सीहोर: भैरुंदा पुलिस ने नाबालिग बालिका को नर्मदापुरम से सुरक्षित दस्तयाब किया, दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट में आरोपी गिरफ्तार, जेल भेजा

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सीहोर। मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में नाबालिग बालिका के लापता होने के मामले में भैरुंदा पुलिस को महत्वपूर्ण सफलता मिली है। पुलिस ने परिजनों की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए नाबालिग बालिका को नर्मदापुरम से दस्तयाब कर सुरक्षित उसके परिजनों के सुपुर्द कर दिया है। इस मामले में पुलिस ने 26 वर्षीय आरोपी नबी खान को गिरफ्तार किया है। नाबालिग से पूछताछ के आधार पर प्रकरण में दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) की धाराएं भी बढ़ाई गई हैं। आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से वारंट जारी होने के बाद उसे जेल दाखिल करा दिया गया।

पुलिस के अनुसार, यह मामला 25 अक्टूबर 2026 को सामने आया था। बालिका के परिजनों ने थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई थी कि उनकी नाबालिग बेटी को उनका रिश्तेदार नबी खान बहला-फुसलाकर अपने साथ कहीं ले गया है। शिकायत की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल मामला दर्ज कर जांच शुरू की। इसके बाद वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में विशेष पुलिस टीम गठित की गई और बालिका की तलाश के लिए प्रयास शुरू किए गए।

25 अक्टूबर को परिजनों ने दर्ज कराई थी शिकायत

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, 25 अक्टूबर 2026 को फरियादी ने थाना भैरुंदा में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि उनकी नाबालिग लड़की को रिश्तेदार नबी खान अपने साथ बहला-फुसलाकर ले गया है और उसके बारे में कोई जानकारी नहीं मिल रही है।

परिजनों की शिकायत के आधार पर पुलिस ने अपराध क्रमांक 627/2026 दर्ज किया। शुरुआत में मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 137(2) के तहत प्रकरण कायम कर विवेचना में लिया गया।

नाबालिग बालिका से जुड़ा मामला होने के कारण पुलिस ने इसे गंभीरता से लिया। बालिका की तलाश के लिए आवश्यक जानकारी जुटाई गई और आरोपी की संभावित गतिविधियों के आधार पर पुलिस ने जांच आगे बढ़ाई।

एसपी सोनाक्षी सक्सेना के निर्देश पर गठित की गई टीम

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक सीहोर श्रीमती सोनाक्षी सक्सेना ने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। उनके निर्देशन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. प्रशांत चौबे और एसडीओपी रौशन जैन के मार्गदर्शन में पुलिस टीम गठित की गई।

थाना प्रभारी निरीक्षक घनश्याम दांगी के नेतृत्व में गठित टीम को नाबालिग बालिका की तलाश कर उसे सुरक्षित दस्तयाब करने की जिम्मेदारी दी गई। पुलिस ने उपलब्ध सूचनाओं और जांच के आधार पर संभावित स्थानों पर तलाश शुरू की।

जांच के दौरान पुलिस को आरोपी के संबंध में जानकारी मिली। इसके बाद टीम ने कार्रवाई करते हुए नर्मदापुरम में दबिश दी और आरोपी के कब्जे से नाबालिग बालिका को दस्तयाब कर लिया।

पुलिस के मुताबिक, बालिका को सुरक्षित बरामद करने के बाद आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई और उसे उसके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया।

नाबालिग के बयान के आधार पर बढ़ाई गईं धाराएं

बालिका की दस्तयाबी के बाद पुलिस ने उससे पूछताछ की। पुलिस के अनुसार, पूछताछ में सामने आए तथ्यों के आधार पर मामले में दुष्कर्म और लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम यानी पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) की संबंधित धाराएं बढ़ाई गईं।

पॉक्सो कानून बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से बनाया गया है। इस कानून के तहत नाबालिगों के विरुद्ध होने वाले यौन अपराधों के मामलों में विशेष कानूनी प्रावधान किए गए हैं। ऐसे मामलों में पुलिस को शिकायत और जांच के आधार पर संबंधित धाराओं में कार्रवाई करनी होती है।

इस प्रकरण में भी बालिका से पूछताछ के बाद पुलिस ने शुरुआती धाराओं में बदलाव करते हुए दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट से संबंधित प्रावधान जोड़े। इसके बाद आरोपी के खिलाफ गिरफ्तारी की कार्रवाई की गई।

यहां उल्लेखनीय है कि नाबालिग पीड़िता की पहचान और उससे जुड़ी निजी जानकारी का सार्वजनिक किया जाना कानूनन प्रतिबंधित है। इसलिए उसकी पहचान से संबंधित किसी भी विवरण को सार्वजनिक नहीं किया जाना चाहिए।

26 वर्षीय आरोपी गिरफ्तार, न्यायालय के आदेश पर जेल भेजा

पुलिस ने इस मामले में आरोपी नबी खान पिता मुवारिक खान, उम्र 26 वर्ष, निवासी ग्राम चमेटी, थाना भैरुंदा, जिला सीहोर को गिरफ्तार किया है।

बालिका की दस्तयाबी और पूछताछ के बाद पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर आवश्यक कानूनी कार्रवाई पूरी की। इसके बाद उसे माननीय न्यायालय के समक्ष पेश किया गया।

पुलिस की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, न्यायालय द्वारा वारंट प्रदान किए जाने के बाद आरोपी को जेल दाखिल करा दिया गया। इस तरह नाबालिग बालिका के लापता होने से शुरू हुए मामले में पुलिस ने बालिका को बरामद करने के साथ आरोपी की गिरफ्तारी और न्यायालयीन प्रक्रिया भी पूरी की।

बच्चों की सुरक्षा और समय पर पुलिस कार्रवाई का महत्व

नाबालिग बच्चों से जुड़े मामलों में शुरुआती समय काफी महत्वपूर्ण होता है। जब किसी बच्चे के लापता होने या बहला-फुसलाकर ले जाने की शिकायत सामने आती है, तब पुलिस और परिजनों के बीच त्वरित समन्वय जरूरी होता है। समय पर शिकायत दर्ज होने से पुलिस को तलाश और जांच की प्रक्रिया शुरू करने में मदद मिलती है।

भैरुंदा का यह मामला भी इसी तरह की संवेदनशीलता से जुड़ा है। परिजनों की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने अपराध दर्ज किया और वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में टीम गठित कर तलाश शुरू की। पुलिस के अनुसार, इसी कार्रवाई के दौरान नर्मदापुरम से बालिका को दस्तयाब किया गया।

इस तरह के मामलों में केवल बालिका की बरामदगी ही नहीं, बल्कि उसकी सुरक्षा, स्वास्थ्य, मानसिक स्थिति और आवश्यक कानूनी सहायता का ध्यान रखना भी महत्वपूर्ण होता है। बाल संरक्षण से जुड़े कानूनों का उद्देश्य पीड़ित बच्चों को न्याय दिलाने के साथ उनके अधिकारों की रक्षा करना भी है।

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