सीहोर में आशा-उषा कार्यकर्ताओं का ‘हल्ला बोल’: मांगें पूरी न होने पर आंदोलन तेज करने की दी चेतावनी

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सीहोर। अपनी विभिन्न लंबित मांगों को लेकर लंबे समय से हड़ताल पर बैठी आशा और उषा कार्यकर्ताओं ने अब सरकार के खिलाफ अपने आंदोलन को और तेज करने का ऐलान कर दिया है। मंगलवार को जिलेभर की कार्यकर्ता टाउनहॉल के पास एकत्रित हुईं, जहाँ उन्होंने ‘हल्ला बोल’ आंदोलन की रणनीति तैयार की। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपनी मांगों को जल्द से जल्द पूरा करने की आवाज उठाई।

हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाएं बेपटरी, ग्रामीण इलाकों में बढ़ी परेशानी

आशा और उषा कार्यकर्ताओं की इस अनिश्चितकालीन हड़ताल का सीधा असर जिले की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर दिखने लगा है। कार्यकर्ताओं के काम बंद करने के कारण मैदानी स्तर पर निम्नलिखित महत्वपूर्ण सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं:

  • मातृ एवं शिशु टीकाकरण: बच्चों और गर्भवती महिलाओं को समय पर लगने वाले टीके रुक गए हैं।
  • संस्थागत प्रसव: ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित डिलीवरी के लिए दी जाने वाली कड़ियाँ प्रभावित हुई हैं।
  • राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम: कुपोषण नियंत्रण, परिवार नियोजन और संक्रामक रोगों की रोकथाम जैसे जमीनी काम ठप पड़ गए हैं।

कार्यकर्ताओं का साफ कहना है कि वे लंबे समय से शांतिपूर्ण तरीके से सरकार का ध्यान आकर्षित कर रही हैं, लेकिन प्रशासन की चुप्पी के कारण अब उन्हें उग्र रास्ता अपनाना पड़ रहा है।

“24 घंटे काम, फिर भी न नियमितीकरण न पूरा वेतन”

आशा उषा महिला संगठन की प्रदेश अध्यक्ष नर्मदा ठाकरे के निर्देश पर आयोजित इस जिला स्तरीय बैठक में संगठन के प्रमुख पदाधिकारियों ने अपनी बात रखी:

“आशा और उषा कार्यकर्ता हर परिस्थिति में २४ घंटे स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ा काम करती हैं। गांव-गांव तक हर सरकारी योजना को पहुंचाने की जिम्मेदारी हमारी है। इसके बावजूद हमें न तो नियमित कर्मचारी का दर्जा मिला है और न ही सम्मानजनक वेतन। सरकार बार-बार ज्ञापन देने के बाद भी हमारी मांगों को गंभीरता से नहीं ले रही है।”संगीता यादव, जिला प्रवक्ता

  • रणनीति का आह्वान: जिलाध्यक्ष सीमा चौहान ने सभी कार्यकर्ताओं को एकजुट होकर आंदोलन को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
  • मांगों का वाचन: जिला कोषाध्यक्ष मीना राठौर ने कार्यकर्ताओं की प्रमुख मांगों को सबके सामने रखा।
  • वादों की याद दिलाई: जिला उपाध्यक्ष सरिता विश्वकर्मा ने सरकार द्वारा पूर्व में किए गए उन वादों का उल्लेख किया जो आज तक अधूरे हैं।

क्या हैं आशा-उषा कार्यकर्ताओं की मुख्य मांगें?

ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली इन महिला कार्यकर्ताओं की मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:

  1. नियमितीकरण: सभी आशा और उषा कार्यकर्ताओं को शासकीय कर्मचारी का दर्जा दिया जाए।
  2. न्यूनतम वेतन वृद्धि: काम के घंटे और महंगाई के अनुपात में उचित मासिक मानदेय तय हो।
  3. सामाजिक सुरक्षा: भविष्य को सुरक्षित करने के लिए पेंशन और पीएफ (PF) जैसी बुनियादी सुविधाएं मिलें।
  4. अन्य सुविधाएं: स्वास्थ्य बीमा और कार्यस्थल पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हों।

आगे की चेतावनी

बैठक के अंत में कार्यकर्ताओं ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर जल्द ही कोई सकारात्मक और ठोस निर्णय नहीं लिया, तो आने वाले दिनों में इस आंदोलन को और अधिक व्यापक और उग्र रूप दिया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

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