी पड़ सकती है।

सुकमा में 7 सेंटीमीटर, कोंटा में 5 सेंटीमीटर बारिश

पखांजूर के अलावा सुकमा और कोंटा में भी अच्छी बारिश दर्ज की गई है। सुकमा में पिछले 24 घंटों में करीब 7 सेंटीमीटर पानी गिरा है। वहीं कोंटा में 5 सेंटीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई है। दोनों क्षेत्रों में हुई बारिश दक्षिण छत्तीसगढ़ में सक्रिय मौसम प्रणाली के प्रभाव को दर्शाती है।

सुकमा और कोंटा जैसे क्षेत्रों में बारिश का असर ग्रामीण आवागमन, स्थानीय सड़कों और सामान्य जनजीवन पर पड़ सकता है। यदि बारिश लगातार जारी रहती है तो निचले इलाकों में पानी भरने की आशंका भी रहती है। ऐसे में लोगों को स्थानीय मौसम की जानकारी पर नजर रखने की जरूरत है।

हालांकि, फिलहाल उपलब्ध बारिश के आंकड़ों में किसी बड़े नुकसान, बाढ़ या जनजीवन प्रभावित होने की आधिकारिक जानकारी शामिल नहीं है। इसलिए बारिश के आंकड़ों और वास्तविक नुकसान की स्थिति को अलग-अलग समझना जरूरी है।

मुरासु तूफान के बचे हुए हिस्से से बन रहा कम दबाव

मौसम में आए इस बदलाव के पीछे मुरासु तूफान का बचा हुआ प्रभाव बताया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के आसपास कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ है। यह मौसम प्रणाली मुरासु तूफान के अवशेष के रूप में सक्रिय है और धीरे-धीरे उत्तर दिशा की ओर बढ़ रही है।

कम दबाव का क्षेत्र बनने पर संबंधित इलाके में हवा का दबाव आसपास के क्षेत्रों की तुलना में कम हो जाता है। ऐसी परिस्थितियों में आसपास की नम हवाएं उस क्षेत्र की ओर बढ़ती हैं। वातावरण में पर्याप्त नमी और अनुकूल परिस्थितियां मिलने पर बादलों का निर्माण होता है और बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं।

इसी मौसम प्रणाली के प्रभाव से तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के साथ छत्तीसगढ़ के दक्षिणी हिस्सों में भी बारिश देखने को मिल रही है। पखांजूर, सुकमा और कोंटा में दर्ज बारिश को इसी मौसमी गतिविधि से जोड़कर देखा जा रहा है।

रायपुर में बादल छाए रहने का अनुमान

दक्षिण छत्तीसगढ़ में बारिश के बीच राजधानी रायपुर के मौसम को लेकर भी पूर्वानुमान जारी किया गया है। रायपुर में आज आसमान में बादल छाए रहने की संभावना है। हालांकि, राजधानी के लिए भारी बारिश का कोई विशेष आंकड़ा उपलब्ध नहीं कराया गया है। मौसम के अनुमान के मुताबिक, यहां अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है, जबकि न्यूनतम तापमान करीब 23 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है।

बादलों की मौजूदगी के कारण दिन के समय तेज धूप से कुछ राहत मिल सकती है। वहीं रात के तापमान में भी मौसम की परिस्थितियों के अनुसार बदलाव देखने को मिल सकता है। राजधानी में रहने वाले लोगों को दिनभर बादलों और तापमान में होने वाले उतार-चढ़ाव का अनुभव हो सकता है।

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