नई दिल्ली। केंद्र सरकार के पेंशनभोगियों और कर्मचारी संगठनों के बीच कम्यूटेड पेंशन की बहाली की अवधि को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। आठवें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के संदर्भ में पेंशन से जुड़ी मांगों में यह मुद्दा भी महत्वपूर्ण बनकर सामने आया है। पेंशनर्स संगठनों और कर्मचारी यूनियनों की मांग है कि रिटायरमेंट के समय एकमुश्त रकम लेने के बदले मासिक पेंशन से काटे जाने वाले हिस्से की बहाली की अवधि 15 साल से घटाकर करीब 11.5 से 12 साल की जाए। उनका तर्क है कि कम्यूटेड पेंशन के बदले दी गई एकमुश्त राशि और उस पर ब्याज की भरपाई लगभग 10 से 12 वर्षों में हो जाती है। ऐसे में पेंशन का हिस्सा 15 साल तक काटते रहना पेंशनभोगियों के लिए आर्थिक बोझ बन सकता है।
हालांकि, इस मांग को लेकर अदालत में भी मामला पहुंचा था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, हाई कोर्ट ने 11.5 या 12 साल बाद कम्यूटेड पेंशन का हिस्सा बहाल करने का निर्देश देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि कम्यूटेशन से जुड़ा विषय जटिल है और इसमें नीतिगत पहलुओं पर विचार करना जरूरी है। ऐसे में पेंशनभोगियों की मांग और मौजूदा नियमों के बीच अंतर को समझना महत्वपूर्ण है।
क्या होती है कम्यूटेड पेंशन?
सरकारी कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद पेंशन का लाभ मिलता है। कुछ कर्मचारी अपनी पेंशन का एक निर्धारित हिस्सा कम्यूट यानी एकमुश्त राशि के रूप में पहले ही प्राप्त करने का विकल्प चुनते हैं। इस व्यवस्था को कम्यूटेशन ऑफ पेंशन कहा जाता है।
इसका सीधा मतलब है कि कर्मचारी भविष्य में हर महीने मिलने वाली पेंशन का कुछ हिस्सा छोड़कर उसके बदले एकमुश्त रकम लेता है। रिटायरमेंट के समय मिलने वाली यह राशि कई लोगों के लिए उपयोगी होती है। इससे वे घर बनाने, पुराने कर्ज चुकाने, बच्चों की शिक्षा या शादी, इलाज अथवा अन्य जरूरी खर्चों की योजना बना सकते हैं।
लेकिन एकमुश्त रकम लेने के बाद कर्मचारी की मासिक पेंशन में कम्यूट किया गया हिस्सा घटा दिया जाता है। यानी जब तक यह हिस्सा बहाल नहीं होता, तब तक पेंशनभोगी को पहले की तुलना में कम मासिक पेंशन मिलती है। केंद्रीय कर्मचारियों के मौजूदा नियमों के अनुसार, कम्यूट किया गया पेंशन हिस्सा 15 साल बाद बहाल किया जाता है।
15 साल तक क्यों होती है पेंशन की कटौती?
कम्यूटेशन की व्यवस्था में कर्मचारी को भविष्य में मिलने वाली पेंशन के एक हिस्से के बदले पहले ही एकमुश्त भुगतान किया जाता है। इसके बाद निर्धारित अवधि तक उसकी मासिक पेंशन से कम्यूट किया गया हिस्सा घटाया जाता है। मौजूदा नियमों में यह अवधि 15 वर्ष निर्धारित है।
उदाहरण के तौर पर, यदि कोई कर्मचारी अपनी पेंशन का कुछ हिस्सा कम्यूट कराता है, तो उसे रिटायरमेंट के समय उसके बदले एकमुश्त रकम मिलती है। इसके बाद हर महीने मिलने वाली पेंशन में उतना हिस्सा कम कर दिया जाता है। 15 साल पूरे होने पर कम्यूट किया गया हिस्सा फिर से मासिक पेंशन में जोड़ दिया जाता है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य कर्मचारी को रिटायरमेंट के समय तत्काल आर्थिक सहायता देना और उसके बदले भविष्य में पेंशन का एक हिस्सा निर्धारित समय तक कम रखना है। लेकिन पेंशनभोगियों का एक वर्ग मानता है कि 15 साल की अवधि मौजूदा परिस्थितियों में अधिक है और इसकी समीक्षा की जानी चाहिए।
इस व्यवस्था का उद्देश्य कर्मचारी को रिटायरमेंट के समय तत्काल आर्थिक सहायता देना और उसके बदले भविष्य में पेंशन का एक हिस्सा निर्धारित समय तक कम रखना है। लेकिन पेंशनभोगियों का एक वर्ग मानता है कि 15 साल की अवधि मौजूदा परिस्थितियों में अधिक है और इसकी समीक्षा की जानी चाहिए।
पेंशनर्स संगठनों की क्या है मांग?
