रायपुर। राजनीतिक विवाद और सोशल मीडिया पर बयानबाजी तेज हो गई है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के भाषणों से जुड़े वीडियो सामने आने के बाद कांग्रेस ने भाजपा पर निशाना साधना शुरू कर दिया है। कांग्रेस नेताओं ने इन वीडियो को सोशल मीडिया पर साझा करते हुए भाजपा के अभियान और उसके नेताओं के बयानों पर सवाल उठाए हैं। इस राजनीतिक खींचतान में पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस महासचिव भूपेश बघेल भी शामिल हो गए हैं।

भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दो वीडियो साझा किए। इनमें एक वीडियो मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में 4 नवंबर को आयोजित कार्यक्रम का बताया गया है। इसमें मुख्यमंत्री मोहन यादव भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की मौजूदगी में नारे लगाते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो के एक हिस्से में उनके मुंह से ‘जेपी नड्डा मुर्दाबाद’ निकलता सुनाई देता है। हालांकि, उन्होंने तुरंत अपनी बात सुधारते हुए ‘जेपी नड्डा जिंदाबाद’ का नारा लगाया। इस घटना को लेकर कांग्रेस ने भाजपा नेताओं पर तंज कसना शुरू कर दिया है।
भोपाल के कार्यक्रम का वीडियो चर्चा में
भोपाल में 4 नवंबर को आयोजित भाजपा के कार्यक्रम में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी रही। इसी कार्यक्रम का एक वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। वीडियो में मुख्यमंत्री मोहन यादव नारे लगाते हुए दिखाई देते हैं। इसी दौरान उनके मुंह से जेपी नड्डा के नाम के साथ ‘मुर्दाबाद’ शब्द निकल जाता है। हालांकि, यह गलती तुरंत सुधार ली गई और उन्होंने ‘जिंदाबाद’ का नारा लगाया।
इस वीडियो को कांग्रेस ने राजनीतिक मुद्दा बना लिया है। विपक्षी नेताओं का जोर इस बात पर है कि भाजपा के कार्यक्रम में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के सामने ही इस तरह की जुबानी चूक हुई। वीडियो के प्रसार के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री मोहन यादव ने तत्काल नारे को सुधार दिया था। इसलिए इस घटना को उनके द्वारा जानबूझकर लगाए गए नारे के रूप में प्रस्तुत करना सही नहीं होगा।
विष्णु देव साय के बयान वाला वीडियो भी साझा
भूपेश बघेल ने एक अन्य वीडियो भी साझा किया, जिसमें छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का बयान सुनाई दे रहा है। वीडियो में साय कहते हुए सुनाई देते हैं कि कांग्रेस को छोड़कर भाजपा और उसके सहयोगी दलों की दुकान बंद होने जा रही है। इस बयान के शब्दों और संदर्भ को लेकर भी राजनीतिक चर्चा शुरू हो गई है।
भूपेश बघेल ने दोनों वीडियो को एक साथ राजनीतिक संदेश के तौर पर इस्तेमाल किया। उन्होंने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि राहुल गांधी के सामने सबकी ‘लाइन और लेंथ’ बिगड़ गई है। इस टिप्पणी के जरिए उन्होंने भाजपा नेताओं के भाषणों और कार्यक्रम के दौरान हुई जुबानी चूकों पर व्यंग्य किया।
बघेल की पोस्ट का मकसद भाजपा के अभियान के दौरान नेताओं के बयानों को लेकर विपक्ष की प्रतिक्रिया सामने रखना था। उनके साझा किए गए वीडियो के बाद कांग्रेस समर्थकों ने भी सोशल मीडिया पर भाजपा नेताओं को निशाने पर लेना शुरू कर दिया। वहीं, भाजपा समर्थकों की ओर से इन घटनाओं को भाषण के दौरान हुई सामान्य जुबानी चूक के रूप में देखा जा सकता है।
कांग्रेस को मिला भाजपा पर हमला करने का मौका
भाजपा के ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान के बीच सामने आए इन वीडियो ने कांग्रेस को पलटवार का अवसर दे दिया है। कांग्रेस इस अभियान और भाजपा की राजनीतिक रणनीति पर सवाल उठाती रही है। अब नेताओं के भाषणों से जुड़े वीडियो को साझा कर पार्टी ने भाजपा के कार्यक्रमों में हुई घटनाओं को राजनीतिक बहस का हिस्सा बना दिया है।
भूपेश बघेल की टिप्पणी खास तौर पर इसलिए चर्चा में है, क्योंकि उन्होंने दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों से जुड़े वीडियो को एक साथ साझा किया। एक वीडियो में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव की जुबान फिसलने का मामला है, जबकि दूसरे में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का बयान है। इन दोनों घटनाओं को जोड़कर कांग्रेस ने भाजपा नेतृत्व और उसके अभियान पर कटाक्ष किया।
‘लाइन और लेंथ’ वाली टिप्पणी से साधा निशाना
भूपेश बघेल ने अपनी पोस्ट में राहुल गांधी का उल्लेख करते हुए लिखा कि उनके सामने सबकी लाइन और लेंथ बिगड़ गई है। क्रिकेट की भाषा में इस्तेमाल होने वाले इस मुहावरे के जरिए बघेल ने भाजपा नेताओं के बयानों पर व्यंग्य किया। उनकी टिप्पणी को भाजपा के अभियान के दौरान हुई घटनाओं पर कांग्रेस के राजनीतिक हमले के रूप में देखा जा रहा है।
बघेल की पोस्ट के बाद इस मामले ने मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की राजनीति में भी चर्चा बढ़ा दी। दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों से जुड़े वीडियो होने के कारण यह विवाद केवल एक राज्य तक सीमित नहीं रहा। कांग्रेस ने इसे भाजपा के राजनीतिक अभियान के बीच नेताओं की भाषण शैली और संवाद को लेकर सवाल उठाने के अवसर के तौर पर इस्तेमाल किया।
सोशल मीडिया पर बढ़ी राजनीतिक बयानबाजी
वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भाजपा और कांग्रेस समर्थकों के बीच बहस तेज होने की संभावना है। कांग्रेस ने जहां इसे भाजपा के नेताओं पर तंज कसने का आधार बनाया है, वहीं भाजपा की ओर से इन घटनाओं को किस तरह देखा जाता है, यह राजनीतिक प्रतिक्रिया का विषय है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में भाजपा नेतृत्व की ओर से इन वीडियो पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
यह घटनाक्रम बताता है कि राजनीतिक अभियानों के दौरान नेताओं के भाषण और नारेबाजी कितनी बारीकी से देखे जाते हैं। सार्वजनिक कार्यक्रमों में कही गई एक छोटी-सी बात भी बाद में राजनीतिक बहस का केंद्र बन सकती है। सोशल मीडिया पर वीडियो के प्रसार से उसका प्रभाव और बढ़ जाता है।
फिलहाल ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान के दौरान सामने आए इन वीडियो को लेकर कांग्रेस भाजपा पर निशाना साध रही है। भूपेश बघेल की पोस्ट ने इस विवाद को और चर्चा में ला दिया है। अब देखना होगा कि भाजपा इन घटनाओं पर कोई प्रतिक्रिया देती है या कांग्रेस आगे भी इन वीडियो के जरिए राजनीतिक हमला जारी रखती है।




