बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर रेल मंडल में बन रहे एक रोड ओवरब्रिज (आरओबी) की डिजाइन को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (एसईसीआर) के बिलासपुर मंडल के अंतर्गत जयरामनगर और गतौरा रेलवे स्टेशनों के बीच समपार संख्या 361, जिसे परसदा फाटक के नाम से जाना जाता है, पर नए रोड ओवरब्रिज का निर्माण किया जा रहा है। इस परियोजना का उद्देश्य रेलवे क्रॉसिंग पर सड़क यातायात की आवाजाही को बेहतर बनाना है, लेकिन प्रस्तावित सड़क मार्ग के आकार को लेकर चिंता जताई जा रही है।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, रेलवे ने भारी-भरकम क्रेन की मदद से पुल के गर्डर लॉन्च करने की प्रक्रिया शुरू की है। इससे निर्माण कार्य में तेजी आने की बात कही गई है। हालांकि, निर्माण स्थल की ड्रोन तस्वीरों के आधार पर पुल की डिजाइन और वाहनों की आवाजाही के रास्ते पर सवाल उठाए जा रहे हैं। सबसे बड़ी चिंता रेलवे ट्रैक पार करने के बाद सड़क के लगभग 180 डिग्री के हेयरपिन यू-टर्न के रूप में मुड़ने को लेकर है।
रेलवे ट्रैक पार करते ही लेना पड़ सकता है तीखा यू-टर्न
सामान्य तौर पर रोड ओवरब्रिज का उद्देश्य रेलवे ट्रैक के ऊपर से सड़क यातायात को सुरक्षित और सुगम तरीके से निकालना होता है। इससे रेलगाड़ियों के गुजरने के दौरान समपार पर लगने वाले जाम और वाहनों के इंतजार की समस्या कम करने में मदद मिल सकती है। लेकिन पुल की उपयोगिता केवल उसके निर्माण से तय नहीं होती। उसके दोनों ओर सड़क की चौड़ाई, ढलान, मोड़, दृश्यता और वाहनों के आवागमन की व्यवस्था भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।
परसदा फाटक पर बन रहे आरओबी की प्रस्तावित डिजाइन के संबंध में बताया गया है कि रेलवे ट्रैक पार करने के बाद वाहन चालकों को सीधे आगे बढ़ने के बजाय लगभग 180 डिग्री का यू-टर्न लेना पड़ेगा। इस तरह का तीखा मोड़ बड़े वाहनों, मालवाहक गाड़ियों और तेज गति से आने वाले वाहनों के लिए विशेष चुनौती पैदा कर सकता है।
ब्लाइंड स्पॉट को लेकर उठी चिंता
इस निर्माण परियोजना को लेकर सबसे प्रमुख सवाल कथित ब्लाइंड स्पॉट को लेकर है। ब्लाइंड स्पॉट ऐसी स्थिति होती है, जिसमें सड़क पर मौजूद किसी मोड़, दीवार, संरचना या अन्य अवरोध के कारण चालक को सामने से आने वाला वाहन या सड़क का अगला हिस्सा समय रहते दिखाई नहीं देता।
यदि परसदा फाटक के आरओबी पर वास्तव में ऐसा तीखा मोड़ बनता है, जहां से विपरीत दिशा का यातायात दिखाई नहीं देता, तो यह सड़क सुरक्षा की दृष्टि से गंभीर विषय हो सकता है। वाहन चालक को सामने से आने वाले वाहन का पता देर से चलने पर अचानक ब्रेक लगाने या दिशा बदलने की जरूरत पड़ सकती है। ऐसी स्थिति में पीछे से आ रहे वाहन के टकराने अथवा विपरीत दिशा के वाहनों के बीच भिड़ंत का जोखिम बढ़ सकता है।
ड्रोन तस्वीरों के बाद इंजीनियरिंग मानकों पर सवाल
निर्माण स्थल की ड्रोन तस्वीरों के सामने आने के बाद पुल की डिजाइन को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। ऊंचाई से ली गई तस्वीरों में सड़क के घुमाव और उसके आसपास की संरचना को एक साथ देखा जा सकता है। इससे परियोजना की सामान्य बनावट समझने में मदद मिलती है, लेकिन केवल तस्वीरों के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि पुल तकनीकी मानकों के अनुरूप है या नहीं।
किसी भी आरओबी की डिजाइन तैयार करते समय सड़क सुरक्षा और इंजीनियरिंग के कई पहलुओं पर विचार किया जाता है। इनमें वाहनों की संभावित गति, मोड़ की त्रिज्या, सड़क की चौड़ाई, ढलान, दृश्य दूरी, जल निकासी और सुरक्षा उपाय शामिल हैं। साथ ही, स्थानीय भू-स्थिति, उपलब्ध जमीन और आसपास की मौजूदा सड़क व्यवस्था भी डिजाइन को प्रभावित कर सकती है।