पेंशनर्स संगठनों और कर्मचारी यूनियनों का कहना है कि कम्यूटेड पेंशन की एकमुश्त रकम की भरपाई लगभग 10 से 12 वर्षों में हो जाती है। उनके तर्क के अनुसार, इस अवधि में मूल रूप से दी गई राशि और उस पर ब्याज के बराबर रकम की वसूली हो सकती है। इसलिए 15 साल तक पेंशन का हिस्सा काटना उचित नहीं है।
इसी आधार पर संगठनों ने मांग उठाई है कि कम्यूटेड पेंशन की बहाली 15 साल के बजाय करीब 11.5 से 12 साल में कर दी जाए। इससे रिटायर कर्मचारियों को कुछ वर्ष पहले पूरी मासिक पेंशन मिलने लगेगी और उनकी नियमित आमदनी में बढ़ोतरी होगी।
हाई कोर्ट में पहुंचा था मामला
कम्यूटेड पेंशन की बहाली की अवधि घटाने का मुद्दा अदालत तक भी पहुंचा था। याचिकाकर्ताओं ने मांग की थी कि पेंशन का कम्यूट किया गया हिस्सा 15 साल के बजाय लगभग 11.5 से 12 साल में बहाल किया जाए। उनका तर्क था कि एकमुश्त दी गई राशि की भरपाई निर्धारित अवधि से पहले हो जाती है, इसलिए पेंशन में कटौती जारी रखने की जरूरत नहीं होनी चाहिए।
हालांकि, हाई कोर्ट ने इस मांग को स्वीकार करते हुए 11.5 या 12 साल बाद पेंशन बहाल करने का निर्देश देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कम्यूटेशन से जुड़े विषय को जटिल बताते हुए कहा कि इसमें नीतिगत पहलुओं पर विचार करना आवश्यक है।
पेंशनभोगियों को फिलहाल क्या समझना चाहिए?
केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कम्यूटेड पेंशन की बहाली से संबंधित मौजूदा अवधि 15 साल है। इसे घटाकर 11.5 से 12 साल करने की मांग संगठनों की ओर से उठाई गई है, लेकिन इस पर आधिकारिक मंजूरी या नियम में बदलाव की पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।
आने वाले समय में आठवें वेतन आयोग और सरकार के स्तर पर पेंशन से जुड़े सुझावों पर क्या विचार किया जाता है, इस पर पेंशनभोगियों की नजर रहेगी। यदि भविष्य में कम्यूटेशन की अवधि घटाने का फैसला होता है, तो इससे उन रिटायर कर्मचारियों को लाभ मिल सकता है जिनकी मासिक पेंशन का एक हिस्सा अभी कट रहा है।
फिलहाल 15 साल की अवधि को लेकर बहस जारी है। एक तरफ पेंशनर्स संगठन इसे कम करने की मांग कर रहे हैं, वहीं अदालत ने इस मामले में सीधे अवधि घटाने का निर्देश नहीं दिया है। अब आगे की स्थिति सरकारी निर्णय और पेंशन नियमों में संभावित बदलाव पर निर्भर करेगी।





