‘आइए और चीजें स्पष्ट करिए…’, राहुल गांधी और अभिजीत दिपके ने मांगा CEC का इस्तीफा तो बोले चिराग पासवान

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नई दिल्ली। देश में चुनाव प्रक्रिया और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार तेज होता जा रहा है। कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। इसी मुद्दे पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने भी CEC के इस्तीफे की मांग करते हुए विपक्षी दलों से चुनाव प्रक्रिया को लेकर अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करने की अपील की है। इस बीच केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा है कि विपक्ष का राजनीतिक आरोप लगाना उसका काम है, लेकिन यदि चुनाव प्रक्रिया को लेकर जनता के मन में संदेह पैदा हो रहा है तो चुनाव आयोग को सामने आकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

राहुल गांधी ने CEC के इस्तीफे की मांग की

24 सितंबर 2026 को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि देश की चुनाव व्यवस्था में गंभीर गड़बड़ियां हैं और मतदाता सूची तथा चुनावी प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवाल लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हैं। राहुल गांधी ने 2024 के लोकसभा चुनाव को लेकर भी बेहद गंभीर आरोप लगाए और कहा कि चुनाव व्यवस्था को लेकर जवाबदेही तय होनी चाहिए।

राहुल गांधी ने ज्ञानेश कुमार से तत्काल इस्तीफा देने की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि CEC को अपने पद से हटकर पूरे मामले में सामने आकर जानकारी देनी चाहिए। उनके बयान के मुताबिक चुनाव में मतदाता का वोट लोकतंत्र की बुनियादी इकाई है और यदि वोट की प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं तो इसका असर संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर पड़ता है।

चुनाव आयोग के भीतर मतभेद की रिपोर्ट से बढ़ा विवाद

इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि में चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों को लेकर सामने आई एक रिपोर्ट भी है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 मौकों पर आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर आपत्तियां दर्ज की थीं। रिपोर्ट में मतदाता सूची में नाम जोड़ने, नाम हटाने, फॉर्म-6 में बदलाव और मतदाता डेटा के केंद्रीकरण जैसे मुद्दों का उल्लेख किया गया।

इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और विशेष रूप से CEC ज्ञानेश कुमार को निशाने पर लिया। विपक्ष की ओर से यह मांग भी उठी कि पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से जांच होनी चाहिए।

अभिजीत दिपके ने भी मांगा CEC का इस्तीफा

इसी विवाद के बीच CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने भी CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। दिपके ने कहा कि यदि विपक्षी दलों को वास्तव में लगता है कि चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी हो रही है, तो उन्हें केवल उन राज्यों में सवाल नहीं उठाना चाहिए जहां उन्हें राजनीतिक नुकसान या फायदा दिखाई देता है।

दिपके ने विपक्षी दलों से ऐसे चुनावों में हिस्सा लेने के फैसले पर भी सवाल उठाया। उनका तर्क है कि यदि कोई राजनीतिक दल किसी चुनावी प्रक्रिया को अविश्वसनीय मानता है, तो उसी प्रक्रिया में लगातार हिस्सा लेना उस प्रक्रिया को वैधता देने जैसा हो सकता है। उन्होंने चुनावी प्रक्रिया की तुलना फिक्स क्रिकेट मैच से करते हुए अपना राजनीतिक तर्क रखा और CEC के इस्तीफे की मांग की।

चिराग पासवान ने क्या कहा?

विपक्ष की ओर से लगातार उठाए जा रहे सवालों के बीच केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने चुनाव आयोग को लेकर एक अलग बात कही। उन्होंने कहा कि विपक्ष क्या कहता है, उससे उन्हें विशेष फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि राजनीति करना विपक्ष का काम है। लेकिन यदि चुनाव प्रक्रिया को लेकर आम जनता के मन में संदेह पैदा होता है तो इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

चिराग पासवान के मुताबिक चुनाव आयोग और खासकर मुख्य चुनाव आयुक्त की जिम्मेदारी है कि वह सामने आकर उठ रहे सवालों का स्पष्ट जवाब दें। उन्होंने कहा कि आयोग को मजबूती से अपना पक्ष रखना चाहिए ताकि लोगों के मन में चुनाव प्रक्रिया को लेकर कोई संदेह न रहे। यानी चिराग ने सीधे तौर पर राहुल गांधी के आरोपों का समर्थन करने के बजाय चुनाव आयोग से पारदर्शिता और स्पष्टीकरण की जरूरत पर जोर दिया।

ऐसे में आने वाले दिनों में इस विवाद का केंद्र चुनाव आयोग की पारदर्शिता, मतदाता सूची के पुनरीक्षण, आयोग के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया और विपक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच से जुड़े सवाल रह सकते हैं। फिलहाल राहुल गांधी और अभिजीत दिपके की ओर से CEC के इस्तीफे की मांग सामने है, जबकि चिराग पासवान ने चुनाव आयोग से जनता के मन में उठ रहे संदेहों को दूर करने के लिए स्पष्ट रूप से अपना पक्ष रखने की बात कही है। चुनाव आयोग और विपक्ष के इन अलग-अलग रुख के बीच विवाद का अगला चरण राजनीतिक के साथ-साथ संवैधानिक और कानूनी स्तर पर भी महत्वपूर्ण हो सकता है।

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