drnewsindia.com / पॉलिटिक्स डेस्क | संसद लाइव अपडेट्स (31 जुलाई 2026)
संसद के मानसून सत्र का शुक्रवार का दिन भारी हंगामे, अनोखे प्रदर्शनों और तीखी बहसों के नाम रहा। एक तरफ जहां संसद परिसर के मकर द्वार पर अनोखा विरोध प्रदर्शन देखने को मिला, वहीं दूसरी तरफ हंगामे के बीच जन्म-मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) बिल, 2026 ध्वनि मत से पास हो गया।
🛕 मकर द्वार पर पुजारी के वेश में पहुंचे पप्पू यादव
राम मंदिर चढ़ावा चोरी के आरोपों को लेकर विपक्षी सांसदों ने संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन किया:
- अनोखा प्रदर्शन: निर्दलीय सांसद पप्पू यादव पुजारी का वेश धारण कर हाथ में दानपेटी लेकर मकर द्वार पर बैठ गए।
- राहुल गांधी ने दिया चंदा: कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत कई विपक्षी सांसदों ने दानपेटी में चंदा डाला।
- अमित शाह पर निशाना: विपक्षी सांसद ‘अमित शाह संसद से गायब क्यों?’ लिखे बैनर लेकर पहुंचे थे।

📜 विशेषाधिकार हनन और अवमानना का नोटिस
| किसके खिलाफ | किसने दिया नोटिस | वजह / आरोप |
| जितेंद्र सिंह (केंद्रीय मंत्री) | कांग्रेस (विपक्ष) | जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग न होने के बयान को लेकर झूठा दावा करने का आरोप। |
| राहुल गांधी (नेता प्रतिपक्ष) | अनुराग ठाकुर (BJP) | गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ असंसदीय भाषा और बेबुनियाद आरोप लगाने का आरोप। |
⚡ 10 मिनट में समझें शुक्रवार के प्रमुख संसद अपडेट्स
- जन्म-मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) बिल, 2026 पास: विपक्ष के हंगामे के बीच लोकसभा में यह बिल ध्वनि मत से पारित हो गया।
- सदन 3 अगस्त तक स्थगित: बार-बार के हंगामे के चलते लोकसभा और राज्यसभा दोनों की कार्यवाही को सोमवार (3 अगस्त) तक के लिए स्थगित कर दिया गया है।
- संसदीय कार्य मंत्री का संदेश: किरेन रिजिजू ने विपक्ष से अपील करते हुए कहा— “आप बाहर जाकर कहते हैं सरकार चर्चा नहीं कराती, जबकि आप खुद चर्चा में शामिल नहीं होते। हंगामा न करें, चर्चा करें।”
- राहुल गांधी का Gen Z पर ट्वीट: राहुल ने पीएम मोदी और अमित शाह पर निशाना साधते हुए कहा— “आप Gen Z को चुप रहने के लिए धमका नहीं सकते। वे भारत का भविष्य हैं।”

🔍 फैक्ट चेक: मनुस्मृति, शूद्र और इतिहास पर राज्यसभा में तीखी बहस
पेपर लीक बिल पर बहस के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी के बीच तीखा वाकयुद्ध देखने को मिला:
दावा 1 (मल्लिकार्जुन खड़गे): शिक्षा संस्थानों में मनुस्मृति मानने वाले बढ़ गए हैं, जिससे शूद्रों के पढ़ने का अधिकार छिन रहा है।
- Fact Check: खड़गे द्वारा उद्धृत सजाएं मूल मनुस्मृति में नहीं, बल्कि ‘गौतम धर्मसूत्र’ में दर्ज हैं। खड़गे ने बाद में इस पर स्पष्टीकरण भी दिया।

दावा 2 (सुधांशु त्रिवेदी): आधुनिक अनुसूचित जातियों और वैदिक काल के शूद्रों में कोई संबंध नहीं है। विलियम जोन्स से पहले का मनुस्मृति टेक्स्ट उपलब्ध नहीं है।
- Fact Check: विलियम जोन्स ने 1794 में मनुस्मृति का पहला अंग्रेजी अनुवाद पब्लिश किया था। वहीं, डॉ. बी.आर. अंबेडकर ने अपनी किताब ‘हू वर द शुद्राज’ में स्पष्ट लिखा है कि प्राचीन वैदिक शूद्र (जो मूल रूप से क्षत्रिय थे) और आधुनिक अनुसूचित जातियां ऐतिहासिक रूप से एक नहीं हैं।




