Rajgarh News: छोटे भाई की हत्या में बड़े भाई और भाभी को उम्रकैद, जमीन और दुकान के किराए का था विवाद

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राजगढ़/सारंगपुर। मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के सारंगपुर में छोटे भाई की हत्या के मामले में अदालत ने बड़े भाई और भाभी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। जमीन, मकान और दुकान के किराए को लेकर हुए विवाद में कमल पुष्पद की हत्या के मामले में प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश अतुल राज भलावी की अदालत ने बाबूलाल पुष्पद और उनकी पत्नी सोनाबाई को दोषी ठहराया। न्यायालय ने दोनों आरोपियों को उम्रकैद के साथ 3-3 हजार रुपये के अर्थदंड से भी दंडित किया है।

अभियोजन के अनुसार, यह घटना 15 अगस्त 2025 की सुबह लगभग 7 बजे हुई थी। परिवार के भीतर संपत्ति और दुकान के किराए को लेकर विवाद चल रहा था। इसी विवाद के दौरान कमल पुष्पद की कुल्हाड़ी से हत्या कर दी गई थी। मामले की जांच सारंगपुर थाना पुलिस ने की और घटनास्थल से जुड़े साक्ष्यों को एकत्र कर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया।

15 अगस्त 2025 की सुबह हुई थी वारदात

अतिरिक्त लोक अभियोजक शिव प्रसाद शर्मा के अनुसार, हत्या की घटना 15 अगस्त 2025 की सुबह करीब 7 बजे हुई थी। मामले की पृष्ठभूमि में जमीन, मकान और दुकान के किराए से संबंधित पारिवारिक विवाद बताया गया है।

अभियोजन के मुताबिक, संपत्ति से जुड़े मतभेदों के दौरान कमल पुष्पद की कुल्हाड़ी से हत्या की गई। घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और उपलब्ध साक्ष्यों को एकत्र किया। जांच के दौरान जुटाई गई सामग्री और अन्य परिस्थितियों के आधार पर अभियोजन ने न्यायालय में आरोपियों के विरुद्ध अपना पक्ष प्रस्तुत किया।

प्रत्यक्षदर्शी नहीं होने के बावजूद अभियोजन ने पेश किए साक्ष्य

इस मामले की सुनवाई के दौरान एक महत्वपूर्ण तथ्य यह रहा कि घटना का कोई प्रत्यक्षदर्शी उपलब्ध नहीं था। अभियोजन के अनुसार, मृतक की मां घटना की चश्मदीद थीं, लेकिन उन्हें लकवा होने के कारण उनके बयान दर्ज नहीं किए जा सके।

ऐसी परिस्थितियों में किसी आपराधिक मामले की सुनवाई के दौरान अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। इस प्रकरण में अभियोजन पक्ष ने परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर अदालत के समक्ष घटनाक्रम की कड़ियां प्रस्तुत कीं।

अभियोजन ने कुल 18 गवाहों के बयान न्यायालय में पेश किए। इसके अतिरिक्त, मामले में जब्त की गई कुल्हाड़ी और कपड़ों की एफएसएल रिपोर्ट भी साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत की गई।

भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत सुनाई गई सजा

प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश अतुल राज भलावी की अदालत ने दोनों दोषियों को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 103(1) और धारा 3(5) के तहत दोषी माना।

भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) हत्या के अपराध के लिए दंड का प्रावधान करती है। वहीं, धारा 3(5) एक से अधिक व्यक्तियों द्वारा साझा इरादे के तहत किए गए आपराधिक कृत्य से संबंधित है। मामले में इन धाराओं के अंतर्गत दोषसिद्धि के बाद अदालत ने दोनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

इसके साथ ही दोनों पर 3-3 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया। इस तरह न्यायालय ने हत्या के मामले में दोनों आरोपियों के विरुद्ध कारावास और आर्थिक दंड का आदेश दिया।

मृतक की पत्नी को आर्थिक प्रतिकर दिलाने की अनुशंसा

इस मामले में न्यायालय ने मृतक कमल पुष्पद की पत्नी को आर्थिक प्रतिकर दिलाने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, राजगढ़ को अनुशंसा भी की है।

आपराधिक घटनाओं में पीड़ित परिवारों को आर्थिक और सामाजिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। परिवार के किसी सदस्य की हत्या होने पर आजीविका, घरेलू जिम्मेदारियों और भविष्य से जुड़ी चुनौतियां बढ़ जाती हैं। ऐसे मामलों में पीड़ित प्रतिकर योजनाओं के माध्यम से पात्र परिवारों को नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराई जा सकती है।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को की गई अनुशंसा का उद्देश्य मृतक की पत्नी को उपलब्ध कानूनी प्रावधानों के अंतर्गत आर्थिक सहायता दिलाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाना है। हालांकि, उपलब्ध विवरण में प्रतिकर की निश्चित राशि या भुगतान की समयसीमा का उल्लेख नहीं है।

किसी विवाद को हिंसक रूप देना न केवल संबंधित लोगों की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करता है, बल्कि पूरे परिवार को लंबे समय तक प्रभावित कर सकता है। इस मामले में कमल पुष्पद की हत्या के बाद न्यायालय में सुनवाई हुई और अंततः बड़े भाई बाबूलाल पुष्पद तथा भाभी सोनाबाई को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।

फिलहाल, उपलब्ध जानकारी के अनुसार अदालत ने दोनों दोषियों पर अर्थदंड लगाने के साथ मृतक की पत्नी को आर्थिक प्रतिकर दिलाने के लिए भी अनुशंसा की है। इस फैसले से जुड़े अन्य विवरण, जैसे अपील की स्थिति या प्रतिकर की अंतिम राशि, उपलब्ध समाचार जानकारी में शामिल नहीं हैं।

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