कोलकाता। पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) को लेकर चल रहा राजनीतिक विवाद अब और तेज हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी और उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग की है। इसके साथ ही ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में SIR से पहले की पुरानी मतदाता सूची के आधार पर विधानसभा चुनाव दोबारा कराने की मांग भी रखी है। उनकी ये मांगें ऐसे समय सामने आई हैं, जब चुनाव आयोग के भीतर SIR से जुड़े निर्णयों को लेकर कथित आपत्तियों की रिपोर्ट पर राजनीतिक बहस चल रही है।
ममता ने क्या-क्या मांगें रखीं?
ममता बनर्जी की प्रमुख मांगों में सबसे पहले CEC ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी और उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई शामिल है। इसके अलावा उन्होंने पश्चिम बंगाल में SIR से पहले की मतदाता सूची के आधार पर दोबारा विधानसभा चुनाव कराने की मांग की है। उन्होंने यह भी कहा कि ज्ञानेश कुमार के CEC पद पर बने रहने तक देशभर में विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे।
ममता का दावा है कि SIR की प्रक्रिया में बड़ी संख्या में मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हुए और इसका असर विधानसभा चुनाव पर पड़ा। हालांकि, ये राजनीतिक आरोप हैं और चुनाव आयोग ने SIR से संबंधित निर्णयों को लेकर अलग पक्ष रखा है। इसलिए इस पूरे विवाद में आरोप और स्थापित तथ्य के बीच अंतर करना महत्वपूर्ण है।
विवाद की शुरुआत कहां से हुई?
SIR विवाद उस समय और बढ़ गया जब एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों में SIR और मतदाता सूची से जुड़े कुछ फैसलों तथा आदेशों पर कई बार आपत्ति दर्ज की थी। रिपोर्ट के मुताबिक, इन आपत्तियों में पश्चिम बंगाल में मतदाताओं के नाम हटाने से जुड़े मामलों और मतदाता सूची प्रबंधन से संबंधित मुद्दे शामिल थे।
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि कुछ मामलों में चुनाव आयुक्तों को फैसलों या कार्रवाई के तरीके को लेकर जानकारी या सहमति से संबंधित सवाल थे। इन रिपोर्टों के सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग तेज कर दी।



