भोपाल: मध्य प्रदेश में ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति के स्वामित्व से जुड़े दस्तावेजों को व्यवस्थित करने और रजिस्ट्री की प्रक्रिया को गति देने के उद्देश्य से धनतेरस के अवसर पर विशेष अभियान चलाया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर 6 नवंबर 2026 को प्रदेश के मंत्री, सांसद और विधायक अपने-अपने क्षेत्रों के गांवों में पहुंचेंगे। इस दौरान जनप्रतिनिधि स्वामित्व की रजिस्ट्री प्रक्रिया को अपनी मौजूदगी में पूरा कराने का प्रयास करेंगे। राज्य सरकार का उद्देश्य मुख्यमंत्री रजिस्ट्री योजना के तहत गांवों में शत-प्रतिशत रजिस्ट्री सुनिश्चित करना है।

इस अभियान को लेकर मुख्यमंत्री ने सभी जिलों के कलेक्टरों को आवश्यक निर्देश दिए हैं। उनसे कहा गया है कि वे धनतेरस के दिन अपने जिले के अधिक से अधिक गांवों में स्थानीय सांसदों और विधायकों के साथ पहुंचें तथा रजिस्ट्री से संबंधित कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराएं। सरकार चाहती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में पात्र लोगों को उनकी संपत्ति के स्वामित्व से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में तेजी आए।
पैतृक गांव या पसंद के गांव में पहुंचेंगे जनप्रतिनिधि
मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुसार प्रदेश के मंत्री, सांसद और विधायक अपने पैतृक गांव या अपनी पसंद के किसी अन्य गांव में जाकर इस अभियान में भाग लेंगे। जनप्रतिनिधि केवल औपचारिक उपस्थिति दर्ज नहीं कराएंगे, बल्कि रजिस्ट्री की प्रक्रिया को अपने सामने पूरा कराने में भी भूमिका निभाएंगे।
इस पहल के तहत गांवों में प्रशासनिक अधिकारियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में रजिस्ट्री संबंधी कार्य किए जाएंगे। इससे ग्रामीणों को सरकारी प्रक्रिया के बारे में जानकारी मिल सकेगी और संपत्ति के दस्तावेज तैयार कराने में आने वाली व्यावहारिक समस्याओं पर भी ध्यान दिया जा सकेगा।
सरकार की मंशा है कि जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वामित्व से संबंधित कामों को गति मिले। कई बार ग्रामीणों को यह जानकारी नहीं होती कि संपत्ति की रजिस्ट्री के लिए कौन-कौन से दस्तावेज जरूरी हैं और प्रक्रिया किस विभाग के माध्यम से पूरी होती है। ऐसे में स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी लोगों के लिए मददगार हो सकती है।
मुख्यमंत्री ने कलेक्टरों को दिए विशेष निर्देश
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश के सभी जिलों के कलेक्टरों को निर्देशित किया है कि वे इस अभियान को प्रभावी तरीके से संचालित करें। कलेक्टरों को स्थानीय सांसदों और विधायकों के साथ गांवों में पहुंचकर अधिक से अधिक रजिस्ट्री कराने पर ध्यान देने को कहा गया है।
जिला प्रशासन की जिम्मेदारी होगी कि अभियान के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं। संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के माध्यम से रजिस्ट्री की प्रक्रिया को व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ाया जाएगा। इसके साथ ही ग्रामीणों को उनके स्वामित्व से जुड़े दस्तावेजों और आवश्यक औपचारिकताओं के संबंध में जानकारी देने पर भी ध्यान दिया जा सकता है।
इस तरह के अभियान में राजस्व और पंजीयन से जुड़े विभागों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। दस्तावेजों का सत्यापन, संपत्ति की पहचान, संबंधित रिकॉर्ड की जांच और निर्धारित प्रक्रिया का पालन जैसे कार्य रजिस्ट्री को पूरा करने के लिए जरूरी होते हैं। प्रशासनिक स्तर पर इन व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने से अभियान के संचालन में सहायता मिल सकती है।




