Sehore News: करोड़ों की लागत से बने आयुष्मान आरोग्य मंदिर पर 3 महीने बाद भी लटके ताले; ग्रामीणों को नहीं मिल रहा इलाज का लाभ

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सीहोर / इछावर / drnewsindia.com / ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के दावे कागजों पर तो बड़े-बड़े नजर आते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल देती है। सीहोर विधानसभा क्षेत्र के ग्राम चरनाल में इसका जीवंत उदाहरण देखने को मिल रहा है। यहाँ करीब 2 करोड़ 95 लाख रुपये की भारी-भरकम लागत से तैयार आयुष्मान आरोग्य मंदिर के नवीन भवन का लोकार्पण हुए तीन महीने बीत चुके हैं, लेकिन आज भी इस आलीशान भवन पर ताले लटके हुए हैं।

भवन बनकर तैयार है और उद्घाटन भी हो चुका है, लेकिन ग्रामीण आज भी बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं।

🏥 लोकार्पण के समय जगी थी उम्मीदें, अब छाई मायूसी

चरनाल और उसके आस-पास के ग्रामीण इलाकों के लोगों को स्थानीय स्तर पर ही उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधाएं मुहैया कराने के उद्देश्य से इस सर्वसुविधायुक्त आधुनिक भवन का निर्माण कराया गया था।

सीहोर विधायक सुदेश राय द्वारा इस नवीन भवन का लोकार्पण किया गया था। उद्घाटन के वक्त ग्रामीणों में इस बात की बड़ी उम्मीद जगी थी कि अब सर्दी-जुकाम जैसी सामान्य बीमारियों, जांच और दवाइयों के लिए उन्हें दूर-दराज के अस्पतालों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। लेकिन, लोकार्पण के तीन महीने बाद भी ताला न खुलने से ग्रामीणों की यह उम्मीद अब निराशा में बदल चुकी है।

❌ करोड़ों खर्च, लेकिन सुविधाएं पूरी तरह नदारद

आयुष्मान आरोग्य मंदिरों का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण अंचलों में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करना होता है। इन केंद्रों पर निम्नलिखित सुविधाएं मिलनी चाहिए थीं:

  • सामान्य बीमारियों का प्राथमिक उपचार और ओपीडी (OPD) सेवाएं
  • मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं
  • बच्चों का नियमित टीकाकरण (Vaccination)
  • आवश्यक स्वास्थ्य जांच और निःशुल्क दवाइयों का वितरण

लाखों-करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाकर भवन तो खड़ा कर दिया गया, लेकिन इसके संचालन की पुख्ता व्यवस्था और प्रशासनिक इच्छाशक्ति की कमी के कारण जनता को इसका एक फीसदी भी लाभ नहीं मिल पा रहा है।

🚶‍♂️ इलाज के लिए दूर-दराज के अस्पतालों की मजबूरी

गाँवों में ऐसे स्वास्थ्य केंद्र इसलिए बनाए जाते हैं ताकि आपात स्थिति में या छोटी-मोटी बीमारियों के वक्त मरीजों को तुरंत राहत मिल सके। विशेषकर छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को समय पर चिकित्सा मिलना जीवन-मरण का सवाल बन जाता है। चरनाल के आरोग्य मंदिर का संचालन शुरू न होने के कारण आज भी ग्रामीणों को मजबूरी में इलाज के लिए अन्य दूरस्थ स्वास्थ्य केंद्रों या झोलाछाप डॉक्टरों का रुख करना पड़ रहा है।

❓ जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली पर खड़े होते सवाल

करीब 2.95 करोड़ रुपये की जनता की गाढ़ी कमाई से बने भवन पर महीनों बीत जाने के बाद भी ताला लगा रहना सीधे तौर पर स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन की लचर कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान खड़े करता है।

सवाल यह उठता है कि जब भवन का निर्माण हो चुका है और उसका विधिवत लोकार्पण भी कराया जा चुका है, तो फिर चिकित्सा स्टाफ की तैनाती, बिजली-पानी के कनेक्शन या जरूरी उपकरणों को स्थापित करने में इतनी देरी क्यों हो रही है? यदि किसी प्रशासनिक अड़चन या स्टाफ की कमी के कारण केंद्र शुरू नहीं हो पा रहा है, तो विभाग को जनता के सामने स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

🔍 अब जनता का सवाल: कब शुरू होंगी स्वास्थ्य सेवाएं?

चरनाल के ग्रामीण अब प्रशासनिक अधिकारियों से सीधा जवाब मांग रहे हैं कि आखिर यह ताला कब खुलेगा और कब इस आरोग्य मंदिर में नियमित रूप से डॉक्टर और दवाइयां उपलब्ध होंगी?

जब तक इस भवन में ताले लटकते रहेंगे, तब तक करोड़ों रुपये की इस परियोजना का मूल उद्देश्य कागजी ही साबित होता रहेगा। देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस गंभीर मामले का संज्ञान लेकर कब तक चरनाल के इस अस्पताल को शुरू करवाता है।

📌 मुख्य बिंदु (Key Highlights):

  • स्थान: ग्राम चरनाल, सीहोर विधानसभा क्षेत्र।
  • लागत: लगभग 2.95 करोड़ रुपये।
  • परियोजना: आयुष्मान आरोग्य मंदिर का नवीन भवन।
  • समस्या: लोकार्पण के 3 महीने बाद भी भवन पर ताला, स्वास्थ्य सेवाएं ठप।

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