CM डॉ. मोहन यादव की PHE बैठक में दो टूक: ‘हवा में मत रहिए, अफसरों को भागीरथपुरा याद दिलाया’; जल निगम का नाम बदला, जानिए बड़े फैसले

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भोपाल डेस्क (drnewsindia.com) | मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) की समीक्षा बैठक में अफसरों को कड़े निर्देश दिए हैं। पेयजल आपूर्ति की समीक्षा करते हुए सीएम ने साफ कहा कि प्रदेश में पानी की कोई कमी नहीं होनी चाहिए।

बैठक के दौरान जब अधिकारी अपनी उपलब्धियां गिना रहे थे, तो सीएम ने उन्हें जमीन पर रहने की नसीहत दी। सीएम ने कहा, “ज्यादा हवा में मत रहिए, पेयजल के साथ सीवेज प्रबंधन की भी चिंता कीजिए। हम अभी कुछ समय पहले भागीरथपुरा की स्थिति देख चुके हैं। मैं जब इंदौर जाता हूं तो सीवेज की गंदगी देखकर शर्म आती है।”

आइए जानते हैं इस हाई-लेवल बैठक में लिए गए बड़े फैसले और जल जीवन मिशन की ताजा रिपोर्ट:

1. जल निगम का बदला नाम, अब सीवेज पर भी रहेगा फोकस

बैठक में मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि अब ‘जल निगम’ का नाम बदलकर ‘जल एवं सीवेज प्रबंधन निगम’ किया जाएगा। अब विभाग केवल पीने के पानी पर ही नहीं, बल्कि शहरों और गांवों में सीवेज मैनेजमेंट पर भी बराबर ध्यान देगा।

2. केंद्र से मिलेंगे ₹5000 करोड़, मार्च 2028 तक हर घर नल

  • मध्यप्रदेश को केंद्रीय जलशक्ति मंत्रालय से जल जीवन मिशन के तहत करीब 5 हजार करोड़ रुपए का फंड मिलने जा रहा है। केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने इसके लिए सहमति दे दी है।
  • इस राशि की मदद से मार्च 2028 से पहले मध्यप्रदेश के हर घर में ‘नल से जल’ पहुंचाने का लक्ष्य पूरा कर लिया जाएगा।
  • वर्ष 2026-27 के बजट में भी विभाग के लिए 5 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है और अब जल जीवन मिशन 2.0 की तैयारी शुरू हो चुकी है।

मध्यप्रदेश में जल जीवन मिशन की मौजूदा प्रगति (एक नजर में)

पैमानावर्तमान स्थिति (आंकड़े)
कुल कार्य पूरा80% प्रतिशत
शत-प्रतिशत (100%) काम वाले जिलेउज्जैन संभाग सहित 11 जिले
अब तक दिए गए कुल नल कनेक्शन1 करोड़ 11 लाख से अधिक परिवार (75%)
दिसंबर 2023 से अब तक नए कनेक्शन16.50 लाख से अधिक
नए नलकूप और हैंडपंप स्थापना15,238
‘हर घर जल’ घोषित गांव14,200 गांव

3. ‘केवल ट्यूबवेल पर निर्भर मत रहो, तालाब-सरोवर बनाओ’

सीएम डॉ. यादव ने कहा कि पीएचई विभाग केवल ट्यूबवेल खोदने पर निर्भर न रहे। जल संरक्षण और भूजल स्तर (Ground Water Level) को बढ़ाने के लिए तालाब, सरोवर निर्माण और वॉटर रिचार्जिंग पर विशेष फोकस किया जाए। इस काम में मैपकास्ट (MAPCAST) के वैज्ञानिकों की मदद ली जाएगी।

4. इंदौर-भोपाल मेट्रोपॉलिटिन रीजन के लिए बनेगा स्पेशल प्लान

इंदौर और भोपाल के बढ़ते दायरे को देखते हुए सीएम ने अधिकारियों से कहा कि भविष्य में पानी की जरूरतें बढ़ेंगी। इसके लिए अभी से ‘सरफेस वाटर मैनेजमेंट प्लान’ तैयार करें, ताकि पेयजल, उद्योगों और सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिल सके।

बैठक के अन्य महत्वपूर्ण और बड़े फैसले:

  • बोरवेल दुर्घटनाओं पर देश की पहली पॉलिसी: बोरवेल में बच्चों के गिरने की घटनाओं को रोकने के लिए मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य बना है जिसने बोरवेल अधिनियम बनाया है।
  • अक्टूबर 2026 में जल उत्सव: पानी बचाने और बेहतर काम करने वाली ग्राम पंचायतों को राज्य और जिला स्तर पर सम्मानित किया जाएगा। अक्टूबर 2026 में ‘जल उत्सव’ मनाया जाएगा।
  • लैब टेस्टिंग: पानी की शुद्धता जांचने के लिए प्रदेश की 155 प्रयोगशालाओं (Labs) को NABL प्रमाणन मिल चुका है।
  • विभागों का एकीकरण: काम को आसान बनाने के लिए सिविल, मैकेनिकल विंग और जल निगम को एक करने का सुझाव दिया गया है।

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