जम्मू-कश्मीर की राजनीति में नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के भीतर चल रहा असंतोष कैबिनेट फेरबदल के बाद भी थमने का नाम नहीं ले रहा है। मंत्रिमंडल में किए गए बदलावों से नाराज पार्टी के 15 विधायक और एक निर्दलीय विधायक अपनी शिकायतें लेकर एक बार फिर श्रीनगर पहुंचे। नाराज विधायकों की पार्टी नेतृत्व के साथ यह चौथी मुलाकात बताई जा रही है। इस घटनाक्रम ने जम्मू-कश्मीर की सियासत में नई चर्चा छेड़ दी है कि क्या मंत्रिमंडल में आगे और बदलाव किए जा सकते हैं या नाराज विधायकों को मनाने के लिए संगठन स्तर पर कोई बड़ा फैसला लिया जाएगा।
श्रीनगर में हुई बैठक के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने पार्टी में टूट की अटकलों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस कभी नहीं टूटेगी और पार्टी के भीतर चल रही टूट की खबरें बेबुनियाद हैं। फारूक अब्दुल्ला ने नाराज विधायकों की शिकायतें सुनने की बात स्वीकार करते हुए भरोसा दिलाया कि उनकी समस्याओं पर ध्यान दिया जाएगा। उनके मुताबिक, कुछ मांगों का समाधान तुरंत किया जा सकता है, जबकि कुछ मुद्दों को सुलझाने में समय लगेगा।
कैबिनेट फेरबदल के बाद क्यों नाराज हैं विधायक?
जम्मू-कश्मीर में कैबिनेट फेरबदल के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस के कुछ विधायकों में असंतोष सामने आया था। नाराज विधायकों की शिकायतें पार्टी के भीतर नेतृत्व और मंत्रिमंडल से जुड़े फैसलों को लेकर बताई जा रही हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में उनकी सभी मांगों और आपत्तियों का विस्तृत ब्योरा सामने नहीं आया है। इतना स्पष्ट है कि विधायक अपनी बात पार्टी के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचाना चाहते हैं और चाहते हैं कि उनकी शिकायतों पर ठोस कार्रवाई हो।
इस मुद्दे पर नाराज विधायकों की सक्रियता लगातार बनी हुई है। वे इससे पहले भी पार्टी नेतृत्व के सामने अपनी बात रख चुके हैं। अब चौथी बार श्रीनगर पहुंचकर उन्होंने संकेत दिया है कि उनकी नाराजगी अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। बार-बार बैठक होने के बावजूद विवाद का जारी रहना पार्टी के लिए एक चुनौती माना जा रहा है।
फारूक अब्दुल्ला ने सुनीं शिकायतें
नाराज विधायकों से मुलाकात के बाद फारूक अब्दुल्ला ने उनके असंतोष को गंभीरता से लेने की बात कही। उन्होंने कहा कि विधायकों की शिकायतें सुनी गई हैं और उन पर काम किया जाएगा। फारूक अब्दुल्ला ने कुछ मांगों को जायज भी बताया। उनका कहना था कि सभी समस्याओं का समाधान एक साथ संभव नहीं है, लेकिन जिन मामलों पर तत्काल फैसला लिया जा सकता है, उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी। अन्य मुद्दों पर धीरे-धीरे काम किया जाएगा।
फारूक अब्दुल्ला का यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि पार्टी के भीतर असंतोष और संभावित टूट की चर्चाएं लगातार सामने आ रही थीं। उनके बयान से नेतृत्व की ओर से नाराज विधायकों को भरोसा देने की कोशिश दिखाई देती है। उन्होंने साफ किया कि पार्टी में विभाजन की कोई स्थिति नहीं है और संगठन की एकता को लेकर फैल रही खबरों पर भरोसा नहीं किया जाना चाहिए।





