नई दिल्ली। गेहूं की खेती करने वाले किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में बढ़ोतरी एक महत्वपूर्ण खबर है। रबी मार्केटिंग सीजन 2027-28 के लिए गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाकर 2,610 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है। इससे पहले गेहूं का MSP 2,585 रुपये प्रति क्विंटल था। इस तरह नए सीजन में सरकारी खरीद के लिए निर्धारित समर्थन मूल्य में 25 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई है।

हालांकि, इस फैसले के बाद किसानों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि 25 रुपये की बढ़ोतरी से उनकी कुल कमाई में कितना अंतर आएगा। खेती में बीज, खाद, कीटनाशक, डीजल, सिंचाई, कृषि मशीनों और मजदूरी पर लगातार खर्च होता है। ऐसे में केवल समर्थन मूल्य बढ़ने से होने वाले अतिरिक्त भुगतान को समझना जरूरी है। वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि किसान कितनी मात्रा में गेहूं बेचता है और उसकी खेती पर कुल लागत कितनी आई है।
100 क्विंटल गेहूं बेचने पर कितनी बढ़ेगी कमाई?
किसानों के लिए बढ़ोतरी का असर समझने का सबसे आसान तरीका कुल बिक्री की गणना करना है। यदि कोई किसान सरकारी खरीद केंद्र पर 100 क्विंटल गेहूं बेचता है, तो पुराने MSP के हिसाब से उसे 2,58,500 रुपये मिलते।
नए MSP पर इतनी ही उपज बेचने से कुल बिक्री राशि 2,61,000 रुपये हो जाएगी। दोनों राशियों के बीच 2,500 रुपये का अंतर है। यानी 100 क्विंटल गेहूं बेचने वाले किसान को पहले की तुलना में 2,500 रुपये अधिक मिल सकते हैं।
इसी तरह, यदि किसान 50 क्विंटल गेहूं बेचता है, तो उसे 1,250 रुपये अतिरिक्त मिलेंगे। वहीं 200 क्विंटल गेहूं की बिक्री पर यह अंतर 5,000 रुपये होगा। इससे स्पष्ट है कि MSP में बढ़ोतरी का कुल लाभ किसान की बिक्री की मात्रा के अनुपात में बढ़ता है।
खेती की लागत से कैसे जुड़ा है MSP का फायदा?
गेहूं की खेती में किसान को बुवाई से लेकर फसल की कटाई और बिक्री तक कई प्रकार के खर्च उठाने पड़ते हैं। इनमें खेत की तैयारी, बीज की खरीद, खाद और उर्वरक, सिंचाई, डीजल, मजदूरी तथा कटाई के लिए मशीनों का खर्च शामिल है।
इसके अलावा, कुछ किसानों को फसल की ढुलाई और भंडारण पर भी खर्च करना पड़ सकता है। इन सभी मदों की लागत अलग-अलग क्षेत्रों में अलग हो सकती है। जमीन का प्रकार, सिंचाई की उपलब्धता, मौसम, कृषि उपकरणों का उपयोग और उत्पादन की मात्रा भी कुल खर्च को प्रभावित करते हैं।
ऐसी स्थिति में प्रति क्विंटल 25 रुपये की बढ़ोतरी किसानों के लिए कुछ अतिरिक्त आय जरूर उपलब्ध करा सकती है, लेकिन इससे खेती की लागत पर कितना असर पड़ेगा, यह प्रत्येक किसान के खर्च पर निर्भर करेगा।
MSP बढ़ने और वास्तविक मुनाफे में क्या अंतर है?
न्यूनतम समर्थन मूल्य वह निर्धारित कीमत है, जिसके आधार पर सरकारी खरीद की जाती है। इसका उद्देश्य किसानों को उनकी उपज के लिए एक घोषित समर्थन मूल्य उपलब्ध कराना है। लेकिन MSP में बढ़ोतरी का अर्थ यह नहीं है कि किसान का शुद्ध मुनाफा भी उसी अनुपात में बढ़ जाएगा।
वास्तविक मुनाफा निकालने के लिए किसान को कुल बिक्री राशि में से खेती की लागत घटानी होगी। उदाहरण के लिए, यदि किसी किसान को गेहूं की बिक्री से 2,61,000 रुपये प्राप्त होते हैं, तो इसमें से बीज, खाद, सिंचाई, मजदूरी, मशीनों और अन्य खर्चों को घटाने के बाद बची राशि उसका अनुमानित शुद्ध लाभ होगी।
यहां यह ध्यान रखना भी जरूरी है कि किसान की पूरी उपज सरकारी खरीद में शामिल हो, यह अपने आप सुनिश्चित नहीं होता। बिक्री का वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि कितनी उपज खरीदी जाती है और किसान को किस कीमत पर बिक्री का अवसर मिलता है।




