Hormuz Strait: हॉर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित निकला पहला भारतीय गैस टैंकर ‘दिशा’; अमेरिका-ईरान शांति समझौते का दिखने लगा असर

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drnewsindia.com

नई दिल्ली / मुंबई: पश्चिम एशिया (Middle East) में जारी भीषण युद्ध के बीच भारतीय व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा के मोर्चे पर एक बहुत बड़ी कामयाबी मिली है। अमेरिका और ईरान के बीच हुए ऐतिहासिक शांति समझौते (Ceasefire Deal) के बाद, भारत का पहला लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) टैंकर ‘दिशा’ (Disha) दुनिया के सबसे खतरनाक और युद्धग्रस्त समुद्री मार्ग ‘स्ट्रैट ऑफ हॉर्मुज’ (Strait of Hormuz) को सुरक्षित पार कर चुका है।

मिडिल ईस्ट में युद्ध शुरू होने के बाद से इस बेहद संकीर्ण और संवेदनशील शिपिंग लेन को पार करने वाला यह पहला भारतीय एलएनजी टैंकर बन गया है।

62 हजार टन से ज्यादा गैस लेकर आ रहा है जहाज

यह कमर्शियल जहाज वैश्विक बाजार और भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण कार्गो लेकर लौट रहा है:

  • कितना है कार्गो: इस एलएनजी कैरियर में 62,370 मीट्रिक टन लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) लोड है।
  • किसके द्वारा संचालित: इस विशाल जहाज का प्रबंधन शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (SCI) के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम द्वारा किया जा रहा है और इसे ‘पेट्रोनेट एलएनजी लिमिटेड’ (Petronet LNG Ltd) द्वारा चार्टर किया गया है।
  • कब पहुंचेगा भारत: पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के निदेशक उपेश कुमार शर्मा ने बताया कि यह जहाज आगामी 18 जून को गुजरात के दाहेज बंदरगाह पर सुरक्षित पहुंच जाएगा।

अब तक 15 जहाज सुरक्षित निकले

मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, अमेरिका-ईरान के बीच हुए युद्धविराम के बाद से समुद्री यातायात में तेजी से सुधार हो रहा है:

  • सुरक्षित आवाजाही: निदेशक उपेश कुमार शर्मा ने जानकारी दी कि अब तक कुल 15 व्यावसायिक जहाज इस रणनीतिक जलमार्ग को सुरक्षित पार कर चुके हैं। इनमें 10 भारतीय ध्वज वाले (Indian-flagged) और 5 विदेशी झंडे वाले जहाज शामिल हैं।
  • सुरक्षा के कड़े इंतजाम: भारत सरकार का पोत परिवहन मंत्रालय, विदेश मंत्रालय (MEA), विदेशों में स्थित भारतीय दूतावासों और शिपिंग कंपनियों के साथ लगातार संपर्क में है, ताकि इस क्षेत्र से गुजरने वाले भारतीय नाविकों और जहाजों की सुरक्षा को हर हाल में सुनिश्चित किया जा सके।

क्यों बंद था हॉर्मुज जलमार्ग? चालू वर्ष में 28 फरवरी को जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर सैन्य हमले किए थे, तब जवाबी कार्रवाई में तेहरान (ईरान) ने इस रणनीतिक जलमार्ग को प्रभावी रूप से बंद कर दिया था। इससे वैश्विक स्तर पर जहाजों की आवाजाही ठप हो गई थी और कच्चे तेल व गैस की सप्लाई रुक गई थी। अब दोनों देशों के बीच हुए नए समझौते के बाद इसे दोबारा खोला गया है।

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