MP राज्यसभा चुनाव: कांग्रेस की तीसरी सीट पर फंसा सियासी गणित, BJP की नजर ‘हैट्रिक’ पर

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भोपाल। मध्यप्रदेश समेत देश के 12 राज्यों की 26 राज्यसभा सीटों पर चुनाव का बिगुल बज चुका है। चुनाव आयोग ने घोषणा की है कि इन सीटों के लिए 18 जून को मतदान होगा। इसके साथ ही मध्यप्रदेश में भी सियासी हलचल तेज हो गई है। राज्य की तीन राज्यसभा सीटों पर चुनाव होना है, जिनमें से दो सीटें भाजपा के खाते में जाती दिख रही हैं, जबकि तीसरी सीट पर कांग्रेस का गणित उलझता नजर आ रहा है।

1 जून से शुरू होगी नामांकन प्रक्रिया

राज्यसभा चुनाव के लिए 1 जून से नामांकन पत्र दाखिल किए जाएंगे, जबकि 8 जून नामांकन की अंतिम तारीख होगी। मध्यप्रदेश में जिन तीन सीटों पर चुनाव होना है, उनमें केंद्रीय मंत्री जार्ज कुरियन, भाजपा सांसद सुमेर सिंह सोलंकी और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह की सीटें शामिल हैं। इन तीनों का कार्यकाल 21 जून को समाप्त हो रहा है।

दिग्विजय सिंह का यह राज्यसभा में लगातार दूसरा कार्यकाल रहा है। वहीं जार्ज कुरियन उपचुनाव के जरिए अगस्त 2024 में राज्यसभा पहुंचे थे।

विधानसभा का गणित क्या कहता है?

drnewsindia.com /मध्यप्रदेश विधानसभा की कुल सदस्य संख्या 230 है, लेकिन दतिया के पूर्व विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने के बाद वर्तमान प्रभावी संख्या 229 रह गई है। ऐसे में एक राज्यसभा उम्मीदवार को जीत के लिए 58 वोटों की जरूरत होगी।

वर्तमान समीकरण इस प्रकार हैं—

  • भाजपा : 164 विधायक
  • कांग्रेस : 64 विधायक
  • भारत आदिवासी पार्टी : 1 विधायक
  • एक सीट रिक्त

इस गणित के हिसाब से भाजपा की दो सीटों पर जीत लगभग तय मानी जा रही है।

कांग्रेस की बढ़ी चिंता, क्रॉस वोटिंग का डर

कांग्रेस की सबसे बड़ी परेशानी तीसरी सीट को लेकर है। पार्टी को अपने विधायकों में संभावित क्रॉस वोटिंग की चिंता सता रही है। पार्टी के कुछ विधायकों की स्थिति पहले से विवादों में है।

बीना विधायक निर्मला सप्रे के खिलाफ दल-बदल कानून के तहत मामला लंबित है। वहीं विजयपुर विधायक मुकेश मल्होत्रा के मतदान अधिकार पर मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। ऐसे में कांग्रेस की प्रभावी संख्या घटकर करीब 62 मानी जा रही है।

यही वजह है कि पार्टी को डर है कि यदि कुछ वोट इधर-उधर हुए तो उसकी एकमात्र संभावित सीट भी हाथ से निकल सकती है।

2020 जैसा दोहराएगा इतिहास?

राज्यसभा चुनाव का यह मुकाबला कांग्रेस को वर्ष 2020 की याद भी दिला रहा है। उस समय कांग्रेस ज्योतिरादित्य सिंधिया को राज्यसभा भेजना चाहती थी। लेकिन चुनाव से पहले ही कमलनाथ सरकार गिर गई और 22 विधायकों के पार्टी छोड़ने से पूरा राजनीतिक समीकरण बदल गया।

अब एक बार फिर कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने विधायकों को एकजुट रखना है। भाजपा भी कांग्रेस की अंदरूनी गुटबाजी का फायदा उठाकर तीसरी सीट पर दांव खेलने की तैयारी में दिखाई दे रही है।

उम्मीदवारों को लेकर चर्चा तेज

कांग्रेस में फिलहाल मीनाक्षी नटराजन, कमलनाथ सहित कई नाम चर्चा में हैं। हालांकि भाजपा की रणनीति को देखते हुए कांग्रेस आदिवासी या दलित चेहरे पर भी दांव खेल सकती है।

दूसरी ओर भाजपा की नजर सिर्फ दो नहीं, बल्कि तीसरी सीट पर भी जीत दर्ज कर सियासी बढ़त बनाने पर टिकी है।

तीसरी सीट बनेगी सबसे बड़ा सियासी रण

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विधानसभा के आंकड़ों में कांग्रेस की स्थिति कमजोर पड़ने और संभावित क्रॉस वोटिंग की आशंका के कारण तीसरी सीट पर मुकाबला बेहद दिलचस्प हो सकता है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या कांग्रेस अपने विधायकों को एकजुट रख पाएगी या फिर भाजपा तीसरी सीट पर भी सियासी बाजी मार लेगी।

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