विदिशा। विदिशा जिले के गंजबासौदा में दीपावली के मौके पर नए बस स्टैंड स्थित पटाखा बाजार में गुरुवार रात भीषण आग लगने से बड़ा हादसा हो गया। आग की चपेट में आकर पटाखों की आठ दुकानें पूरी तरह जल गईं। इसके अलावा छह मोटरसाइकिल और एक कार भी आग की चपेट में आकर क्षतिग्रस्त हो गईं। प्रारंभिक अनुमान के मुताबिक इस हादसे में 25 से 30 लाख रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। घटना के बाद नगर पालिका की अग्निशमन व्यवस्था और पटाखा बाजार में सुरक्षा इंतजामों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
दीपावली जैसे बड़े त्योहार के ठीक मौके पर हुई इस घटना ने व्यापारियों और स्थानीय लोगों को झकझोर दिया। जिस बाजार में त्योहार के चलते ग्राहकों की भीड़ और कारोबार की रौनक होनी चाहिए थी, वहां कुछ ही देर में आग, धुएं और पटाखों के धमाकों से दहशत का माहौल बन गया। आग इतनी तेजी से फैली कि दुकानदारों को अपना सामान बचाने तक का पर्याप्त मौका नहीं मिल पाया।
शाम 6:30 बजे श्रीरामलीला मंच के पीछे लगी आग
जानकारी के अनुसार गुरुवार शाम करीब 6:30 बजे नए बस स्टैंड स्थित पटाखा बाजार में श्रीरामलीला मंच के पीछे लगी दुकानों में अचानक आग लग गई। शुरुआत में आग लगने का कारण स्पष्ट नहीं हो सका, लेकिन कुछ ही समय में आग ने आसपास की दुकानों को अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया।
पटाखों की दुकानों में बड़ी मात्रा में आतिशबाजी का सामान रखा होने के कारण आग तेजी से फैलती चली गई। आग के संपर्क में आते ही पटाखों में तेज धमाके होने लगे। लगातार हो रहे धमाकों की आवाज से पूरा इलाका दहल उठा। बाजार में मौजूद लोगों को संभलने का मौका भी नहीं मिला और वहां भगदड़ तथा अफरा-तफरी की स्थिति बन गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आग और पटाखों के धमाकों के कारण लोगों में भय का माहौल पैदा हो गया। दुकानदारों और आसपास मौजूद लोगों ने अपनी जान बचाने के लिए सुरक्षित स्थानों की ओर भागना शुरू कर दिया। इस दौरान बाजार में कुछ समय के लिए पूरी तरह अव्यवस्था का माहौल रहा।
आठ दुकानें जलकर हुईं खाक, वाहन भी आग की चपेट में आए
आग की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि देखते ही देखते पटाखा बाजार की आठ दुकानें जलकर खाक हो गईं। दुकानों में रखे पटाखे और अन्य सामान आग में नष्ट हो गए। त्योहार के लिए व्यापारियों ने बड़ी मात्रा में आतिशबाजी का स्टॉक जमा किया हुआ था। ऐसे में आग से उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
इस हादसे में केवल पटाखा दुकानें ही प्रभावित नहीं हुईं, बल्कि आसपास खड़े वाहन भी आग की चपेट में आ गए। जानकारी के मुताबिक छह मोटरसाइकिल और एक कार आग से क्षतिग्रस्त हो गईं। दुकानों और वाहनों को हुए नुकसान को मिलाकर प्रारंभिक अनुमान 25 से 30 लाख रुपये से अधिक बताया जा रहा है।
हालांकि वास्तविक नुकसान का आकलन संबंधित अधिकारियों और प्रभावित व्यापारियों द्वारा जांच तथा निरीक्षण के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। जिन दुकानदारों की दुकानें पूरी तरह जल गईं, उनके सामने अब त्योहार के समय हुए इस आर्थिक नुकसान से उबरने की चुनौती खड़ी हो गई है।
आधे घंटे बाद पहुंचीं दमकलें, तब तक जल चुकी थीं आठ दुकानें

इस हादसे में सबसे ज्यादा सवाल नगर पालिका की अग्निशमन व्यवस्था को लेकर उठ रहे हैं। जानकारी के अनुसार नगर पालिका के पास चार फायर ब्रिगेड होने के बावजूद घटना के समय पटाखा बाजार में एक भी दमकल मौजूद नहीं थी।
आग लगने की सूचना मिलने के बाद दमकल वाहनों को मौके पर पहुंचने में करीब आधा घंटा लग गया। इस दौरान आग लगातार फैलती रही और पटाखों के धमाकों के कारण स्थिति और गंभीर होती गई। जब तक दमकल की गाड़ियां घटनास्थल पर पहुंचीं, तब तक आठ दुकानें आग की चपेट में आकर जल चुकी थीं।
यदि बाजार के पास पहले से दमकल की व्यवस्था होती या अग्निशमन वाहन तुरंत उपलब्ध हो जाते, तो आग पर शुरुआती स्तर पर नियंत्रण पाने की संभावना हो सकती थी। हालांकि आग की वास्तविक तीव्रता और उसके फैलने की गति को देखते हुए नुकसान कितना कम हो सकता था, यह जांच का विषय है।
त्योहारों के दौरान पटाखा बाजार में आग लगने का खतरा सामान्य बाजारों की तुलना में अधिक रहता है। ऐसे में दमकल की उपलब्धता, पानी की व्यवस्था और आपातकालीन प्रतिक्रिया समय बेहद महत्वपूर्ण होते हैं।
किराया 800 से बढ़ाकर 1200 रुपये, फिर भी सुरक्षा इंतजामों पर सवाल
घटना के बाद नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार नगर पालिका द्वारा पटाखा दुकानों का किराया 800 रुपये से बढ़ाकर 1200 रुपये कर दिया गया था। यानी दुकानदारों से पहले की तुलना में अधिक किराया लिया जा रहा था।
लेकिन व्यापारियों और स्थानीय स्तर पर उठ रहे सवालों का मुख्य विषय यह है कि किराया बढ़ाने के बावजूद बाजार में पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम क्यों नहीं किए गए थे। पटाखों जैसी ज्वलनशील सामग्री की बिक्री के लिए बनाए गए अस्थायी बाजार में अग्निशमन व्यवस्था को प्राथमिकता दी जानी चाहिए थी।
ऐसे बाजारों में आग बुझाने के उपकरण, पानी के पर्याप्त स्रोत, बिजली की सुरक्षित वायरिंग, आपातकालीन रास्ते और दमकल वाहनों की तत्काल उपलब्धता जरूरी मानी जाती है। खासकर दीपावली के समय जब दुकानों में पटाखों का स्टॉक अधिक होता है, तब प्रशासन को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी चाहिए।




