नई दिल्ली। हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्रि का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना जाता है। यह पर्व मां दुर्गा की उपासना, शक्ति की आराधना और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। वर्ष 2026 में शारदीय नवरात्रि की शुरुआत रविवार, 11 अक्टूबर से होने की जानकारी दी गई है। नवरात्रि के दौरान भक्त नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना करते हैं। इस अवसर पर घरों और मंदिरों में विशेष सजावट की जाती है, धार्मिक अनुष्ठान होते हैं और श्रद्धालु व्रत रखकर माता रानी की आराधना करते हैं।
नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा का महत्व

मां शैलपुत्री को नवदुर्गा का पहला स्वरूप माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उनका नाम शैलपुत्री इसलिए पड़ा क्योंकि वे पर्वतराज हिमालय की पुत्री हैं। मां शैलपुत्री को प्रकृति, शक्ति, स्थिरता और दृढ़ संकल्प का प्रतीक माना जाता है। उनकी पूजा से जुड़ी परंपराओं में जीवन में सकारात्मकता, मानसिक शांति और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।
मां शैलपुत्री के स्वरूप में उनके एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे हाथ में कमल का फूल दर्शाया जाता है। उनका वाहन वृषभ यानी बैल माना जाता है। इसी कारण उन्हें वृषारूढ़ा भी कहा जाता है। नवरात्रि के पहले दिन भक्त मां शैलपुत्री की पूजा करके नौ दिवसीय साधना की शुरुआत करते हैं।
इस दिन सुबह स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनकर पूजा स्थल को साफ किया जाता है। इसके बाद मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित की जाती है। श्रद्धालु फूल, अक्षत, धूप, दीप, फल और अन्य पूजा सामग्री अर्पित करके माता की आराधना करते हैं। पूजा के दौरान मां शैलपुत्री के मंत्रों का जाप और दुर्गा चालीसा का पाठ भी किया जा सकता है।
घटस्थापना क्या है और इसका धार्मिक महत्व क्या है?
नवरात्रि के पहले दिन किए जाने वाले प्रमुख अनुष्ठानों में घटस्थापना का विशेष स्थान है। इसे कलश स्थापना भी कहा जाता है। धार्मिक परंपरा में कलश को शुभता, समृद्धि और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। नवरात्रि के दौरान स्थापित कलश को मां दुर्गा की उपासना से जोड़कर देखा जाता है।
घटस्थापना के समय मिट्टी के पात्र में जौ बोने की परंपरा भी कई घरों में प्रचलित है। इसे जवारे बोना कहा जाता है। अगले नौ दिनों तक जौ के अंकुरों की देखभाल की जाती है। नवरात्रि के समापन पर स्थानीय परंपरा के अनुसार इनका विसर्जन किया जाता है। जौ के अंकुरों को वृद्धि, समृद्धि और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है।
कलश स्थापना करते समय स्वच्छता और पूजा की तैयारी पर विशेष ध्यान दिया जाता है। श्रद्धालु अपनी पारिवारिक परंपरा और पुरोहित के निर्देशों के अनुसार अनुष्ठान करते हैं
घटस्थापना का शुभ मुहूर्त कैसे जानें?
नवरात्रि में घटस्थापना के लिए शुभ मुहूर्त का विशेष महत्व माना जाता है। इसके लिए संबंधित दिन की तिथि, सूर्योदय और स्थानीय पंचांग के आधार पर समय निर्धारित किया जाता है। अलग-अलग शहरों में सूर्योदय के समय में अंतर होने के कारण पूजा के मुहूर्त में भी बदलाव हो सकता है।
11 अक्टूबर 2026 के लिए घटस्थापना का सटीक समय जानने के लिए अपने शहर के विश्वसनीय पंचांग या स्थानीय ज्योतिषाचार्य से पुष्टि करना उचित होगा। उपलब्ध जानकारी में कोई सत्यापित समय नहीं दिया गया है, इसलिए किसी निश्चित घंटे या मिनट को अंतिम मुहूर्त के रूप में बताना उचित नहीं होगा।
श्रद्धालुओं को सलाह दी जाती है कि वे पूजा की तैयारी पहले से कर लें, ताकि मुहूर्त के दौरान आवश्यक सामग्री जुटाने में परेशानी न हो। यदि किसी कारण से निर्धारित समय में पूजा करना संभव न हो, तो अपनी धार्मिक परंपरा के अनुसार मार्गदर्शन लिया जा सकता है।
घटस्थापना के लिए जरूरी पूजा सामग्री
कलश स्थापना और मां शैलपुत्री की पूजा के लिए सामान्यतः निम्नलिखित सामग्री की जरूरत पड़ सकती है:
- मिट्टी का पात्र और स्वच्छ मिट्टी
- जौ के बीज
- जल से भरा कलश
- कलश के लिए आम या उपलब्ध परंपरागत पत्ते
- नारियल और लाल कपड़ा
- रोली, कुमकुम और हल्दी
- अक्षत यानी साबुत चावल
- लाल या पीले फूल
- धूप, अगरबत्ती और दीपक
- घी या तेल तथा रुई की बत्ती
- फल, मिठाई और नैवेद्य
- पूजा की थाली और स्वच्छ आसन
- मां दुर्गा या मां शैलपुत्री की तस्वीर अथवा प्रतिमा
नवरात्रि में पूजा के साथ स्वच्छता और संयम का महत्व
नवरात्रि केवल धार्मिक अनुष्ठानों का पर्व नहीं है, बल्कि इसे आत्मअनुशासन, संयम और सकारात्मक जीवनशैली से भी जोड़कर देखा जाता है। इस दौरान श्रद्धालु अपने घरों और पूजा स्थलों को साफ रखते हैं, नियमित पूजा करते हैं और जरूरतमंदों की सहायता जैसे कार्यों को महत्व देते हैं।
व्रत रखने वाले लोगों को अपनी शारीरिक क्षमता और स्वास्थ्य का ध्यान रखना चाहिए। पर्याप्त पानी पीना और शरीर की जरूरतों के अनुसार भोजन करना उपयोगी है। यदि किसी व्यक्ति को स्वास्थ्य संबंधी समस्या है या विशेष आहार की जरूरत है, तो उपवास के नियम अपनाने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर होगा।
शारदीय नवरात्रि 2026 के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा और घटस्थापना के साथ भक्त नौ दिवसीय पर्व की शुरुआत कर रहे हैं। शुभ मुहूर्त, स्वच्छता और अपनी पारिवारिक परंपराओं के अनुसार पूजा की तैयारी करके श्रद्धालु इस पर्व को श्रद्धा और उत्साह के साथ मना सकते हैं। घटस्थापना का सटीक समय अपने स्थानीय पंचांग से जांचना जरूरी है, ताकि पूजा निर्धारित मुहूर्त के अनुरूप की जा सके।




