रूस और NATO के बीच बढ़ते तनाव के बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पश्चिमी देशों को कड़ा संदेश दिया है। 1 अक्टूबर 2026 को मॉस्को में आयोजित वल्दाई डिस्कशन क्लब के कार्यक्रम में पुतिन ने कहा कि अगर रूस के किसी क्षेत्र पर सीधा हमला होता है तो मॉस्को अपने पास उपलब्ध सभी हथियारों के इस्तेमाल के विकल्प पर विचार करेगा। उन्होंने खास तौर पर रूस के बाल्टिक क्षेत्र में स्थित कैलिनिनग्राद को लेकर पश्चिमी देशों को चेतावनी दी। उनके बयान में परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की संभावना भी शामिल थी।
पुतिन ने क्या कहा?
वल्दाई फोरम में पुतिन से रूस और NATO के बीच सीधे सैन्य टकराव की आशंका तथा दोनों पक्षों की ओर से एक-दूसरे को डराने के आरोपों के बारे में सवाल किया गया। जवाब में पुतिन ने कहा कि रूस की ओर से यह डराने की कोशिश नहीं बल्कि उन कदमों का जवाब है, जिन्हें मॉस्को अपने लिए दबाव या खतरे के तौर पर देखता है।
पुतिन ने कहा कि अगर रूस के खिलाफ सीधा हमला होता है और इसमें कैलिनिनग्राद या रूस के अन्य क्षेत्रों को निशाना बनाया जाता है, तो रूस के पास उपलब्ध सभी हथियारों के इस्तेमाल का सवाल तत्काल सामने आएगा। उन्होंने यह भी कहा कि रूस यूरोपीय देशों पर हमला करने की योजना नहीं बना रहा है और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व चाहता है, लेकिन किसी आक्रमण की स्थिति में जवाब देने की बात दोहराई।
रूस-NATO तनाव के बीच सैन्य गतिविधियां
पुतिन ने अपने बयान में बाल्टिक सागर में NATO देशों की सैन्य गतिविधियों और रूसी जहाजों से संबंधित घटनाओं का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, ऐसी गतिविधियां तनाव बढ़ाने वाली हैं। रूस का कहना है कि पश्चिमी देशों की सैन्य तैयारियां और क्षेत्र में गतिविधियां मॉस्को के लिए सुरक्षा संबंधी चिंता पैदा करती हैं।
दूसरी ओर NATO का कहना है कि गठबंधन का उद्देश्य सदस्य देशों की सामूहिक सुरक्षा और रक्षा है। NATO ने रूस की परमाणु बयानबाजी को खारिज करते हुए कहा है कि बल प्रयोग की धमकी और परमाणु हथियारों से जुड़ी गैर-जिम्मेदाराना भाषा तनाव कम करने में मदद नहीं करती।
कैलिनिनग्राद को लेकर जारी बयानबाजी ने इस व्यापक तनाव में एक और संवेदनशील मुद्दा जोड़ दिया है। रूस इसे अपने संप्रभु क्षेत्र के रूप में देखता है और किसी भी सीधे हमले की स्थिति में जवाब देने की बात कह रहा है। वहीं NATO ने सैन्य टकराव को बढ़ाने वाली परमाणु भाषा से बचने की अपील की है।
फिलहाल कैलिनिनग्राद को लेकर रूस और NATO के बीच कोई सीधा सैन्य संघर्ष नहीं हुआ है। लेकिन पुतिन का ताजा बयान यह दिखाता है कि मॉस्को इस क्षेत्र को लेकर किसी भी संभावित सैन्य दबाव को गंभीरता से देख रहा है। आने वाले दिनों में बाल्टिक क्षेत्र में NATO की गतिविधियों, रूस की प्रतिक्रिया और दोनों पक्षों की राजनयिक बयानबाजी पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी रहेगी।




