फ्लाईदुबई फ्लाइट में भारतीय पायलट पर हमला: कॉकपिट में हथियार कैसे पहुंचा? चाकू नहीं, ‘क्रैश एक्स’ के इस्तेमाल की जांच

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दुबई से इजरायल के तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 में भारतीय कैप्टन स्मित मछार पर हुए कथित हमले ने विमान सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे अहम सवाल यह है कि अगर कॉकपिट के अंदर सह-पायलट ने कैप्टन पर हमला किया, तो उसके पास हथियार आया कहां से? शुरुआती रिपोर्टों में हमले के लिए चाकू के इस्तेमाल की बात सामने आई थी, लेकिन बाद की रिपोर्टों में संकेत मिला है कि कथित हमलावर विमान के बाहर से कोई चाकू या अन्य हथियार लेकर कॉकपिट तक नहीं पहुंचा था। जांच में अब कॉकपिट में मौजूद आपातकालीन ‘क्रैश एक्स’ या फायर एक्स के इस्तेमाल की संभावना पर ध्यान दिया जा रहा है। हालांकि, घटना की पूरी तस्वीर अभी जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

शुरुआत में चाकू से हमले की बात आई

घटना के शुरुआती विवरणों में यात्रियों और मीडिया रिपोर्टों के हवाले से बताया गया कि को-पायलट ने कैप्टन पर चाकू से हमला किया। कुछ यात्रियों ने कथित तौर पर कॉकपिट के बाहर घायल पायलट को देखा था और इस दौरान विमान में मौजूद लोगों को स्थिति की गंभीरता का पता चला। यही वजह रही कि घटना सामने आने के बाद सबसे पहला सवाल यह उठा कि कड़े विमानन सुरक्षा प्रोटोकॉल के बावजूद एक चाकू कॉकपिट तक कैसे पहुंचा।

हालांकि, बाद में सामने आई जानकारी ने इस सवाल को एक अलग दिशा दे दी। रिपोर्टों के अनुसार, कथित हमलावर बाहर से कोई चाकू या दूसरा हथियार लेकर विमान में नहीं आया था। अब जांच इस संभावना पर केंद्रित है कि हमले के लिए विमान के कॉकपिट में पहले से मौजूद आपातकालीन उपकरण का इस्तेमाल किया गया हो सकता है।

क्या था ‘क्रैश एक्स’?

विमानों में आपात परिस्थितियों के लिए कुछ सुरक्षा और बचाव उपकरण रखे जाते हैं। इनमें एक आपातकालीन कुल्हाड़ी या ‘क्रैश एक्स’ भी शामिल हो सकती है। इसका उद्देश्य किसी आपात स्थिति में बचाव कार्यों में मदद करना होता है। इसी उपकरण के कथित इस्तेमाल ने इस घटना को लेकर सुरक्षा से जुड़े सवालों को और गंभीर बना दिया है।

जागरण और अन्य रिपोर्टों में बताया गया है कि जांच में यह संभावना सामने आई है कि कैप्टन स्मित मछार पर हमला करने के लिए कॉकपिट में मौजूद ‘क्रैश एक्स’ का इस्तेमाल किया गया। अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों में भी इस तरह के आपातकालीन उपकरण के संभावित इस्तेमाल का उल्लेख किया गया है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि जांच पूरी होने से पहले इसे अंतिम रूप से हमले का हथियार मानना जल्दबाजी होगी।

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