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भोपाल (मौसम डेस्क)। मध्य प्रदेश में मानसून की एंट्री के बाद अब बारिश की गतिविधियों में तेजी आने वाली है। मौसम केंद्र (IMD) भोपाल के मुताबिक, प्रदेश के जिन 15 जिलों में मानसून दस्तक दे चुका है, उनमें से 5 जिलों— बैतूल, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी और बालाघाट में मंगलवार को भारी बारिश का ‘ऑरेंज/येलो अलर्ट’ जारी किया गया है। इन जिलों में अगले 24 घंटे के भीतर 4 इंच तक पानी गिर सकता है।
इसके साथ ही मौसम विभाग ने संकेत दिए हैं कि 2 जुलाई से राज्य में एक नया वेदर सिस्टम एक्टिव हो रहा है, जिससे प्रदेशभर में अति भारी और मूसलाधार बारिश का नया दौर शुरू होगा।
🌪️ भोपाल-इंदौर समेत 50 जिलों में आंधी-बारिश की चेतावनी, चलेंगे तेज झोंके
मौसम विभाग ने मानसून की धीमी रफ्तार के बीच प्रदेश के बाकी बचे 50 जिलों के लिए भी बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट जारी किया है:
- 60 किमी/घंटा की रफ्तार से आंधी: भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, उज्जैन, आगर-मालवा, शाजापुर, देवास, नर्मदापुरम, हरदा, गुना, अशोकनगर, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, मंडला, डिंडौरी, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी जिलों में गरज-चमक के साथ 60 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान है।
- यहाँ होगी हल्की बौछारें: ग्वालियर, भिंड, मुरैना, श्योपुर, दतिया, शिवपुरी, नीमच, मंदसौर, रतलाम, झाबुआ और आलीराजपुर में कहीं-कहीं हल्की बारिश होने की संभावना जताई गई है।

🛑 मानसून एक जगह पर ठहरा; उत्तरी हिस्सों में पारा 41 डिग्री पार
24 जून को मध्य प्रदेश में मानसून ने धमाकेदार एंट्री की थी और यह आधिकारिक तौर पर 15 जिलों (अलीराजपुर, इंदौर, धार, हरदा, बैतूल, खंडवा, बुरहानपुर, खरगोन, बड़वानी, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला और डिंडौरी) तक पहुंच गया था। लेकिन इसके बाद मानसून आगे बढ़ने के बजाय एक ही जगह पर ठहर गया है।
- बढ़ी उमस और गर्मी: मानसून के ठिठकने से ग्वालियर-चंबल, सागर और रीवा संभाग के उत्तरी शहरों में तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सोमवार को खजुराहो में अधिकतम तापमान 41.2°C, नौगांव में 40.5°C और ग्वालियर में 40.3°C रहा।
📊 सामान्य से 39% कम बरसा पानी; अलीराजपुर में सबसे कम बारिश
पिछले छह दिनों से प्रदेश के कुछ हिस्सों में लगातार हो रही बारिश से आंकड़े सुधरे जरूर हैं, लेकिन यह अब भी सामान्य से कम है:
- बारिश का गणित: 1 जून से अब तक राज्य में औसत 124.2 मिमी (5 इंच) बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन केवल 75.7 मिमी (3 इंच) पानी ही गिरा है। इस तरह ओवरऑल 39 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है।
- पूर्वी बनाम पश्चिमी MP: पूर्वी हिस्से में औसत से 68% कम पानी गिरा है, जबकि पश्चिमी हिस्से में औसत से महज 11% की कमी है। अलीराजपुर जिला अब तक सबसे सूखा रहा है, जहां केवल 2 मिमी बारिश हुई है।
- यहाँ हुई ज्यादा बारिश: भोपाल, अशोकनगर, आगर-मालवा, मंदसौर, नीमच, श्योपुर, बुरहानपुर, इंदौर, शाजापुर और सीहोर में सामान्य से ज्यादा बारिश हुई है, जिसमें राजधानी भोपाल में 6 इंच से ज्यादा पानी बरस चुका है।

🌆 MP के 5 बड़े शहरों में जून महीने का ऐतिहासिक ट्रेंड
1. भोपाल (Bhopal)
राजधानी में जून के आधे महीने तक भीषण गर्मी और उसके बाद प्री-मानसून व मानसून की बारिश का ट्रेंड रहा है। पिछले 10 साल में जून के शुरुआती 15 दिनों में पारा 44°C के पार जा चुका है। साल 2020 में भोपाल में जून महीने में रिकॉर्ड 16 इंच बारिश हुई थी, जबकि पिछले साल 2024 में कुल 10.9 इंच पानी गिरा था।
2. इंदौर (Indore)
इंदौर में जून आते ही दिन के तापमान में गिरावट दर्ज की जाती है। पिछले 7 वर्षों (2020-2025) में यहाँ जून के दौरान कम गर्मी पड़ी और पारा 39.6 से 41.6°C के बीच रहा। इंदौर में जून महीने का ऑल-टाइम रिकॉर्ड साल 1980 का है, जब यहाँ 17 इंच से ज्यादा बारिश हुई थी।
3. ग्वालियर (Gwalior)
ग्वालियर में जून का महीना बेहद तपाने वाला होता है। साल 2019 में 11 जून को यहाँ का तापमान 47.8°C तक पहुंच चुका है। वहीं, बारिश के मामले में साल 1952 का रिकॉर्ड सबसे ऊपर है, जब पूरे महीने में साढ़े 28 इंच बारिश हुई थी और 27 जून 1952 को एक ही दिन में सर्वाधिक साढ़े 7 इंच पानी गिरा था।

4. जबलपुर (Jabalpur)
जबलपुर संभाग के रास्ते ही अक्सर मानसून मध्य प्रदेश में प्रवेश करता है, इसलिए यहाँ जून कोटे की 30% तक बारिश शुरुआती दिनों में ही हो जाती है। जबलपुर का ऑल-टाइम रिकॉर्ड साल 1998 का है, जब एक महीने में करीब 30 इंच बारिश दर्ज की गई थी।
5. उज्जैन (Ujjain)
बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में भी जून में अच्छी बारिश का ट्रेंड है। साल 2016 से 2025 के बीच यहाँ जून के महीने में 2.5 से 8 इंच तक पानी गिर चुका है। 24 घंटे में सर्वाधिक बारिश का रिकॉर्ड 15 जून 2001 को बना था, जब करीब साढ़े 6 इंच बारिश दर्ज की गई थी।



