सीहोर की 542 ग्राम पंचायतों में अवैध शराब पर प्रशासन सख्त, सरपंच-सचिवों को सौंपी गई सूचना देने की जिम्मेदारी

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सीहोर। मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में अवैध शराब के कारोबार पर रोक लगाने के लिए जिला प्रशासन ने नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी की है। जिले की सभी 542 ग्राम पंचायतों में सरपंच और पंचायत सचिवों को अपने-अपने गांवों में अवैध शराब की गतिविधियों पर नजर रखने और इसकी जानकारी तत्काल आबकारी विभाग तक पहुंचाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। कलेक्टर बालागुरु के. ने जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) और सभी अनुविभागीय अधिकारियों (SDM) को इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं।

प्रशासन का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में चोरी-छिपे होने वाली शराब की बिक्री, अवैध भंडारण, परिवहन और वितरण पर प्रभावी नियंत्रण करना है। निर्देशों के अनुसार, गांवों में यदि अधिकृत शराब दुकानों के अलावा किसी अन्य स्थान पर शराब बेचे जाने की जानकारी मिलती है, तो पंचायत प्रतिनिधियों को इसकी सूचना आबकारी विभाग को देनी होगी। इसमें फेरी लगाकर शराब बेचने, एजेंटों के माध्यम से बिक्री करने और डायरी सिस्टम के जरिए चलने वाले कारोबार की जानकारी भी शामिल है।

542 ग्राम पंचायतों में निगरानी की व्यवस्था

सीहोर जिले में कुल 542 ग्राम पंचायतें हैं। प्रशासन चाहता है कि अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई केवल आबकारी विभाग की छापामार कार्रवाई तक सीमित न रहे, बल्कि गांव स्तर पर भी सूचना जुटाने की व्यवस्था मजबूत हो। सरपंच और पंचायत सचिव स्थानीय स्तर पर लोगों और गतिविधियों से परिचित होते हैं। ऐसे में उनके माध्यम से अवैध बिक्री से जुड़ी सूचनाएं समय पर संबंधित विभाग तक पहुंच सकती हैं।

कलेक्टर बालागुरु के. ने जिला पंचायत CEO और सभी SDM को निर्देश दिए हैं कि वे अपने क्षेत्र की ग्राम पंचायतों तक यह व्यवस्था पहुंचाएं। पंचायत प्रतिनिधियों को अपने क्षेत्र में अवैध शराब की बिक्री या अन्य संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी मिलने पर तत्काल आबकारी विभाग को सूचित करना होगा।

यह व्यवस्था खास तौर पर उन मामलों को ध्यान में रखकर बनाई गई है, जिनमें शराब की बिक्री किसी दुकान या स्थायी ठिकाने से नहीं होती। कई बार गांवों में फेरी लगाकर, परिचित एजेंटों के जरिए या उधार-लेनदेन का हिसाब डायरी में दर्ज करके शराब बेचने की शिकायतें सामने आती हैं। प्रशासन ऐसे तरीकों पर भी नजर रखना चाहता है।

फेरी, एजेंट और डायरी सिस्टम पर विशेष नजर

प्रशासन के निर्देशों में अवैध शराब कारोबार के अलग-अलग तरीकों का उल्लेख किया गया है। इनमें चोरी-छिपे बिक्री, घरों या अन्य स्थानों पर शराब रखना, फेरी लगाकर गांवों में शराब पहुंचाना और एजेंटों के माध्यम से ग्राहकों तक शराब उपलब्ध कराना शामिल है।

डायरी सिस्टम के जरिए होने वाली बिक्री भी निगरानी के दायरे में रहेगी। इस तरह के मामलों में बिक्री और भुगतान का हिसाब कथित तौर पर डायरी में दर्ज किया जाता है। प्रशासन का प्रयास है कि ऐसी गतिविधियों की जानकारी सामने आने पर आबकारी विभाग समय रहते जांच कर सके।

हालांकि, सरपंच और पंचायत सचिवों को इस व्यवस्था में सूचना देने की जिम्मेदारी दी गई है। इसका अर्थ यह नहीं है कि वे स्वयं किसी के घर या परिसर में छापा मारेंगे अथवा शराब जब्त करने जैसी कार्रवाई करेंगे। अवैध शराब के मामलों में जांच, जब्ती और कानूनी कार्रवाई संबंधित अधिकृत विभाग और अधिकारियों के अधिकार क्षेत्र में ही रहेगी।

हालिया घटनाओं के बाद प्रशासन का सख्त रुख

ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध शराब के कारोबार को लेकर प्रशासन की चिंता बढ़ी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, खातेगांव में शराब कारोबार से जुड़े लोगों द्वारा थाना प्रभारी की हत्या की घटना के बाद अवैध शराब के नेटवर्क पर सख्ती करने की जरूरत महसूस की गई। इसी पृष्ठभूमि में सीहोर जिले में भी ग्रामीण स्तर पर निगरानी बढ़ाने की पहल की गई है।

इसके अलावा देवास जिले में जहरीली शराब से जुड़ी घटना के बाद सीहोर आबकारी विभाग ने भी विशेष अभियान चलाकर कार्रवाई की। अमर उजाला की 2 नवंबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, जिले में अलग-अलग स्थानों पर कार्रवाई करते हुए नौ प्रकरण दर्ज किए गए थे। इस दौरान 30 लीटर हाथ भट्टी की कच्ची शराब, 690 किलोग्राम महुआ लाहन और अन्य मदिरा जब्त की गई थी। जब्त सामग्री का अनुमानित बाजार मूल्य 80,390 रुपये बताया गया था। Madhya Pradesh News

इसके बाद 3 नवंबर को प्रकाशित एक अन्य स्थानीय रिपोर्ट में आबकारी विभाग की सात कार्रवाइयों और 1 लाख 33 हजार 440 रुपये मूल्य की अवैध शराब तथा महुआ लाहन

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