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भोपाल: मध्य प्रदेश के कृषि क्षेत्र और क्रॉप पैटर्न (फसल चक्र) में अगले पांच साल के भीतर बड़ा बदलाव आने वाला है। केंद्र सरकार के ‘राष्ट्रीय दलहन आत्मनिर्भरता मिशन’ को राज्य में लागू करने के लिए 2442.04 करोड़ रुपए की भारी-भरकम राशि मंजूर की गई है। इस मिशन का उद्देश्य भारत को दालों के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना और एमपी को दुनिया का दाल केंद्र (Global Pulse Hub) बनाना है।
एमपी को मिला देश में सबसे बड़ा लक्ष्य
केंद्र सरकार ने इस मिशन के तहत मध्य प्रदेश पर सबसे ज्यादा भरोसा जताया है:
- बीज किट वितरण: प्रदेश के किसानों को दलहनों की उन्नत नस्ल के 2 लाख 22 हजार 700 बीज किट बांटे जाएंगे। इस मामले में एमपी पूरे देश में पहले स्थान पर है (उत्तर प्रदेश 2.11 लाख किट के साथ दूसरे पर है)।
- सभी 55 जिले शामिल: खास बात यह है कि प्रदेश के सभी 55 जिलों को इस मिशन के दायरे में लाया गया है।
- उत्पादन में हिस्सेदारी: वर्तमान में देश के कुल दलहन उत्पादन में अकेले मध्य प्रदेश का योगदान 24% है।
हर जिले में लगेगी प्रोसेसिंग यूनिट
प्रदेश को ‘ग्लोबल पल्स हब’ बनाने के लिए सरकार केवल उत्पादन ही नहीं, बल्कि प्रोसेसिंग पर भी जोर दे रही है। योजना के तहत:
- सभी 55 जिलों में कम से कम एक दाल मिल और प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित की जाएगी।
- इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ेगा और किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल सकेगा।

MSP की गारंटी और बोनस का दांव
किसानों को दलहन की खेती के प्रति प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ने बड़े कदम उठाए हैं:
- 100% खरीदी: तुअर, उड़द और मसूर की शत-प्रतिशत खरीदी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर करने की गारंटी दी गई है।
- बोनस योजना: उड़द पर 600 रुपए प्रति क्विंटल बोनस घोषित हो चुका है, जबकि मसूर पर बोनस देने पर विचार चल रहा है। साथ ही मंडी टैक्स में राहत देने की भी चर्चा है।

इन फसलों पर रहेगा विशेष फोकस
| फसल | वर्तमान स्थिति | सरकार का लक्ष्य |
| चना | देश का 40% उत्पादन एमपी में (विदिशा, रायसेन प्रमुख)। | दबदबा बरकरार रखना। |
| तुअर | 4.5 से 5.10 लाख हेक्टेयर रकबा। | आयात कम करने के लिए रकबा बढ़ाना। |
| मूंग-उड़द | करीब 20 लाख हेक्टेयर रकबा। | उड़द की MSP पर खरीदी सुनिश्चित करना। |
| मसूर | 6.2 लाख हेक्टेयर रकबा। | एमएसपी और बोनस के जरिए किसानों को फिर से जोड़ना। |





